Gorakhpur News : हॉकी का नेशनल प्लेयर बना रहा पंक्चर, कभी करता था दनादन गोल
भारत
चेतना मंच
22 Jun 2023 02:29 PM
गोरखपुर। जब हाथों में कला और दिल में जुनून हो तो हर काम किया जा सकता है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश करते हैं गोरखपुर के रहने वाले खुर्शीद अहमद। मात्र 13 साल की उम्र में हाथों में हॉकी थाम लिया। कला इतनी कि बॉल को घुमाते कब गोल तक पहुंचा देते, पता ही नहीं चलता। लेकिन, आज स्थिति यह है कि खुर्शीद गोरखपुर के असुरन रोड पर बैठकर साइकिल और गाड़ी के पंक्चर बनाते हैं। इसी से वह अपने परिवार का गुजारा करते हैं।
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कैसे शुरू हुई खुर्शीद की जर्नी
गोरखनाथ के रहने वाले खुर्शीद अहमद अपने मां-बाप के छोटे लड़के हैं। 6 भाई 5 बहनों में खुर्शीद सबसे छोटे हैं। जब घर का लाड प्यार मिला तो खुर्शीद ने 13 साल की उम्र में हाथों में हॉकी थाम लिया। पिताजी के पंक्चर की दुकान थी। उसी से घर चलता था। हॉकी खेलने जाते वक्त खुर्शीद कुछ देर पिता की दुकान पर बैठकर दो चार रुपये कमा लेते। उसी से अपने हॉकी के सपनों को पूरा करने की कोशिश करते। लेकिन, कुछ समय बाद घर की परिस्थिति बिगड़ने लगी। भाई पैरालाइज हो गया। उसके बाद खुर्शीद पिता के साथ दुकान पर कुछ ज्यादा समय देने लगे।
नेशनल जूनियर तक का तय किया है सफर,
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साल 2008 मे खुर्शीद अपने हॉकी के करियर से दूर जाने लगे। हालांकि वो नेशनल जूनियर हॉस्टल और कई बड़े टूर्नामेंट खेल चुके हैं। कई जगह ट्रायल दिया और नौकरी का आश्वासन मिला, लेकिन वह हकीकत में तब्दील ना हो सका। आज खुर्शीद के पिता की मृत्यु के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां इनके ऊपर आ गई है, जिससे खुर्शीद अपने उस दुकान पर बैठकर घर की जिम्मेदारियां उठा रहे हैं।
जूनियरों को देते ट्रेनिंग
आज भी खुर्शीद के अन्दर हाकी का कीड़ा जिन्दा है। मौका मिलते ही ग्राउंड पर पहुंच जाते हैं। अपने जूनिर को हाकी की ट्रेनिंग देने लगते हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय की ट्रेनिंग भी खुर्शीद की जिम्मेदारी है। वह रेफरी भी हैं। उससे भी कुछ पैसे मिल जाते हैं। इससे परिवार चलाने में आसानी होती है। खुर्शीद को निदेशालय की अंपायरिंग में 400 और खाने पीने कि व्यवस्था मिल जाती है। प्राइवेट मैच में कभी 700 तो कभी 1000 तक भी मिल जाते हैं। बस ऐसे ही अब खुर्शीद के दिन बीत रहे हैं।
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