Gorakhpur News : एकला बांध पर महीनों से सुलग रहा कचरा, बीमार कर रहा जहरीला धुआं
Garbage burning on Ekla Dam for months, poisonous smoke making sick
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:32 PM
गोरखपुर। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने कचरा जलाए जाने पर प्रतिबंधित लगा रखा है। लेकिन, गोरखपुर में वर्षों से एकला बंधा पर पड़े लेगेसी वेस्ट के पहाड़ में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे वक्त में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने को बेताब है। इस आग और लगातार उठते धुएं से लोग बेहद परेशान हैं। जलते कचरे से निकल रहा धुआं न केवल तापमान बढ़ा रहा, बल्कि आसपास के लोगों का जीना भी मुश्किल हो गया है। धूल और तमाम तरह की दुर्गग्ध युक्त जहरीली गैसों का यह धुआं घरों में भी लोगों का जीवन दूभरा बना रहा है।
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हर दिन फेंका जाता कूड़ा
दरअसल, एकला बांध पर लिगेसी वेस्ट निस्तारण के लिए फिलहाल दो ट्रामल मशीनें लगाई गई हैं। सहजनवां के सुथनी में कचरा निस्तारण के लिए निर्मित किया गया प्लांट अभी निर्माणाधीन है। ऐसे में निगम की गाड़ियां एकला बांध पर ही हर दिन 350 टन कचरा डाल रही हैं।
कचरों में लगी आग
लिगेसी वेस्ट करने वाली कंपनी के लिए अपनी मशीनें धूल, दुर्गग्ध एवं धुएं के बीच लगातार संचालित करना मुश्किल हो चला है। उनकी भी मांग है कि कचरे के पहाड़ में लगी आग को तत्काल बुझाना चाहिए।
इन रिहायसी इलाकों में सबसे अधिक दिक्कत
पर्यावरण कार्यकर्ता मनीष चौबे और मल्लिका मिश्रा कहती हैं, तत्काल नगर आयुक्त को हस्तक्षेप को जलते कचरे की आग को बुझवाना चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में आग न लगे। एकला बांध के आसपास रहने वाले पेवनपुर, जीतपुरा, भिलोरा, पिपरी, बाघागाडा, जवाहरचक, नौसढ़ की घनी आबादी साल दर साल इस जहरिले धुंए का सेवन कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से यहां पर लगातार कचरा जलाया जा रहा है। गर्मी में तो जहरिला धुआं दूर दूर तक उड़कर पहुंचता है। घरों में घुसकर पंखे के साथ घंटों घूमता रहता है। घर में काले धुएं के अलावा गंदगी की पूरी परत जम जाती है।
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छींक और खांसी आम समस्या
आसपास रहने वाले लोग जहरीली हवा और प्रदूषण के कारण बीमार हो रहे हैं। उन्हें छींक आने और खांसी आने की आम समस्या है। यहां जलने वाले कचरे में प्लास्टिक, थर्मोकोल, ई-कचरा, पॉलिथीन, इलेक्ट्रिक बैटरी, घरों में इस्तेमाल किए गए कीटनाशक के डिब्बे, पेंट और आयल के डिब्बे, टायर, ट्यूब आदि शामिल हैं।
लोगों की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर
डॉ. किरन तिवारी कहती हैं कि कचरे से निकलने वाला धुआं सिर्फ फेफड़ा ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि कैंसर का जोखिम भी कई गुना बढ़ाता है। शहरी कचरे में केमिकल और रेडियोएक्टिव कंपाउंड मौजूद रहता है। यह केमिकल्स कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं। यह वायुमंडल और ओजोन परत के लिए भी नुकसानदायक हैं। इस धुएं से निकलने वाली जहरीली गैस से अस्थमा होने का खतरा बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, अस्थमा मरीजों के लिए तो यह घातक साबित हो सकता है। ज्यादा दिनों तक जहरीले धुएं के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।
बुझाई जाएगी कूड़े में लगी आग
गोरखपुर के नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल का कहना है कि एकला बांध पर फेंके जा रहे कचरे में लगी आग को बुझवाया जाएगा। वहां लिगेसी प्लांट का संचालन शुरू है। उम्मीद है कि एक से दो साल में कचरे के पहाड़ से छुटकारा मिल जाएगा। तब तक सहजनवां के सुथनी में बन रहा प्लांट भी शुरू हो जाएगा।
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