Greater Noida News : कमिश्नरेट पुलिस का कारनामा, अपराधी को बचाने के लिए कोर्ट को भी दी गलत जानकारी, शिकायत पर कोर्ट ने आईओ को किया तलब
Notorious history sheeter Shahid Mewati
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:51 AM
पुलिस पर लगा मुल्जिमान की मदद कर उन्हें जमानत में सहयोग देने का आरोप
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath government of Uttar Pradesh) जहां एक तरफ अपराधियों, हिस्ट्रीशीटर बदमाशों पर नकेल लगाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। वहीं गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस (Gautam Budh Nagar Commissionerate Police) अपराधियों के साथ साज कर उन्हें लाभ पहुंचाने में मशगूल है। मामला दादरी थाने का है। जहां पुलिस अपराधियों को जमानत में सहयोग देने के लिए कोर्ट को भी गुमराह करने से नहीं चूकी। यही वजह है कि आरोपियों के अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर कोर्ट द्वारा थाने से आरोपियों का आपराधिक इतिहास मांगा गया तो विवेचक ने उसे छिपाते हुए गलत जानकारी कोर्ट को उपलब्ध करा दी। इस पर वादी पक्ष के अधिवक्ता की शिकायत के बाद कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए विवेचक को तलब किया है।
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क्या है मामला:
बता दें कि दादरी के नई आबादी निवासी यामीन के बेटे आजाद और अरबाज बीते 27 सितंबर की सुबह अपने काम पर जा रहे थे। इसी दौरान कुख्यात हिस्ट्रीशीटर शाहिद मेवाती के सभासद भाई नईम मेवाती और उसके तीन साथी मुजीम खान, राहुल और वसीम उर्फ बोना ने जानलेवा हमला कर दिया था। जिसमें अरबाज के सिर में खासी चोटें आईं थीं। जिसकी एक निजी अस्पताल में बमुश्किल जान बच सकी थी। मामले में पुलिस राहुल व वसीम को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। लेकिन, मुख्य आरोपी एवं कुख्यात हिस्ट्रीशीटर शाहिद का भाई नईम मेवाती सभासद और मुजीम खान आज भी खुला घूम रहा है। जबकि पीड़ित परिवार आरोपितों द्वारा लगातार दी जा रही धमकियों के चलते दादरी अपने घर पर ताला लगाकर पलायन तक कर चुका है।
दादरी पुलिस ने कैसे की लापरवाही:
मामले में वादी पक्ष के अधिवक्ता प्रमोद शर्मा ने बताया कि दोनों फरार चल रहे आरोपी नईम मेवाती व मुजीम खान के द्वारा जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। जिस पर विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) गौतमबुद्धनगर ने सुनवाई करते हुए दादरी थाना पुलिस से आरोपियों का आपराधिक इतिहास मांगा था। लेकिन, मामले में दादरी थाना पुलिस और मामले के विवेचना अधिकारी ने आरोपियों से साज कर कोर्ट से भी आरोपियों के आपराधिक इतिहास को छिपा लिया। ताकि आरोपियों को न्यायालय से आसानी से जमानत मिल सके। हालांकि न्यायालय द्वारा घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी मुजीम खान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जा चुका है। लेकिन आरोपियों पर संगीन धाराओं में और भी कई मामले दर्ज होने के बावजूद पुलिस द्वारा कोर्ट को गलत जानकारी देना अपने आप में बड़ा मामला है। ऐसे में अन्य मुकदमों की जानकारी के साथ न्यायालय से मामले में दादरी पुलिस की शिकायत की गई है। जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए 11 नवंबर को मामले के विवेचना अधिकारी को तलब किए जाने के आदेश दिए हैं।