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सुनील वैद्य ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने गांधी जयंती पर स्वच्छता पखवाड़े के दौरान ( 1 तारीख, 1 घंटा, एक साथ) स्वच्छता अभियान की अपील की है जिसके तहत नगर निगम और जनप्रतिनिधि तमाम स्वच्छता अभियान चलाएंगे लेकिन क्या यह सार्थक होंगे क्या ये अभियान एलिवेटेड रोड पर गंदगी और टूटी सीवर लाइन पर चलाया जाएगा? यह मांग सुनील वैद्य ने गांधी जी के ही अंदाज में की है और कहां है कहीं हम ऐसे बंदर ना बंन कर रह जाए जो ना देखते हैं ना सुनते हैं ना बोलते हैं... हालांकि यह बात गांधी जी ने अहिंसा के बारे में कही थी लेकिन सुनील यह प्रश्न स्वच्छता के बाबत कर रहे है आमतौर पर जनता अपने आसपास बिखरी गंदगी, बर्बाद होते पानी, टूटी-फूटी पाइप लाइनों को देखकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देती और गांधी जी के तीन बंदरों की तरह चुप रहती हैं।
नगर निगम पर अनूठे अंदाज में प्रश्न दागा है.... और नगर निगम अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से एलिवेटेड रोड पर स्वच्छता करने और सेक्टर 3 में वैशाली की पुलिया के बीच टूटी हुई सीवर लाइन जिसका पानी हिंडन नहर के पीने के पानी में गिर रहा है जिससे नहर का पानी प्रदूषित हो रहा है और पानी की बर्बादी हो रही है। उसकी वीडियो जारी करके कार्यक्रम की बाबत प्रश्न किया है कि क्या क्या इन कामों को किया जा रहा है या हम गांधी जी के बंदरों की तरह बनकर रह जाएंगे और लिखा है...
"श्रीमान आप सभी से अनुरोध है इस बारे में सूचित किया जाए क्या उपरोक्त दोनों कार्यों को पूरा किया जाएगा आपके द्वारा. क्या हम पुरानी तरह गांधीजी के. तीन बंदर बनकर रह जाए। और अपने मोबाइल को स्विच ऑफ कर दें। अब बंदरों का काम मोबाइल कर रहा है जो ना देखेगा ,ना ना बोलेगा और ना सुनेगा...
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सामाजिक कार्यकर्ता सुनील वैद्य ने दुखी मन से बताया कि उन्होंने क्षेत्र की तमाम स्वच्छता पानी और पार्कों की सफाई को लेकर 50 बिंदुओं का ज्ञापन कमिश्नर और जनप्रतिनिधियों को दिया जिसमें वैशाली और ट्रांसहिंडन क्षेत्र की सेक्टर स्तर की समस्याओं को उठाया गया था और इस ज्ञापन में और समय-समय पर मांग की लेकिन वह सब अनसुना देखकर ऐसा लग रहा है कि हम सब गांधी जी के वह तीन बंदर बन कर रह गए हैं जिसमें ना हम देखते हैं ना सुनते हैं ना बोलते हैं..उम्मीद करता हूं प्रधानमंत्री के स्वच्छता पखवाड़े में 1 तारीख एक साथ एक घंटा के तहत इन समस्याओं पर गौर किया जाएगा या फिर मैं फिर गांधी जी के बंदरों की तरह पोस्ट नहीं कर पाऊंगा...? टीम 100 प्रमुख सुनील वैद्य का फोन 3 दिन हताशा में रहेगा बंद... जबकि वह सामाजिक कार्य में रखते हैं फोन 24 घंटे खुला....इस कारण ना तो इन चीज को देखूंगा ना किसी को बोलूंगा ना किसी को पोस्ट कर पाऊंगा.....
एक सामाजिक कार्यकर्ता को ऐसे प्रश्नों से क्यों जूझना पड़ रहा है यह सवाल गंभीर चिंतन के लायक है। क्या प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कहीं इस प्रश्न के घेरे में तो नहीं...?