एक बार फिर बढ़ी अनिल अंबानी की मुश्किलें, 12 ठिकानों पर ED का छापा!

Anil Ambani: यह कार्रवाई 40,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। पिछले महीने 3,500 करोड़ रुपये कीमत के बंगले की कुर्की के बाद अब अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

Anil Ambani
अनिल अंबानी
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 01:15 PM
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शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर से जुड़े मुंबई के 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 40,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। पिछले महीने 3,500 करोड़ रुपये कीमत के बंगले की कुर्की के बाद अब अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

जांच की वजह

जांच का केंद्र रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े लोन हैं जो एसबीआई, यस बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं से लिया गया था। आरोप हैं कि इन बैंकों से ली गई धनराशि को नियमों की अनदेखी कर अन्य संस्थाओं और विदेशी खातों में डायवर्ट किया गया। मामला सिर्फ स्वदेशी बैंकों तक सीमित नहीं है इसमें चीनी सरकारी बैंकों से जुड़े 13,558 करोड़ रुपये का भी जोखिम सामने आया है।

ईडी की कार्रवाई का विस्तार

ईडी की टीमें रिलायंस पावर और इसके जुड़े आवासीय व पंजीकृत कार्यालयों पर सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। शुरुआती संकेतों के अनुसार, यह कार्रवाई संदिग्ध लेन-देन और बड़े फंड ट्रांसफर की जांच के लिए की जा रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद एक विशेष जांच दल (SIT) भी गठित किया गया है।

लगातार बढ़ता दबाव

फरवरी 2026 में ED ने अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आलीशान घर ‘अबोड’ को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया था। बंगले की अनुमानित कीमत 3,500 करोड़ रुपये बताई गई थी। अब तक ED ने अंबानी समूह की कुल संपत्तियों में से 15,700 करोड़ रुपये की कुर्की कर दी है।

क्या है अगला कदम?

जांच की गहराई और ED की सख्ती देखते हुए अनिल अंबानी और रिलायंस पावर के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण रहेंगे। अब यह देखने वाली बात होगी कि बड़ी संपत्तियों और फंड ट्रांसफर की पड़ताल किस हद तक होती है और अदालत में इसका क्या परिणाम निकलता है।

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कैसे चुने जाते हैं राज्यसभा सदस्य? यहां समझें पूरा फॉर्मूला

राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होगा। राज्यसभा में सदस्य बनने की न्यूनतम उम्र 30 साल है और केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचक मंडल वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। चुनाव में जीतने के लिए एक खास फॉर्मूला लागू होता है।

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राज्यसभा चुनाव
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 12:13 PM
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भारत की संसद का उच्च सदन राज्यसभा हर दो साल में अपने सदस्यों का एक तिहाई हिस्सा बदलती है। 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार कुल अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं। इनमें से 238 निर्वाचित होते हैं और 12 को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

सदस्य बनने की योग्यताएं

राज्यसभा के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 30 साल है। चुनाव के लिए पात्र उम्मीदवार वही हैं जिनकी सीट का कार्यकाल पूरा हो रहा है। देश के पांच राज्यों में विधान परिषद है लेकिन उनके सदस्य राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। राज्यसभा सदस्य केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने जाते हैं।

वोटिंग का फॉर्मूला

राज्यसभा में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट की गणना एक खास फॉर्मूले के अनुसार की जाती है। इसमें सबसे पहले विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है और राज्य की कुल राज्यसभा सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है। इसके बाद 1 और जोड़कर जो संख्या आती है वह उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट होती है।

मतगणना की प्रक्रिया

यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर सबसे अधिक वोट मिले लेकिन वह फॉर्मूले द्वारा तय न्यूनतम संख्या तक नहीं पहुंचता तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। फिर भी यदि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती तो तीसरी और चौथी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। इस तरह यह सुनिश्चित किया जाता है कि जीतने वाला उम्मीदवार विधिक रूप से आवश्यक समर्थन प्राप्त करे।

मतदान का समय और प्रक्रिया

16 मार्च को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। इस बार जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं, उनमें महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), पश्चिम बंगाल (5), बिहार (5), ओडिशा (4), असम (3), तेलंगाना (2), छत्तीसगढ़ (2), हरियाणा (2) और हिमाचल प्रदेश (1) शामिल हैं।

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जाने, जब नहीं थी मशीनें, तब कैसे होती थी बीमारी की जांच?

वैद्य और हर्बल चिकित्सक मरीज के शरीर के सूक्ष्म संकेतों को पढ़कर रोग की पहचान करते थे। इन तरीकों में नाड़ी (पल्स) देखना, आंख और जीभ की जांच, साथ ही शरीर की बनावट और रंग को देखना प्रमुख था।

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आधुनिक विज्ञान से पहले का चिकित्सा ज्ञान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar06 Mar 2026 12:27 PM
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Ayurvedic knowledge : आज के दौर में अगर हम बीमार पड़ जाते हैं, तो डॉक्टर हमारी जांच के लिए तुरंत एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, एमआरआई और तरह-तरह की आधुनिक मशीनों का सहारा लेते हैं। इन मशीनों के जरिए बीमारी का पता लगाना आज बेहद आसान हो गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लगभग 500 साल पहले, जब न ये मशीनें थीं और न ही आधुनिक दवाइयां, तब लोग बीमारियों का इलाज कैसे करते थे? उस दौर में 'डॉक्टर' नहीं, बल्कि 'वैद्य' होते थे, जो अपने अनुभव और आयुर्वेदिक ज्ञान के आधार पर सटीक जांच करते थे। आइए जानते हैं कि जब तकनीक का सहारा नहीं था, तब हमारे पूर्वज बीमारी का पता लगाने के लिए किन अनूठे तरीकों का इस्तेमाल करते थे।

मशीनों के बिना कैसे होती थी जांच?

जब आधुनिक टेस्ट मौजूद नहीं थे, तब बीमारी का पता लगाना पूरी तरह से मानव शरीर के निरीक्षण और वैद्यों के अनुभव पर निर्भर करता था। वैद्य और हर्बल चिकित्सक मरीज के शरीर के सूक्ष्म संकेतों को पढ़कर रोग की पहचान करते थे। इन तरीकों में नाड़ी (पल्स) देखना, आंख और जीभ की जांच, साथ ही शरीर की बनावट और रंग को देखना प्रमुख था।

वैद्य अपनाते थे ये 3 असरदार तरीके

1. नाड़ी (पल्स) देखकर लगाते थे रोग की पहचान

सबसे लोकप्रिय और असरदार तरीका नाड़ी जांचना था। वैद्य मानते थे कि हर बीमारी का असर सीधे हार्ट की धड़कन पर पड़ता है। वे नाड़ी पकड़कर उसकी गति, ताकत और लय को देखकर यह समझ जाते थे कि शरीर में क्या खराबी है। नाड़ी तेज हो, धीमी हो या असमान चल रही हो, इससे वे रोग का अंदाजा लगा लेते थे। इसके लिए एक विशेष नियम था—पुरुषों की नाड़ी दाएं हाथ से और महिलाओं की बाएं हाथ से जांची जाती थी। सही परिणाम के लिए इसे सुबह खाली पेट दिखाना जरूरी माना जाता था।

2. आंख और जीभ देखकर मिलते थे संकेत

नाड़ी के अलावा, वैद्य मरीज की आंखों और जीभ को भी गौर से देखते थे। आंखों का रंग, उसमें चमक और उसकी स्थिति से शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी या रोग का पता चल जाता था। वहीं, जीभ का रंग, उसकी बनावट और आकार भी शरीर के अंदरूनी रोगों का संकेत देते थे। हालांकि यह तरीका नाड़ी जांच जितना सटीक नहीं माना जाता था, लेकिन वैद्य इसे एक महत्वपूर्ण सहायक जांच के रूप में प्रयोग करते थे।

3. शरीर के बाहरी लक्षण

वैद्य केवल अंदरूनी अंगों तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि वे मरीज के शरीर के बाहरी लक्षणों को भी देखते थे। त्वचा (स्किन) का रंग, बालों की चमक, नाखूनों की स्थिति और हड्डियों की बनावट को देखकर भी वे रोग का अंदाजा लगाते थे। इन सभी संकेतों के आधार पर ही वे जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक चीजों से बनी दवाइयां देकर मरीजों का इलाज करते थे। Ayurvedic knowledge

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