Delhi/Noida : दिल्ली/नोएडा। आंखों की अच्छी सेहत का खजाना है ‘ड्राइ आइज’। हममें से बहुत से लोग जान ही नहीं पाते क्यूं हम इतना मलते हैं आंखों को, क्यों दर्द करती हैं बिन बात आंखें।
मेरा बेटा गोलू-मोलू, बहुत सुंदर पर बिल्कुल तोतला। जब छोटा था, तब तो सुनना बहुत प्यारा लगता था। पर, जब तीन साल का होने लगा, स्कूल जाने का समय आया, तब मुझे चिंता सताने लगी कि इसका तो नाम ही तोतला पड़ जाएगा। इसका इलाज था एक माइनर सा ऑपरेशन, पर उसको तो पूरा परिवार ही राजी नहीं था। ऐसे में मुझे एक ही बात सूझी कि इसकी हेल्थ बहुत अच्छी कर दी जाये। मेरा ज्वाइंट परिवार, उसमें चार बच्चे, मेरी इस सोच का सभी बच्चों ने अच्छा परिणाम दिया। सभी बच्चे हेल्दी, निरोगी, किसी को चश्मा नहीं और तोतला भी सही बोलने लगा। आज के दौर में गजेट्स के हद से ज्यादा इस्तेमाल से आंखों के रोग आम से हो गए हैं। यहां तक कि जो समस्याएं बड़ी उम्र में होती थीं, आज युवा भी उनका शिकार हो रहे हैं। घर में एयर कंडिशन चला घंटों वीडियो गेम्स, टीवी देखना, यहां तक कि टेलीफोन में भी घंटों पिक्चर देखना। इतना ही नहीं, छोटे-छोटे बच्चों का भी टीवी या फोन देखते हुए भोजन निगलना जन्म दे रहा है बहुत से आंखों के छोटे-मोटे रोगों को। ध्यान न दिये जाने पर जो कभी कभी नासूर भी बन जाते हैं। इन्हीं आंखों की परेशानियों में से एक है ड्राइ-आइज। करोना काल में ये कारण और भी बड़े। पर, कारण थे भी बहुत ही जायज, तब उनका अन्य कोई उपाय भी नहीं था। लेकिन, अब हमें इस और ध्यान देना चाहिए।
कारण :
जब आंसू का बनना और उसके बाहर निकलने में संतुलन नहीं हो पाता है। इससे हमारी आंखें सूखने सी लगती हैं। कभी-कभी सूखी आंखों वाले लोगों की आंखें या तो पर्याप्त आंसू ही पैदा नहीं कर पातीं या कभी उनके आंसुओं की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। रोजमर्रा की जिंदगी में ये समस्याएं न आयें, इनके लिए जागरूकता बहुत आवश्यक है। हमारी लापरवाही से कभी कभी छोटी सी परेशानी, जिसको हम खानपान से दूर कर सकते थे, पूरी बीमारी न बन जाये, इसके लिये आप भी अपनाएं मेरे इन आजमाए हुए नुस्खों को।
आज के समय में 15 साल से ही युवा मोटर साइकिल, स्कूटी भगाने लगते हैं। सच पूछें तो जरूरत भी है स्कूल, स्कूल के बाद ट्यूशन सेंटर फिर टयूशन सेंटर से घर। ऐसे में पैदल या साइकिल चलाने की ऊर्जा ही कहां रहती है बच्चों में। ऐसे में स्कूटी चलाते समय आंखों में तेज हवा लगने से, पहले आंखें कुछ सूखने सी लगती हैं और बच्चे या हम आंखों को मल-मलकर काम चला लेते हैं। कंप्यूटर या कोई और गजेट देखते हुए बच्चे हों या हम पलकें भी कम झपकाने लगते हैं। क्योंकि हमारा ध्यान पूरा देखने में ही केन्द्रित हो जाता है। सर्दियों में सर्द हवायें, कमरे में रूम हीटर चला ताप मान ज्यादा रखना, आई मेकअप का अत्यधिक इस्तेमाल इत्यादि आंखों में जलन को बढ़ा देते हैं। विशेषकर 50 वर्ष से ऊपर के लोगों में तो सर्दियों में ड्राय आई सिंड्रोम के मामले ज्यादा ही हो जाते हैं। क्योंकि पलक न झपकने से कमरे का तापमान अधिक होने से या तेज ठंडी हवाओं से आंखों से वाष्पीकरण बढ़ जाता है और आँखें चिकनी नहीं हो पातीं। तब आंखें सूखने लगती हैं। यदि यह कुछ ज्यादा ही सूखने लगे तो फिर शुरू होती है आंखों में खुजली, आंखें लाल, इनमें जलन की शिकायत, ऐसे में आंखों को जोर जोर से मलने से ही चैन आता है। पर, मलना तो आंखों के लिए बहुत ही हानिकारक है, वो भी बढ़ती उम्र में। ऐसे में आंखों में भारीपन सा महसूस होने लगता है। लंबे समय तक कांटेक्ट लेंस के इस्तेमाल से या लेजर सर्जरी के कारण भी कोर्निया की तंत्रिकाओं की संवेदनशीलता प्रभावित होने लगती है कभी कभी तो तंत्रिकायें क्षतिग्रस्त भी होने लगती हैं। इसे ही ड्राई आइज कहते हैं। यदि हम ये सब कुछ करना कम कर दें या छोड़ भी दें, फिर भी यदि ये समस्या खत्म न हो, तब इलाज ही एक माध्यम है, नहीं तो कभी कभी कोर्निया भी क्षतिग्रस्त हो जाता है। महिलाओं में आंसुओं का उत्पादन पुरूषों की तुलना में वैसे ही कम होता है, विशेषकर जब गर्भावस्था के कारण हार्मोन परिवर्तन होते हैं। गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन या फिर मीनोपॉज की स्थिति में पहुंचने पर भी ड्राई आइज सिंड्रोम का खतरा कुछ ज्यादा बढ़ जाता है।
उपाय :
बार बार पलक झपकाना, अपने कार्यस्थल पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना, कम्प्यूटर की स्क्रीन अत्यधिक ब्राइट न हो। कम्प्यूटर और आंखों के बीच कम से कम 12 इंच की दूरी रखना सही है। लेकिन, साथ ही साथ सर्वोत्तम आहार इस समस्या से बचने का सबसे उत्तम साधन है। जैसे मछली का तेल सूखती आंख को उलट सकता है, यह विटामिन ए, ओमेगा-3 से भरपूर होता है। नट्स (काजू, बादाम, खरबूजे, कद्दू की गिरियां) ओमेगा-3 तथा फैटी एसिड से भरपूर होती हैं। नट्स में विटामिन ई भी होता है। यह सभी आंखों की उम्र से संबंधित नुकसान से हमारी सुरक्षा करते हैं। पत्तेदार हरी सब्जियां ल्यूटिन और जेक्सैंथिन दोनों से भरपूर होती हैं। आंखों के अनुकूल विटामिन सी का भी एक बहुत अच्छा स्रोत होती हैं। ऐसे ही गाजर भी विटामिन ए और बीटा कैरोटीन से भरपूर होती है। बल्कि, बीटा कैरोटीन के कारण ही गाजर नारंगी होती है। शकरकंद बीटा कैरोटीन से भरपूर होती हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट होती हैं तथा विटामिन ई का भी एक अच्छा स्रोत है। खूब पानी पीना तो इसका एक अच्छा उपाय है ही। यानी की संतुलित पोषक भोजन जिसमें विटामिन ए (हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, ब्रोकली आदि) और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स (मछलियां, अखरोट और वनस्पति तेल आदि) अधिक मात्रा में खाएं और खिलाएं।
आंखों को तेज हवा से बचाएं, हेयर ड्रायर, कार हीटर, एयर कंडीशनर्स या पंखे की हवा को सीधे आंखों पर न आने दें। आंखों को तेज और सूखी हवा से बचाने के लिए शील्ड्स, आई ग्लासेस या स्कार्फ का इस्तेमाल करें। आई ब्रेक लें, यानि अगर आप पढ़ रहे हैं या कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं, तो नियमित अंतराल पर विराम लें। कुछ मिनट या सेकेंड के लिए अपनी आंखों को बंद कर लें या बार-बार आंखों को झपकाएं, ताकि आंसू एक समान रूप से पूरी आंखों में फैल जाएं। कम्प्यूटर की स्क्रीन को अपनी आंखों के लेवल (स्तर) से नीचे रखें अगर आपके कम्प्यूटर की स्क्रीन आपकी आंखों के लेवल के उपर होगा तो आपको स्क्रीन को देखने के लिए अपनी आंखों को अधिक खोलना पड़ेगा। कम्प्यूटर की स्क्रीन को अपनी आंखों के लेवल से नीचे रखने से आपको अपनी आंखों को अधिक नहीं खोलना पड़ेगा, और आंसुओं का वाष्पीकरण कम होगा। धूम्रपान से बचें, यदि आप धूम्रपान करते हैं तो छोड़ दें, क्योंकि धूम्रपान ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षणों को गंभीर बना देता है। बल्कि मैं तो कहूंगी धूम्रपान करने वालों से भी दूर रहें। हम सभी को एक समस्या रहती है कि बच्चे तो ये सब खाते ही नहीं, हम क्या करें। यकीन मानिए, बच्चे सब कुछ खाएंगे, सिर्फ मेरी ये तरकीब अपनाकर देखें। जो कुछ वे खा लेते हैं, उन्हें स्वयं खाने दें। जो नहीं खाते, जब आप उन्हें खिलाना चाहें, तब उस समय का भोजन पापा के साथ करवायें। बल्कि पापा स्वयं ही बच्चे के मुंह में डालें। मुश्किल से पांच बार खिलाने के बाद बच्चों में भी टेस्ट डेवलप हो जाता है फिर वे भी खाते हैं। इस प्रकार सारा परिवार ड्राई आइज से स्वयं को तथा अपने परिवार को बचाएं। यकीन मानिए आज भी दूरदराज गांव देहात में इलाज की सुविधायें नहीं हैं। रोग तो किसी को भी हो सकता है, ऐसे में घरेलू उपचार तथा स्वास्थ्यवर्धक भोजन ही इलाज बनता है।
आज के लिए इतना ही। आप चेतना मंच द्वारा प्रकाशित इन टिप्स के साथ स्वस्थ रहें, सानंद रहें। मिलते हैं गुड हेल्थ टिप्स के साथ अगले लेख में।