महान राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 03:13 AM
अंजना भागी, डॉ शोभा भारद्वाज
मैंने गुजरात के केवड़िया में सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊंची 182 मीटर प्रतिमा को देखा, मैं भावुक हो गयी दिल्ली लौटने पर मेरा डॉ शोभा भारद्वाज से सरदार पटेल पर लम्बा वार्तालाप हुआ। स्वर्गीय सरदार पटेल का जन्म दिन - 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था। भारत के उप प्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री सरदार साहब का नाम भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अमर है । उनके जन्म दिन 31 अक्टूबर 2018 को उनका स्मारक उनकी याद में ‘स्टेचू आफ यूनिटी’ राष्ट्र को समर्पित किया गया।
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। अधिकांश प्रांतीय कांग्रेस समितियों के सरदार, पटेल के पक्ष में होने के बाद भी गांधी जी की इच्छा का सम्मान करते हुए जवाहर लाल नेहरू जी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया, तथा सरदार पटेल को उप प्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री बनाया गया। पटेल की पहली प्राथमिकता देसी रियासतों (राज्यों) को भारत में मिलाना था उन्होंने इस कठिन कार्य को बिना रक्तपात के कर दिखाया। सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष माना जाता है | जर्मनी के प्रधानमंत्री बिस्मार्क का जर्मनी के एकीकरण में योगदान था लेकिन विश्व के इतिहास में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसने इतनी बड़ी संख्या में रियासतों को मिला कर मजबूत राष्ट्र के गठन का साहस किया हो।
3 जून 1947 के प्लान के अनुसार हिंदुस्तान और पाकिस्तान (पूर्वी पाकिस्तान जो आज बंगला देश के नाम से सम्प्रभु राष्ट्र है ) दो राष्ट्रों का निर्माण होगा और आजादी के दिन से ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन रियासते भी आजाद हो जाएँगी वह स्वेच्छा से हिन्दुस्तान या पाकिस्तान में विलय कर सकती हैं | इन 562 रियासतों का क्षेत्रफल लगभग 40% था परन्तु सरदार पटेल ने रजवाड़ों को समझाया कि कुएं के मेढक न बन कर भारत रूपी महासागर में विलय कर लो सरदार पटेल के आग्रह पर जूनागढ़ , हैदराबाद और जम्मू कश्मीर को छोड़ कर सभी रियासतों के रजवाड़ों ने भारत में विलय करना स्वीकार कर लिया था |
जूनागढ़ सौराष्ट्र के पास एक छोटी रियासत चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वहाँ के नवाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में विलय की घोषणा कर दी जबकि वहाँ की सर्वाधिक जनता हिंदू थी और भारत में विलय चाहती थी | भारतीय सेना जूनागढ़ में प्रवेश कर गयी , नवाब भागकर पाकिस्तान चले गये 9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ का भी भारत में विलय हो गया जनमत संग्रह में जनता ने भी विलय का समर्थन किया था।
हैदराबाद- जो कि भारत भूमि से घिरी सबसे बड़ी रियासत थी | 5 फुट तीन इंच कद , हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली सद्दीकी ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वतंत्र राज्य का दावा किया। वह अकूत सम्पदा का मालिक था गोलकुंडा की सोने की खान जिससे बेशकीमती हीरा कोहनूर निकला था । दुनिया के इस पाँचवे बड़े हीरे को निजाम पेपरवेट की तरह इस्तेमाल करता था, निजाम के पास क्या नहीं था सोना, चांदी, हीरे, मोती अपनी निजी सेना, रेल, डाक और तार विभाग तक निजी था। निजाम शराब पीने पिलाने का शौकीन था । वहाँ एक ख़ास शराब बनाई जाती थी। उसने सदैव अंग्रेजों से वफादारी निभाई ब्रिटिश महारानी एलिजबेथ को उनके विवाह के अवसर पर निजाम ने एक ताज, हीरों का हार उपहार में दिया था निजाम ने समस्त दौलत किसानों एवं गोलकुंडा की खान से इकठ्ठी की थी।
निजाम ने भारत संघ के साथ विलय करना स्वीकार नहीं किया था। निजाम ब्रिटिश कामनवेल्थ के साथ जुड़ कर स्वतंत्र हकूमत करना चाहता था। वह अपनी सेना बढ़ाने एवं ढेरो हथियार आयात कर रहा था। पटेल को जब इसकी सूचना मिली कि बस्तर की रियासत में कच्चे सोने की खानें हैं जिसे निजाम पट्टे पर खरीद कर अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता है। सरदार पटेल हैदराबाद को भारत देश के पेट में कैंसर के रोग की तरह मानते थे , उन्होंने निजाम से सीधे भारत में विलय का आग्रह किया लेकिन निजाम ने पटेल के आग्रह को खारिज करते हुए 15 अगस्त 1947 को हैदराबाद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। वह हैदराबाद की समस्या का अंतर्राष्ट्रीयकरण भी कर रहे थे। पटेल के निर्णय से भारतीय सेना 13 सितंबर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गयी। तीन दिनों के बाद ही निजाम ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर नवंबर 1948 को भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
पंडित नेहरू के विरोध के बाद भी 13 नवम्बर को सरदार पटेल ने सोमनाथ के भग्न मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया भव्य सोमनाथ के मन्दिर का निर्माण भी हुआ ।
1950 में सरदार पटेल ने पंडित नेहरू को एक पत्र भेजकर नेहरू को चीन तथा उसकी तिब्बत के प्रति नीति से सावधान भी किया था। चीन का रवैया कपटपूर्ण, विश्वासघाती एवं भविष्य में भारत का चीन दुश्मन सिद्ध होगा भी बताया था। तिब्बत पर चीन का कब्जा नई समस्याओं को जन्म देगा बता कर सावधान भी किया। लेकिन पंडित नेहरू के अपने स्वप्न थे जिसका परिणाम 1962 में चीन द्वारा थोपे गये युद्ध द्वारा भुगता गया
। 1950 में ही गोवा की स्वतंत्रता के संबंध में चली दो घंटे की कैबिनेट की बैठक में पटेल ने लम्बी वार्ता सुनी और नेहरू जी से पूछा भी था? "क्या हम गोवा जाएंगे, केवल दो घंटे की ही तो बात है।" नेहरू जी को उनका कथन नागवार गुजरा था। सरदार पटेल की इच्छा अधूरी रह गयी लेकिन 1961 में गोवा नेहरू के कार्यकाल में ही आजाद हुआ।
कश्मीर – सरदार पटेल कश्मीर समस्या को स्वयं सुलझाना चाहते थे लेकिन कश्मीर के मामले में नेहरू जी संवेदनशील थे समस्या को सुलझाने के बजाय उन्होने और उलझा दिया ,कश्मीर नेहरू जी की एक कूटनीतिक भूल का परिणाम था एक ऐसी कूटनीतिक भूल जिसे आज तक देश भुगत रहा है । कश्मीर की धरती खून से रंगी जा रही है ।
वह किसानों के सच्चे हितेषी थे |
15 दिसम्बर 1950 को दिल का दौरा पड़ने से सरदार पटेल ने संसार को अलविदा कह दिया उनकी मृत्यू देश के लिए बहुत बड़ी क्षति थी आजादी के वर्षों बीत जाने के बाद उन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित किया गया |