
राजकुमार चौधरी Greater Noida: नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव को लेकर गौतमबुद्धनगर में भी रणनैतिक तापमान हौले-हौले गरमाने लगा है। सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों के जरिए वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अपनी धमक बरकरार रखने का संदेश देना चाहती है। शायद यही वजह है कि भाजपा विरोधी दलों की बची खुची खुरचन को भी अपने भीतर समेटना चाहती है।
तीन तहसील 88 ग्राम पंचायत एक नगर पालिका परिषद और पांच नगर पंचायतों को समेटकर गौतमबुद्धनगर जिला बनाया गया था। 6 सिंतबर 1997 को इस जिले का नामकरण हुआ। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती का गृह जनपद होने की वजह से ये जिला आर्थिक के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली रहा है। पहली बार अस्तित्व में आई गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट को बसपा ने एक झटके में जीत लिया। जेवर और दादरी पर भी नीला झंडा दश्कों तक लहराता रहा था।
2014 में हुए लोकसभा चुनावों में पूरा देश मोदीमय हुआ तो तराई (दोआब) का ये इलाका भी इससे महरूम नहीं रह सका। बसपा को काफी पीछे छोड़कर भाजपा यहां काबिज हुई। यहां पहले वर्ष-2014 में तथा फिर वर्ष-2019 में नोएडा के प्रसिद्घ चिकित्सक व प्रसिद्घ सामाजिक कार्यकर्ता से नेता बने डा. महेश शर्मा गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। वहीं दादरी जेवर, नोएडा, सिकन्द्राबाद, खुर्जा विधानसभा सीट भी भाजपा के खाते में आई। 2022 में भी यह सिलसिला बरकरार है।
अब बात करते है पंचायत व्यवस्था की। गौतमबुद्धनगर में दादरी, जेवर और सदर तीन तहसील हैं। 88 ग्राम पंचायत, दादरी नगर पालिका परिषद तथा बिलासपुर, दनकौर, जेवर, रबूपुरा और जहांगीरपुर यानि पांच नगर पंचायत हैं। 2011 की जनगणना के आधार पर यहां की जनसंख्या 16 लाख 48 हजार के करीब है। लेकिन यह आंकड़ा वास्तविक तौर पर पचास लाख के पार है। इस जिले में कुल तीन नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण है। राजनीतिक दृष्टि से फिलहाल नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव चल पड़े हैं। भाजपा ने अपने प्रभारी तय कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि स्थानीय निकायों के परिसीमन का काम लगभग पूरा हो चुका है। किसी भी दिन इसे लागू किया जा सकता है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने जिस तरह से विधानसभा चुनाव के दौरान अन्य राजनीतिक दलों में सेंध लगाई थी। उसी का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। भाजपा का दामन थामने वालों में केवल सपाई नहीं हैं। हालांकि जो अन्य दलों को छोड़कर आए हैं उनमें से कई कददावर नेता घुटन भी महसूस कर रहे हैं। उनके अपने पुराने दलों में जहां उनकी तूती बोलती थी वहीं अब ये दूसरी पंक्ति के नेताओं की दीर्घा में बैठने के लिए बाध्य हैं।
16 को कांग्रेस करेगी बैठक कंग्रेस के जिलाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने चेतना मंच को बताया कि निकाय चुनावों को लेकर संगठन की अहम बैठक 16 नवंबर को दादरी फाटक पर स्थित उनके कार्यालय में होगी। अभी परिसीमन की घोषणा नहीं हुई है। दादरी से पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर अशोक पंडित, आजाद मलिक और राजपाल ने अपना बायोडाटा भेजा है। बाकी नगर पंचायत चुनाव के लिए भी 15 आवेदन आ चुके हैं। इन पर भी चिंतन, मंथन होगा। उन्होंने दावा किया कि कई अन्य दलों के जमीनी कार्यकर्ता उनके संपर्क में हैं जो आने वाले दिनों में कांग्रेस का झंडा थामेंगे।
दागी नहीं होंगे भाजपा में शामिल भारतीय जनता पार्टी के जनपद प्रभारी विधान परिषद सदस्य सत्यपाल सैनी से चेतना मंच ने बातचीत की। फोन पर उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी भी दागी नेता को शामिल नहीं किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी कैडर बेस पार्टी है। इसमें यदि किसी भी राजनीतिक दल से कोई नेता या कार्यकर्ता नि:स्वार्थ भाव से बिना शर्त के शामिल होना चाहता है तो उनका स्वागत है। लेकिन पार्टी नेतृत्व की स्पष्ट गाइड लाइन है कि जो भी नेता शामिल होगा उसका ब्यौरा सबसे पहले जिले के स्थानीय पदाधिकारी प्रभारी को भेजेंगे। वहां से प्रदेश नेतृत्व इसे सहमति देगा तभी पार्टी में शामिल करने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तक गौतमबुद्धनगर से किसी अन्य दल के नेता के बारे में उनसे कोई एप्रूवल नहीं लिया गया है। वहीं अंतरंग सूत्रों का दावा है कि जल्द ही कुछ बडे चेहरे दूसरे दलों को छोड़कर भाजपा का दामन थामने की कतार में हैं।