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टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स ने आज 5 घंटे की अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाएं बंद रखने की अपील की गई है।

देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच अब गिग वर्कर्स ने भी अपनी नाराजगी खुलकर जतानी शुरू कर दी है। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों और ऐप कंपनियों द्वारा कम भुगतान दरों से परेशान टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स ने आज 5 घंटे की अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाएं बंद रखने की अपील की गई है। इस हड़ताल का असर Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato और दूसरी ऐप आधारित सेवाओं पर देखने को मिल सकता है। कई शहरों में लोगों को कैब बुकिंग और फूड डिलीवरी में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन यानी GIPSWU का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है लेकिन ऐप कंपनियां उसी हिसाब से किराया और इंसेंटिव नहीं बढ़ा रही हैं। इसका सीधा असर ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर पड़ रहा है। यूनियन का कहना है कि हजारों वर्कर्स के सामने अब परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। कई ड्राइवरों का दावा है कि ईंधन, कमीशन और दूसरी लागत निकालने के बाद उनके पास बहुत कम कमाई बचती है।
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर देशभर के गिग वर्कर्स से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। पोस्ट में कहा गया कि बढ़ती ईंधन कीमतों और कम भुगतान दरों के विरोध में ऐप आधारित सेवाओं को कुछ घंटों के लिए बंद रखा जाए।
यूनियन का कहना है कि यह हड़ताल सिर्फ विरोध दर्ज कराने के लिए नहीं है बल्कि सरकार और ऐप कंपनियों तक वर्कर्स की समस्याएं पहुंचाने की कोशिश भी है।
हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद कई शहरों में ईंधन की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल लगभग 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं हैदराबाद जैसे शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया है। ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनकी रोजी-रोटी सड़क पर निर्भर करती है। टैक्सी ड्राइवर और डिलीवरी वर्कर्स दिनभर वाहन चलाते हैं इसलिए पेट्रोल-डीजल का खर्च उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खा जाता है।
जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की वजह से भारत में भी ईंधन महंगा हुआ है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें काफी बढ़ी हैं।बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर पड़ा है।
कई कैब ड्राइवरों का कहना है कि पहले जितनी कमाई से घर आसानी से चल जाता था अब उतना पैसा ईंधन और वाहन खर्च में ही निकल जाता है। दिल्ली में कैब चलाने वाले मोहम्मद नाम के ड्राइवर का कहना है कि हर बार पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर उनका खर्च तुरंत बढ़ जाता है लेकिन किराए में उसी हिसाब से बदलाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि कमीशन और ईंधन का खर्च निकालने के बाद बहुत कम पैसा बचता है। डिलीवरी पार्टनर्स का भी कहना है कि लंबे समय तक सड़क पर रहने और बढ़ते खर्च की वजह से उनकी बचत लगातार कम हो रही है।
तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि हालिया बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियां अभी पूरी लागत वसूल नहीं कर पा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोल और डीजल दोनों पर कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम में और इजाफा हो सकता है।
गिग वर्कर्स यूनियन का कहना है कि फिलहाल यह केवल अस्थायी हड़ताल है लेकिन अगर सरकार और ऐप कंपनियों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है। वर्कर्स चाहते हैं कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से किराए और इंसेंटिव में बदलाव किया जाए ताकि उनकी कमाई और खर्च के बीच संतुलन बना रहे। फिलहाल देशभर के लाखों गिग वर्कर्स की नजर इस बात पर है कि उनकी इस हड़ताल का कितना असर होता है और सरकार या कंपनियों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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