
Greater Noida Big News (चेतना मंच)। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में सिंथेटिक ड्रग्स की दो फैक्ट्रियों के खुलासे तथा इनमें नाइजीरियन नागरिकों की संलिप्तता के बाद लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। नाइजीरियन जहां तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर खेल कर रहे हैं वहीं इनके सामने एलआईयू पूरी तरह फेल नजर आ रही है। आश्चर्यजनक बात यह है कि एलआईयू के पास यह भी सटीक जानकारी नहीं है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में कितने लोग बगैर वीजा के निवास कर रहे हैं।
बता दें कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा जोन पुलिस ने पिछले 20 दिनों के दौरान ग्रेटर नोएडा में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की दो बड़ी फैक्ट्रियों का खुलासा कर करीब 500 करोड़ रुपए का सिंथेटिक ड्रग्स बरामद कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे में सबसे बड़ी अचरज की बात यह है कि पकड़े गए सभी आरोपी अफ्रीकी मूल के नाइजीरिया के रहने वाले हैं। यह आरोपी ग्रेटर नोएडा में किराए का मकान लेकर उसमें ड्रग्स का काला कारोबार धड़ल्ले से कर रहे थे। पिछले काफी समय से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चल रही ड्रग्स की फैक्ट्रियों पर स्थानीय पुलिस के अलावा एलआईयू की भी नजर नहीं पड़ी।
आपको बता दें कि क्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों के बारे में तमाम जानकारी तथा उनकी गतिविधियों पर निगाह रखने का जिम्मा एलआईयू पर होता है। आलम यह है कि एलआईयू के पास क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के बारे में कोई सटीक जानकारी तक नहीं है। गुरुवार देर रात स्थानीय पुलिस द्वारा विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए अभियान ने भी इस बात को पूरी तरह पुष्ट कर दिया। अभियान के दौरान पुलिस ने ग्रेटर नोएडा से नाइजीरिया मूल की 3 महिला सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया। इन नाइजीरियन नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस और एलआईयू के पास क्या यह सूचना नहीं थी कि विदेशी नागरिक बिना वैध वीजा के यहां निवास कर रहे हैं ?
ऐसा नहीं है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में विदेशी नागरिकों के पकड़े जाने का यह कोई पहला मामला हो। पूर्व में भी ग्रेटर नोएडा से बड़ी संख्या में बगैर वीजा के निवास कर रहे चाइनीज नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ उस समय पुलिस व एलआईयू द्वारा एक व्यापक अभियान छेड़ा गया था। उस दौरान भी पकड़े गए कुछ विदेशी नागरिकों की ड्रग्स के मामले में संलिप्तता पाई गई थी जिनमें उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। वहीं दबे स्वर में पुलिस के कुछ जिम्मेदार अधिकारी भी इस लापरवाही के लिए जिले की एलआईयू को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
एलआईयू एक अंग्रेजी का शब्द है LIU की फुलफॉर्म Local Intelligence Unit होती है। जिसका अर्थ हिंदी में स्थानीय अभिसूचना इकाई होता है। यूपी पुलिस में खुफिया विभाग 1958 में शुरु किया गया था, लेकिन तब इसे सुरक्षा शाखा कहा जाता था और इसे खुफिया मुख्यालय का अनुभाग भी कहा जाता था। स्थापना के बाद यह शाखा सिर्फ वीआईपी, वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा और संरक्षा का काम करती थी। लेकिन बाद में इसका काम बढ़ता गया और यह खुफिया विभाग बन गया।
दरअसल, 1958 में सीआईडी से अलग होने के बाद इसे खुफिया विभाग के तौर पर मान्यता दी गई। स्पेशल ब्रांच और स्थानीय खुफिया इकाई (Local Intelligence Unit) की कार्यकुशलता और व्यावसायिकता को बढ़ाने के लिए इसका आधुनिकीकरण भी होता रहा। पुनर्गठन योजना में एलआईयू (LIU) की कार्यप्रणाली का सीमांकन किया गया। ILU के लिए अलग प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई। 1982 में इस विभाग के लिए एक नए भवन का निर्माण किया गया।
जैसा कि इस विभाग के नाम से ही साफ है कि यह पुलिस की एक खुफिया इकाई होती है। जो जिले या अपनी कार्य सीमा क्षेत्र में खुफिया निगरानी, लॉ एंड ऑर्डर (Law and Order) को प्रभावित करने वाली सूचनाएं जुटाना, सांप्रदायिक व राजनीतिक घटनाक्रम, आतंकवाद से जुड़े इनपुट जुटाना, अप्रवास और पाकिस्तान समेत विदेशी अवागमन की निगरानी और जासूसी करने जैसे काम करती है। साथ ही शस्त्र आवेदन, पासपोर्ट आवेदन और पुलिस, सेना, रक्षा क्षेत्र व सरकारी महकमों आदि में नौकरी पाने वाले लोगों का वेरिफिकेशन भी एलआईयू (LIU) करती है।
हर जिले में एसपी (SP) या डीएसपी (DSP) स्तर का अधिकारी इस खुफिया यूनिट का इंचार्ज होता है, जो जिले के एसएसपी (SSP) या एसपी (SP) को रिपोर्ट करता है। समय समय पर इस यूनिट को पुलिस मुख्यालय से दिशा निर्देश मिलते रहते हैं। Greater Noida Big News