भारत में तेल तथा गैस का कोई संकट नहीं है। भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के कारण भारत में तेल तथा गैस का संकट कभी भी नहीं होगा। भारत में तेल तथा गैस का संकट पैदा होने की तमाम खबरें केवल अफवाहें हैं।

India oil and gas crisis : भारत में तेल तथा गैस का कोई संकट नहीं है। भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के कारण भारत में तेल तथा गैस का संकट कभी भी नहीं होगा। भारत में तेल तथा गैस का संकट पैदा होने की तमाम खबरें केवल अफवाहें हैं। भारत सरकार ने घोषणा की है कि तेल तथा गैस के संकट को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। भारत ने अपनी जरूरत का भरपूर तेल खास प्रकार की गुफाओं में सुरक्षित रखा हुआ है।
आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि भारत में बनाई गई खास प्रकार की गुफाओं में भारत की जरूरत भर का तेल सुरक्षित है। ऊपर से भारत के सबसे पुराने मित्र देश रूस ने वायदा किया है कि भारत में तेल तथा गैस की कमी पैदा नहीं होने दी जाएगी। भारत सरकार ने दूरदर्शी रणनीति के तहत ‘सीक्रेट ऑयल केव्स’ बना रखी है। आपको बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भूमिगत तेल भंडारण गुफाएं (Underground Oil Storage Caverns) बनाईं और तेल आयात के स्रोतों को व्यापक रूप से विविध बनाया गया। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे अहम आधार उसकी भूमिगत रणनीतिक तेल भंडारण गुफाएं हैं. ये तीन प्रमुख स्थानों पर बनाई गई हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में. इन गुफाओं को भारतीय सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड ने विकसित किया है। इनकी कुल भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (करीब 4 करोड़ बैरल) है, जो भारत की लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है। इन भूमिगत भंडारों की खासियत यह है कि ये ड्रोन या मिसाइल हमलों से सुरक्षित रहते हैं, प्राकृतिक आपदाओं से कम प्रभावित होते हैं, आग या तेल रिसाव का खतरा कम होता है. सरकार ने अभी तक इन रणनीतिक भंडारों का इस्तेमाल नहीं किया है. जरूरत पड़ने पर ये आपूर्ति संकट के दौरान एक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
ईरान युद्ध के बाद भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों को और अधिक विविध बनाया है। सरकार के मुताबिक अब भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिनमें यूरोप, लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका शामिल हैं. अब भारत के करीब 70% तेल आयात ऐसे समुद्री मार्गों से आ रहे हैं जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं, जबकि पहले यह हिस्सा करीब 50-55% था। भारत की ऊर्जा रणनीति में रूस से आयात होने वाला तेल भी अहम भूमिका निभा रहा है. पिछले साल इस मुद्दे पर अमेरिका ने भारत की आलोचना की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ भी लगाया था. लेकिन मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट संकट के चलते अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी. इसके बाद भारत ने तेजी से रूसी तेल खरीद बढ़ा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है, जो दक्षिण एशिया के आसपास टैंकरों में मौजूद था। ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने अफ्रीकी देशों से भी खरीद बढ़ाई है. अंगोला से मार्च के पहले 10 दिनों में करीब 34 लाख बैरल तेल आयात किया गया. वहीं कांगो गणराज्य से करीब 19 लाख बैरल तेल खरीदा गया. विशेषज्ञों के मुताबिक कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 10 करोड़ बैरल तेल तक की संभावित उपलब्धता है।
ईरान के साथ चल रहे अमेरिका के युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हुए हैं। इस दौरान भारत सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर घरेलू LPG उत्पादन 25% तक बढ़ा दिया है। दरअसल, एलपीजी के लिए भी भारत ने भूमिगत भंडारण सुविधा विकसित की है. मंगलुरु में 500 मीटर गहराई पर बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी भंडार, जिसकी क्षमता 80,000 टन है. विशाखापट्टनम में दूसरा भंडार, जिसकी क्षमता 60,000 टन है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे और भंडार बनाए जा सकते हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत के पास तेल तथा गैस की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने तेल तथा गैस की कमी के लिए फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि तेल तथा गैस की कालाबाजारी करने वालों के साथ सख्ती के साथ निपटा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी एशिया में मौजूद संकट से दुनिया का कोई भी देश अछूता नहीं है। भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के प्रयास प्राथमिकता के आधार पर कर रही है। India oil and gas crisis