
केंद्र सरकार ने जीएसटी सुधारों की नई रूपरेखा—जिसे राजनीतिक हलकों में जीएसटी 2.0 कहा जा रहा है—को तेज़ी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए इसे दिवाली से पहले लागू करने का वादा किया था। इसके तहत जीएसटी की दरों को घटाकर सिर्फ दो स्लैब में लाने का प्रस्ताव है, जिस पर सितंबर की जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला होगा। GST 2.0
अब तक जीएसटी से केंद्र और राज्यों दोनों को रिकॉर्ड कमाई हुई है, लेकिन दरों में कटौती का सीधा असर राजस्व पर पड़ने वाला है। अनुमान है कि टैक्स घटने से हर साल करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा। इसमें केंद्र सरकार को जीडीपी का 0.15% और राज्यों को 0.36% तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। राज्यों की कुल कमाई का लगभग 40% हिस्सा जीएसटी से आता है, ऐसे में यह झटका उनकी वित्तीय स्थिति को कमजोर कर सकता है।
कई राज्य पहले से शिकायत करते रहे हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिला। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का दावा है कि उनके राज्य को हर साल 21,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। दक्षिण भारत के राज्यों की भी शिकायत रही है कि उनकी टैक्स कमाई का बड़ा हिस्सा केंद्र के पास चला जाता है। केरल के पूर्व वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस आइजैक ने तो प्रस्तावित जीएसटी 2.0 को “आर्थिक तबाही” तक करार दिया।
केंद्र सरकार चाहती है कि यह सुधार दिवाली से पहले लागू हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनाव से ठीक पहले उठाया गया यह कदम मोदी सरकार के लिए चुनावी मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। रोजमर्रा की चीज़ों पर टैक्स घटने से उपभोक्ताओं की जेब हल्की होगी और खपत बढ़ेगी। यही वजह है कि शेयर बाज़ार ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और इसमें तेजी दर्ज की गई। केंद्र का तर्क है कि शुरुआती घाटे के बावजूद बढ़ी हुई खपत से राजस्व की भरपाई हो जाएगी। राज्यों के पास शराब और पेट्रोलियम जैसे उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर अतिरिक्त कमाई करने का विकल्प मौजूद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि यह सुधार अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक ताकत देगा।
अब निगाहें सितंबर की जीएसटी काउंसिल बैठक पर हैं, जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करती हैं। अगर सहमति नहीं बनी तो वोटिंग कराई जाएगी और इसमें तीन-चौथाई बहुमत ज़रूरी होगा। चूंकि भाजपा की सरकार 21 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में है, इसलिए माना जा रहा है कि केंद्र के लिए रास्ता अपेक्षाकृत आसान रहेगा। GST 2.0