भारत में एक से बढक़र एक भगत (भक्त) तथा संत-महात्मा पैदा हुए हैं। भारत के भक्तों की परम्परा में एक बहुत बड़ा नाम गोरा भक्त का नाम है। भारत के जिस किसी नागरिक ने गोरा भक्त की कहानी नहीं पढ़ा-सुना है तो समझ लेना चाहिए कि उस व्यक्ति का ज्ञान अधूरा ज्ञान है। गोरा भक्त ने अपने जीवन में भगवान की भक्ति करके वह सब कुछ साबित किया है जो एक सच्चा भक्त बड़ी आसानी से कर देता है।Gora Bhagat
प्रजापति समाज में पैदा होने के कारण गोरा कुम्हार नाम था गोरा भगत का
गोरा भगत (भक्त) का जन्म प्रजापति समाज में हुआ था। भारत में प्रजापति समाज को कुम्हार समाज के नाम से भी जाना जाता है। कुम्हार समाज में पैदा होने के कारण गोरा भगत को गोरा कुम्हार के नाम से भी जाना जाता है। कुम्हार समाज के दूसरे नागरिकों की तरह से ही गोरा कुम्हार भी मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने परिवार का पालन- पोषण करते थे। मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने परिवार को पालने के साथ ही साथ गोरा भगत रात-दिन श्रीकृष्ण भगवान के द्वारकाधीश स्वरूप की पूजा करना ही गोरा भगत का मुख्य कार्य था। गोरा भगत की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवन ने एक बार नहीं बल्कि अनेक बार गोरा भगत को दर्शन दिए थे। Gora Bhagat
गोरा भगत ने जलते हुए आंवे में से जीवित बचाया बिल्ली के बच्चों को
आपको बता दें कि कुम्हार जलते हुए जिस भट्टे में मिट्टी के बर्तन पकाता है उस भट्टे को आंवा कहा जाता है। एक बार गलती से गोरा कुम्हार के आंवे में बिल्ली के दो बच्चे दब गए थे जब गोरा कुम्हार को पता चला कि आंवे में बिल्ली के बच्चे दबे हुए हैं तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पूरी श्रद्धा के साथ पुकारा। गोरा कुम्हार की पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने तुरंत बिल्ली के बच्चों को आंवे की भीषण आग में से जीवित रूप में बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं गोरा कुम्हार की भक्ति से खुश होकर भगवान ने गोरा कुम्हार के मृत बेटे को भी पुन: जीवित करके गोरा कुम्हार की गोदी में डाल दिया था।
गोरा कुम्हार को गुरू बना लिया था प्रसिद्ध संत नामदेव ने
गोरा कुम्हार के जीवन का एक प्रसंग यह भी है कि एक बार संत गोरा कुम्हार ने अपनी कुम्हार की छड़ी से अपने मेहमानों के सिर थपथपाए। वे कोई साधारण मेहमान नहीं थे। निवृत्ति, ज्ञानदेव, सोपान, नामदेव, मुक्ताबाई और अन्य भक्त शांत मुस्कान के साथ बैठे थे और उनके सिर पर कोमल थपथपाहट को स्वीकार कर रहे थे। वे भगवान के महान भक्त थे और अपने जीवनकाल में ही संतों के रूप में पूजनीय थे। ज्ञानदेव के अनुरोध पर, गोरा कुम्हार उनकी परीक्षा ले रहे थे (सिर थपथपा रहे थे) यह देखने के लिए कि उनमें से किसका ज्ञान ठोस या पूर्ण है।
लेकिन नामदेव इस बात से बहुत आहत थे कि उनकी आध्यात्मिक उपलब्धि की परीक्षा ली जाए। तब गोरा ने विनम्रतापूर्वक नामदेव को अधूरा और अंतिम सत्य में स्थापित न होने वाला घोषित कर दिया। नामदेव पंढरपुर के भगवान विट्ठल के परम भक्त थे। वे जब चाहें भगवान से बात कर सकते थे। उनका संसार विठोबा से शुरू और खत्म होता था। वे ईश्वर के किसी अन्य रूप को नहीं पहचानते थे। लेकिन यह कट्टर भक्ति ईश्वर के उच्चतर और गहन अनुभव की ओर उनकी प्रगति में बाधा बन रही थी।अत्यंत अपमानित होकर, नामदेव भगवान विठोबा के पास पहुँचे, जिन्होंने उनकी गलती बताई और उन्हें आगे की अनुभूति के लिए एक गुरु के पास भेज दिया। नामदेव ने गोरा कुम्हार को ही अपना गुरू बना लिया। Gora Bhagat
यह फिल्म देखकर जान सकते हैं गोरा कुम्हार का पूरा जीवन
यहां हम आपको गोरा कुम्हार के पूरे जीवन को जानने का आसान तरीका बता रहे हैं। गोरा कुम्हार से गोरा भगत बने इस बड़े भक्त के ऊपर एक फिल्म बनी है। यह फिल्म Raj Old Film Center नामक यूट्यूब चैनल पर मौजूद है। नीचे गोरा भगत के ऊपर बनी फिल्म का यूट्यूब लिंक दिया गया है। आप इस फिल्म को देखकर गोरा भगत को पूरी तरह से जान सकते हैं। लिंक https://www.youtube.com/watch?v=jWut80Lkx4gGora Bhagat