हाथ का स्वादिष्ट खाना टिफिन सर्व करके खुश होती हैं निधि गर्ग
Ghaziabad News
भारत
चेतना मंच
29 Oct 2023 09:29 PM
Ghaziabad News गाजियाबाद। महिलाएं आज अपनी आत्मनिर्भरता के लिए किसी की मोहताज नहीं हैं। यही नहीं अपने परिवार को पालने में पूरा दायित्व निभाने के साथ वह अपने आस पड़ोस के उन लोगों के खाने का भी ध्यान रख रही हैं। जिन बच्चों को नौकरी या पढ़ने के दौरान मां के हाथ का खाना नहीं मिल पाता है और वह कुलचे छोले मैगी जैसी चीज खाकर बीमार होने की स्थिति में आ जाते हैं। उन सबके लिए एक ऐसी ही महिला है जो मां का दायित्व निभा रही हैं। गाजियाबाद वैशाली के सेक्टर 6 की ऐसी ही एक संस्कृत टीचर हैं निधि गर्ग।
मां के हाथ जैसा जादू निधि गर्ग के टिफिन में
निधि गर्ग अपने आसपास के उन तमाम नौकरी करने वाले या पढ़ने वाले बच्चों के लिए मां जैसा खाना टिफिन में अपने हाथ के बने स्वादिष्ट व्यंजन को सर्व करती हैं। और वह बच्चे उन्हें आंटी कहकर फोन का टिफिन पाते ही खुश हो जाते हैं। और कहते हैं आपके खाने में तो मां के खाने जैसा जादू है। और सबसे बड़ी बात यह है कि आप अरबी भिंडी टिंडा जैसी सब्जी भी हमें मां के हाथ जैसा स्वादिस्ट बनाकर खिलाती हैं। हमें लगता ही नहीं कि हम घर में हैं या हम घर के बाहर आंटी के बने हाथ का खाना खा रहे हैं।
घरेलू महिलाओं की प्रेरणा स्रोत
हमने निधि गर्ग से इस बारे में बात की, वह संस्कृत की टीचर हैं फिर भी आपने यह साथ में टिफिन का काम क्यों शुरू किया। इस बारे में उन्होंने कई ऐसी बातें बताई कि सच में उन बच्चों के प्रति ममता उमड़ आती है जो घर के बाहर घर से दूर दिन भर थकान के बाद अपने मां के हाथ का स्वाद का खाना नहीं खा पाते। पढ़ाई करते हुए किराए पर रहकर अपने घर का खाना खाने के लिए तरसते हैं और जो भी मिल जाता है, उसी से पेट भरने की कोशिश करते हैं ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो।
टिफिन की कहानी
दरअसल निधि गर्ग प्रेरणा का स्रोत है जो बताता है कि अपने मोहल्ले पड़ोस में आपको कहीं भी ऐसे युवा जो घर के खाने के लिए के लिए तरसते रह जाते हैं हम भी उनका ध्यान रखें। और मां-बाप से दूर बैठे उन बच्चों को हम भी अपने हाथ का बना खाना खिला सकें और साथ के साथ अपने जीवन यापन के लिए भी घर बैठे कमाई कर सकें। आज यह ट्रेंड काफी महिलाओं ने शुरू किया है। उसी में से निधि गर्ग की कहानी भी करोड़ों महिलाओं के लिए मिशाल है।
घर की रसोई में बने खाने का टिफिन मात्र 100 रुपये में
निधि गर्ग ने बताया, कि आज महंगाई बहुत हो गई है, हर सब्जी महंगी है, तेल महंगा है लेकिन मैं फिर भी नफा नुकसान ना लेते हुए ₹100 में उन बच्चों को खाने का टिफिन देती हूं। जो खास तौर से उन बच्चो के लिए आसपास के सेक्टर में दूर दराज से अपने घरों से आकर यहां पढ़ाई कर रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं। टिफिन की शुरुआत मैंने अपनी बिल्डिंग से ही की थी। जब मैं देखती थी कि किराए पर रह रहे बच्चे कभी कुलचे लेकर आते थे और कभी छोले भटूरे या उनके हाथों में मैगी होती थी। मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा आंटी क्या करें मां के हाथ का खाना तो मिल नहीं पता है। यही सब खा खा कर हम काम चलाते हैं। जब घर से फोन आता है तो मां भी परेशान होती है। अब आप ही बताओ हम मैगी ना खाएं तो क्या आप बनाओगी आंटी हमारे लिए खाना। यह बात मुझे काफी चुभ गई थी अंदर तक। मैं रात भर सोचती रही कि मुझे इन बच्चों को खाना बना कर देना चाहिए। मैंने मन ही मन डिसाइड किया कि मैं इन बच्चों को टिफिन बनाने का ऑफर दूंगी। इसके दो फायदे होंगे पहले इन बच्चों को अच्छा खाना मिल सकेगा दूसरे मुझे भी घर बैठे काम मिल सकेगा। क्योंकि इस बीच कोरोना के समय में मेरी नौकरी छूट गई थी।
और मैंने पूरे खर्च का हिसाब लगाया तो ₹100 कम से कम लागत नहीं बैठ रही थी। इसलिए मैंने ₹100 की कीमत पर बच्चों को टिफ़िन देकर यह शुरुआत कर दी। धीरे-धीरे मेरे पास नजदीकी हॉस्पिटल स्कूल और दूसरे सेक्टरों से भी मेरे खाने की डिमांड आने लगी। और मैं घर पर संस्कृत पढ़ाने का ट्यूशन का काम भी साथ के साथ शुरू कर दिया। क्योंकि एक महिला के लिए आर्थिक निर्भरता अपने बच्चों के लालन पोषण के लिए और खुद के लिए बहुत जरूरी है। ताकि हम अपने पति और परिवार के स्वास्थ्य और शिक्षा में अच्छा योगदान दे सकें इसलिए मैंने यह दोनों काम शुरू रखे और ईश्वर की कृपा से कोरोना काल में भी जब सारी दुनिया खाने से जूझ रही थी हमने खुद भी खाया और दूसरे को भी खिलाया।
कई सेक्टरों से आते हैं खाने की डिमांड
अब मेरे पास छोटी-मोटी इवेंट के लिए भी खाना बनाने के ऑर्डर आने लगे हैं। बड़े आर्डर अभी इसलिए नहीं ले पाती क्योंकि उसके लिए अधिक पैसे और व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। मैं यह सब कुछ अपने घर की किचन से ही पूरी शुद्धता और पोषक आहार के साथ बच्चों को खाना सर्व करती हूं और मुझे इसमें संतुष्टि है। मैं अपने घर के बनाए खड़े मसाले से ही स्वादिष्ट भोजन बनाती हूं, इसमें होटल की तरह से कोई तेल या मसाले की अधिकता नहीं होती जो बाद में खाने के बाद समस्या करें। मेरे खाने में हर रोज अलग विविधता होती है, पनीर से लेकर दाल रोटी, पूरी सब्जी, पालक पनीर, चावल, रायता, मिठाई, हलवा सभी कुछ अलग-अलग दिन के हिसाब से अलग-अलग बनाते हैं।
पोशक और स्वादिष्ट खाना देने की संतुष्टि
मुझे अब सबसे बड़ी संतुष्टि यह है कि मैं घर से दूर बैठे बच्चों के लिए स्वादिष्ट और पोषक आहार दे पा रही हूं क्योंकि मुझे लगता है कल मेरे बच्चे कहीं नौकरी पर दूर जाएंगे तो उनके सामने भी खाने की दिक्कत आएगी।
कोरोना काल में तो सभी ने सिखाया की जिंदगी की पहली प्राथमिकता है खाना
कोरोना ने सभी को बताया कि खाना जीवन की पहली प्राथमिकता है और बाद में लग्जरी जीवन की जरुरत। और तब बड़े-बड़े लोगों के घर में लॉकडाउन के समय खाने की ही किल्लत हुई थी और लोगों ने खाने से जुड़े पैकेट आटा दाल चावल के ऑर्डर अंधाधुंध दिए थे और दुकानों से पुराने से पुराना आउटडेटेड सामान भी फटाफट बिक गया था। होटल और रेस्टोरेंट पर जाना भी सबका रुक गया था। ऐसे में घर के खाने की ही सबको याद आ रही थी और सबसे बड़ी बात यह है कि संतरी से लेकर मंत्री तक लोगों ने अपने घरों में व्यंजन तैयार किया। और फेसबुक और व्हाट्सएप इंस्टाग्राम आदि पर शेयर किए थे।
कोरोना कल में ही चुना टिफिन का प्रोफेशन
इसीलिए मैंने कोरोना काल में इस टिफिन के काम को चुना और इस काम से तमाम बच्चों को मैं स्वास्थ्य और पोषण से भरपूर खाना देने का कार्य कर रही हूं। और मुझे इसमें एक मां के ममता की संतुष्टि नजर आती है जो बच्चों को खाना खिलाकर खुशी महसूस करती है।
घरेलू महिलाएं आगे आएं
हां मैं घरेलू महिलाओं से कहना चाहूंगी की जीवन में उनके हाथ में सबसे बड़ी दौलत और उपहार है वह है उनके हाथ का बनाया स्वादिष्ट और पोषक भोजन। हर महिला को खाना बहुत प्यार से ही बनाना चाहिए और प्यार से ही अपने परिवार को सर्व करना चाहिए। पूरी शुद्धता स्वच्छता और खुशी मन से पोषक आहार बनाना चाहिए। क्योंकि स्वादिष्ट भोजन और पोषक भोजन ही सबसे बड़ी खुशी देता है।
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