
GHAZIABAD SAMACHAR[/caption]
शायद यही वजह है कि प्राधिकरण के द्वारा जिन भूखंडों को आवासीय गतिविधि के लिए आवंटित किया गया, लेकिन इन दिनों उन्हीं भूखंडों के एक बड़े हिस्से को वैवाहिक गतिविधि एवं शेष हिस्से को लाज के तौर पर तब्दील किया जा रहा है। हैरत का पहलू ये है कि राष्ट्र मंडल खेल के दौरान जिन आवासीय भूखंडों को गेस्ट हाउस के तौर पर तब्दील करने की स्वीकृति दी गई थीं, उनमें भी वैवाहिक कार्यक्रम का आयोजन होते हुए देखा जा सकता है।
बताते है कि इंदिरापुरम शक्ति खंड के करीब तीन सौ मीटर साइज के भूखंड के एक बडे हिस्से को वैवाहिक कार्यक्रम के तौर पर तब्दील कर दिया गया। मजे की बात ये देखिएं कि बिल्डिंग से लगे भूखंड को भी वैवाहिक कार्यक्रम के तौर पर तैयार किया जा रहा है। लगता है कि जीडीए का प्रवर्तन विभाग इससे पूरी तरह से अनभिज्ञ है। बताते है कि ये खेल केवल इंदिरापुरम तक ही सीमित नहीं है। वैशाली सेक्टर एक में प्रसिद्व अस्पताल से चंद कदम की दूरी के मेन रोड से लगे एक बड़े भूखंड के एक बड़े हिस्से को वैवाहिक एवं दूसरे छोटे मोटे कार्यक्रम एवं अवशेष हिस्से को लाॅज के तौर पर तब्दील कर दिया गया है। बाकायदा बिल्डिंग में बीस कमरों का निर्माण किया गया है।
बताते है कि जीडीए के द्वारा विकसित इंदिरापुरम, वैशाली तथा कौशांबी में इस खेल को जबरदस्त तरीके से देखा जा सकता है। आरोप है कि जिन गेस्ट हाउस में वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है, उनमें पार्किंग की भी दूर तक व्यवस्था नहीं की गई है। आयोजन के दौरान रोड पर जाम की समस्या पैदा होती है।
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हादसों के बाद भी नहीं लिया जा रहा है सबक
देखा जाए तो आए दिन आग लगने के परिणाम स्वरूप समय—समय पर प्राधिकरण सीमा स्थित माॅल,नर्सिंग होम,बैंकट हाल,होटल आदि की पड़ताल होती है। इस दौरान कई बार ये उजागर हो चुका है कि ज्यादातर बिल्डिंग में आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। मामले सामने आने पर जीडीए के द्वारा नोटिस जारी किए जाते है,लेकिन समय के साथ मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।