Health Tips : गुड हेल्थ टिप्स : नींद में भी कोई चलता है क्या ?
Does anyone walk even in sleep?
भारत
चेतना मंच
21 Sep 2022 11:41 PM
मैं पंजाब अपने वकील भाई के बेटे की शादी में गई थी। मेरे फूफा मशहूर वकील, उनका बेटा भी बहुत ही लायक वकील, पर जिस लड़की पर फिदा हुआ, उसने ये ही शर्त रखी कि मैं अपने माता पिता की अकेली संतान हूं। अतः मेरे मायके में ही रहना होगा। रांझा बना वीर हीर के साथ सब छोड़-छाड़ चला गया। रात जब सब सो गए, तब भाभी ने वकील भाई के कमरे के बाहर से कुंडी लगा दी। मैं ये देख हैरान परेशान। जब सो न पाई तो भाभी से बातचीत छेड़ी, फिर शुरू हुआ वकील भाई का निंदा पुराण। नींद का मतलब होता है सोना, या आराम, पर इस आदमी ने तो सबकी नींद ही ले ली। इतने लायक भाई में इतनी कमियां अब कैसा विश्राम, मेरी तो नींद ही गायब। भाभी के अनुसार वकील साहब दिनभर शांत रहते हैं। रात को पहले खुद सो जाते हैं, फिर सबकी नींद उड़ाते हैं। रात को उठकर नींद में बड़बड़ाते हैं अपने मां-बाप से बातें कर, याद कर चिल्लाते हैं। कमाई बहुत ही कम हो गई, भाभी कह रहीं थीं। मेरी तो जिंदगी बर्बाद हो गई, ‘मैं की प्यार विचों खटया’। फूफा अभी जिंदा थे, रुतबा कायम था मैंने कहा। बुआ के घर का ठाठ तो मैंने देखा है। मैंने भाभी से कहा कि आप ससुराल लौट जाओ, भाभी ने टक से न कर दी और बोली हम तो इनके सोते ही बाहर से कुंडी लगा सो जाते हैं। कम पढ़ी लिखी सुंदरी मेरी भाभी, बल्कि रो के बोलीं, नींद में भी कोई चलता है क्या? आंसू तो मेरी आंखों में भी थे, पर बोली, अब तो ये जिंदगीभर चलेंगे और भी न जाने क्या क्या करेंगे।
Health Tips :
यह परिस्थिति केवल मेरे भाई की ही नहीं, किसी की भी हो सकती है। क्योंकि नींद में चलने की बीमारी, ‘एक दिमागी स्थिति है।’ मेडिकल सिचुएशन है, जिसे पैरासोंमनीय या नींद का विकार भी कहते हैं। यह विकार नींद के किसी भी चरण में हो सकता है। जिसमें रोगी नींद के दौरान इधर उधर घूम सकते हैं। खुद से बातें करते हैं, चिल्लाते हैं, कभी कभी तो अपने रेगुलर काम भी करने शुरू कर देते हैं। हम सोचते हैं कि वो जाग रहे हैं, पर असल में वो बेहोश होते हैं और जाग जाने पर उनको कुछ भी याद नहीं रहता। पर, इसकी वजह से गंभीर दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। कुछ भी नहीं तो इससे ग्रसित व्यक्ति दूसरे लोगों की आराम से नींद लेना भी मुसीबत बना देते हैं। बकायदा कभी कभी तो अपने रेगुलर काम भी करने लगते हैं। दरअसल, इंसान की नींद दो तरह की होती है, नॉन रेम नींद और रेम नींद। रातभर इन दोनों नींद के अनेक चक्र चलते हैं। पर, पेरासोमनिया अधिकांशतः गहरे नॉन रेम नींद में ही मिलता है। क्योंकि यह असामान्य व्यवहार है, इसमें दूसरों को या स्वयं को नुकसान भी पहुंचाया जा सकता है। तो इसका उपचार करवा रोगी को ठीक करवाना चाहिए। ना कि बाहर से कुंडी लगा उसको तड़पने या मरने को छोड़ देना चाहिए। क्योंकि कभी कभी युवा बच्चे पहले की गई गलतियों के पश्चाताप में भी रोगी हो जाते हैं।
सोते हुए व्यक्ति के असामान्य व्यवहार के अलावा भी, पैरासोमनिया अन्य कई लक्षण पैदा कर सकता है। जैसे भ्रमित या भटका हुआ सा जागना। मैं कहां हूं, कुछ गतिविधियों को याद करना। अपने शरीर पर अपरिचित कट खोजना। रातभर सोने में कठिनाई होने से दिन में नींद से जमहाइयां मारना या थकान महसूस करना पैरासोमनिया के कारण वंशानुगत या परिवारों में चली आ रही बीमारी के कारण, तनाव इसका बहुत ही महत्वपूर्ण कारण है। नींद की कमी, अराजक नींद कार्यक्रम, बुखार, मेगनिशियम की कमी, तनाव दूर करने को नशा या शराब का सेवन तो सोने में सुहागा, न्यूरोलेपटिक्क्स (मनोविकृति का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं), मामूली ट्रैंक्विलाइजर (शांत प्रभाव पैदा करने वाली दवाएं), उत्तेजक (ऐसी दवाएं जो गतिविधि को बढ़ाती हैं), और एंटीहिस्टामाइन (दवाओं का उपयोग) एलर्जी के लक्षण, स्लीप वॉकिंग की बढ़ती संभावना से जुड़े हैं। गर्भावस्था और मासिक धर्म जैसी स्थितियां भी महिलाओं में नींद में चलने की आवृत्ति को बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।
कुछ मामलों में अंदरुनी समस्या भी हो सकती हैं, जैसे कि बुखार होना, तनाव में रहना। स्ट्रोक होना, नार्कोलेप्सी, थायरॉइड, सिर में चोट लग जाना, टांग हिलाते रहना नींद संबंधित समस्या का विकार होना।
उपचार
आज भी हमारे देश में इस तरह के रोगों से बचने के लिए घरेलू उपचारों का प्रयोग किया जाता है और बहुत हद तक ये सार्थक भी हैं, जैसे कि सोने का टाइम सेट कर र्प्याप्त नींद लेना, योगा, मेडिटेशन आदि को लाइफ स्टाइल में शामिल करना। ग्रहणियों से स्पेशल निवेदन यदि आप सिर्फ घर के काम कर रही हैं तो यह काम सफिशिएंट नहीं है थकने के लिए। लॉन्ग वॉक, बच्चों को पढ़ाई के साथ साथ पार्क ले जाएं, वो भाग भाग कर खेलें तथा आप भी कुछ व्यायाम या वॉक करें। घर के सभी मिलकर तनाव मुक्त करें। तनाव परिवार के हर प्राणी पर असर डालता है। सोने से पहले कुछ भी एक्साइटिंग न पढ़ें, न देखें। बत्ती बुझाकर नींद का वातावरण बनाएं यदि कोई पैरासोमनिया से पीड़ित है तो गिरने से रोकने और चारपाई से बचने के लिए उपाय करें। यदि संभव हो तो भूतल पर शयनकक्ष में सोएं।
यादि ऐसा कोई व्यक्ति आपके घर में है, जिसे नींद में चलने की बीमारी है तो रात के समय अपनी छत को बंद कर दें और कोई भी तेज धारी वाली चीजों को छिपा दें, ताकि वह किसी दुर्घटना का शिकार न हो जाये। यदि समस्या गंभीर है तो चिकत्सीय सहायता अवश्य लें। यह समस्या बच्चों में अधिक होती है। ऐसे में उन्हें मार-पीट चिल्ला चिल्ला कर सुलाएं नहीं, बल्कि साथ सुलाएं, उनको खेल खिला शाम में थकाएं फिर रात को बाथरूम वगैरह करवा कम्फर्ट करें कि कोई डर नहीं है, बल्कि आप उनके साथ ही हैं। इससे वे जल्दी ठीक हो जायेंगे।
इस रोग से पीड़ित बच्चों में अधिकांशतः युवा होते होते ठीक भी हो जाते हैं। पर, बड़ों को स्लीप वॉक से जरूर जगायें, क्योंकि नहीं तो वे आपका या अपना अहित भी कर सकते हैं। शाम के बाद चाय, कॉफी या कैफीन से बचें, लेकिन फिर भी बच्चों-बड़ों सभी रोगियों में इस समस्या के मूल में जो भी वजह हो, उसके उपचार का प्रयास करना चाहिए। यह आवश्यक है कि स्लीप-वॉकिंग करने वाले रोगी पर लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि न तो वह स्वयं घायल हो और न उसके कारण किसी अन्य को कोई क्षति पहुंचे। नींद में चलने का विशेष उपचार नहीं है, हालांकि इस पर शोध जारी है।
अधिकतर मामलों में व्यक्ति की आदतों में सुधार कर ही ठीक किया जाता है। इससे व्यक्ति के कुछ लक्षणों को कम भी किया जाता है। यदि नींद में चलने की समस्या व्यक्ति को दुर्घटना की तरफ ले जा रही है तो चिकित्सक कुछ दवाओं का भी सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। अपने आसपास की जगह को साफ रखना चाहिए। इसके अलावा बिस्तर पर किसी तरह की धातु न रखें, जैसे चाकू व अन्य नोकीली चीजें। घर की खिड़कियां और दरवाजे को बंद रखें, अगर फिर भी नींद में कोई समस्या है तो शराब का सेवन न करें। सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें और रात को जल्दी सोने की आदत डालें। रोजाना आधे घंटे का व्यायाम करना चाहिए। शाम को अधिक तरल पदार्थ न पीएं, क्योंकि पेशाब न जाने पर नींद न लगने की समस्या होती है, इसलिए सोने से पहले पेशाब करने जरूर जाएं। हमारे देश में यह समस्या लगभग 40 लाख लोगों तक पहुंच गई है। संख्या बढ़ ही रही है। कहीं, इसका कारण आज एकल परिवार भी बनते जा रहे हैं। वर्किंग मां-बाप बच्चा आया के साथ। आया कहती है सो जाओ। घर पर थककर आए मां-पापा भी चाहते हैं बच्चा जल्दी सो जाये। बच्चा जल्दी सो रात को इस वहम में भी उठ रोने लगता है कि मां-पापा हैं या आया। दादा-दादी या नाना-नानी के संरक्षण में बच्चे बढ़ंे, सब थकते हैं और यंग माता पिता भी चैन से सोते हैं।
द हेल्थ टिप्स सेहत का खजाना। आज के लिए इतना ही। आप स्वस्थ रहें, सानंद रहें। फिर मिलते हैं अगले एपिसोड में।