Gorakhpur News : राष्ट्रवादी विचारधारा से ओतप्रोत एक मिशन है गीताप्रेस, समाज सुधार में भी छोड़ी अमिट छाप
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भारत
चेतना मंच
20 Jun 2023 10:31 PM
गोरखपुर। केंद्र सरकार की ओर से 2021 का गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर की प्रसिद्ध गीता प्रेस को देने की घोषणा की गई है। इसकी घोषणा होते ही कांग्रेस आदि दल गीता प्रेस को निशाने पर लेते हुए शाब्दिक बाण चलाना शुरू कर दिए हैं।
बता दें कि गीता प्रेस की स्थापना जयदयाल गोयंदका (Jay Dayal Goyndka) ने 1923 में की थी। जयदयाल गोयंदका का जन्म साल 1885 में राजस्थान के चूरू में हुआ था। वे बचपन से ही गीता और रामचरितमानस से बेहद प्रभावित थे। बाद में वे अपने परिवार के साथ बिजनेस के लिए बांकुड़ा (पश्चिम बंगाल) चले गए। इन्होंने ही कोलकाता में 'गोविंद भवन' और गोरखपुर में गीता प्रेस की स्थापना की। 17 अप्रैल, 1965 को ऋषिकेश में गंगा किनारे जयदयाल गोयंदका ने अपना शरीर त्याग दिया था।
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गीता की शुद्ध प्रतियों के लिए गीता प्रेस की स्थापना
जयदयाल गोयंदका बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के थे। वे भगवद्गीता पर प्रवचन करते थे। भगवद्गीता के प्रचार के दौरान उन्हें लगा कि आज के समय में गीता की शुद्ध प्रतियां मिलना बेहद कठिन है। इसके बाद ही उनके मन में गीता को शुद्ध भाषा में प्रकाशित करने का विचार आया। उन्होंने 1923 में गोरखपुर में गीता प्रेस की स्थापना की।
पवित्र काम में गोयंदका के मौसेरे भाई ने दिया साथ
गीता प्रेस की स्थापना के बाद जयदयाल गोयंदका के मौसेरे भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार भी उनसे जुड़ गए और समर्पित भाव से गीता प्रेस के लिए काम करने लगे। वर्तमान में गीता प्रेस का हेड ऑफिस कोलकाता स्थित 'गीता भवन' में है, जो कि एक रजिस्टर्ड सोसायटी है।
गीता की 11 करोड़ से ज्यादा प्रतियों का हुआ है प्रकाशन
गीता प्रेस द्वारा मुख्य रूप से हिंदी और संस्कृत भाषा में साहित्य प्रकाशित किया जाता था। हालांकि, बाद में तमिल, तेलुगु, मराठी, कन्नड़, बांग्ला, गुजराती, असमिया, गुरुमुखी, नेपाली तथा उड़िया समेत 15 भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित होने लगीं। गीता प्रेस से श्रीमद्भगवद्गीता की 11.42 करोड़ प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा श्रीरामचरितमानस की 9.22 करोड़, पुराण-उपनिषद जैसे ग्रंथों की 1.90 करोड़ प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।
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नहीं लेता कोई चंदा
गीता प्रेस सरकार या किसी भी अन्य व्यक्ति या संस्था से किसी भी तरह का कोई अनुदान (Grant) या चंदा नहीं लेता है। गीता प्रेस में हर दिन करीब 50 हजार से ज्यादा पुस्तकें छपती हैं। गीता प्रेस अपनी पुस्तकों में किसी भी जीवित व्यक्ति की फोटो नहीं छापता है और न किसी तरह का कोई विज्ञापन प्रकाशित करता है। गीता प्रेस का संचालन कोलकाता स्थित 'गोविंद भवन' से होता है।
गीता प्रेस का समाज कल्याण में अद्भुत योगदान
गीता प्रेस दरअसल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की विचारधारा से ओतप्रोत एक मिशन है। बिना किसी मुनाफे की आकांक्षा के साहित्य के माध्यम से संस्कृति और सभ्यता के प्रचार प्रसार का मिशन। प्राणी मात्र का उत्तम चरित्र निर्माण और समाज के हर वर्ग में सुधार के लिए सौ वर्षों से निःस्वार्थ भाव से सेवा में जुटी गीता प्रेस को 2021 का ‘गांधी शांति पुरस्कार’ मिलना हर भारतीय के लिए प्रसन्नता और गौरव का विषय है। सहज सरल और त्रुटिहीन शब्दों के जरिये बेहद कम मूल्य में प्रकाशित पुस्तकें धर्म, शांति एवं समाज कल्याण के क्षेत्र में अद्भुत योगदान दे रहीं हैं।
राजेन्द्र प्रसाद ने किया था प्रवेश द्वार का उद्घाटन
गीता प्रेस का प्रवेश द्वार प्रतीकात्मक गीता द्वार का स्वरूप है, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने 29 अप्रैल 1955 को किया था। गीता द्वार के निर्माण में देश की प्राचीन कला और प्राचीन स्थापत्य शैली नजर आती है।
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