बंगाल विजय मिशन में जुटी भाजपा, उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल
दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।

Bharatiya Janata Party : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें राज्य की बड़ी संख्या में सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में करीब 140 संभावित उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी पहली सूची जारी कर चुनावी बढ़त लेने की कोशिश करेगी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।
आधी सीटों पर रणनीति तय
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर अपनी सहमति बना चुकी है। ऐसे संकेत हैं कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। भाजपा की रणनीति यह है कि उम्मीदवारों की पहली सूची समय रहते जारी कर राजनीतिक संदेश दिया जाए कि पार्टी इस बार पहले से अधिक संगठित और तैयार है। खबर यह भी है कि पार्टी कुछ पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।
पहली सूची में कई बड़े नाम संभव
जिन नेताओं के नाम शुरुआती सूची में आने की चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस बार एक बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने से पार्टी बच सकती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया था। हालांकि बाद में कई विधायकों के दल बदलने के कारण विधानसभा में उसकी संख्या घटकर 65 रह गई। इसके बावजूद पार्टी अपने मौजूदा विधायकों में से अधिकांश पर फिर भरोसा जता सकती है।
इस बार नहीं दोहराई जाएगी पुरानी भूल
भाजपा ने इस बार उम्मीदवार चयन में 2021 के चुनाव से मिले अनुभवों को गंभीरता से लिया है। पिछले चुनाव में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं और कुछ चर्चित चेहरों, खासकर फिल्मी हस्तियों, को टिकट देकर बड़ा दांव खेला था। लेकिन बाद में इनमें से कई नेता या तो निष्क्रिय हो गए या फिर राजनीतिक रूप से भरोसेमंद नहीं साबित हुए।
इसी पृष्ठभूमि में भाजपा अब ऐसी रणनीति अपनाती दिख रही है, जिसमें दलबदल कर आए नेताओं और केवल लोकप्रियता के आधार पर चुने जाने वाले चेहरों से दूरी बनाई जाए। पार्टी का जोर इस बार अपने पुराने, समर्पित और संगठननिष्ठ कार्यकर्ताओं पर है।
वफादारों को दी प्राथमिकता
पार्टी के भीतर यह समझ बनी है कि टिकट वितरण केवल चुनावी गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन के मनोबल से भी जुड़ा होता है। इसलिए भाजपा ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहती है, जो लंबे समय से पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। इससे एक ओर संगठन का कैडर उत्साहित रहेगा, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देती है। सूत्रों के अनुसार, इस बार टिकट वितरण में केवल जीतने की संभावना ही एकमात्र आधार नहीं होगी। पार्टी संगठन क्षमता, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव, जातीय संतुलन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कई पहलुओं को साथ लेकर चल रही है। मतलब साफ है कि भाजपा इस बार केवल चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनावी संरचना के साथ मैदान में उतरना चाहती है। उम्मीदवार चयन के समानांतर भाजपा ने राज्य में प्रचार अभियान को भी गति दे दी है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में बड़ा वादा करते हुए कहा था कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी। इस तरह पार्टी चुनावी नैरेटिव को संगठन, उम्मीदवार और वादों—तीनों स्तर पर मजबूत करने की कोशिश में है। Bharatiya Janata Party
Bharatiya Janata Party : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें राज्य की बड़ी संख्या में सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में करीब 140 संभावित उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी पहली सूची जारी कर चुनावी बढ़त लेने की कोशिश करेगी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।
आधी सीटों पर रणनीति तय
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर अपनी सहमति बना चुकी है। ऐसे संकेत हैं कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। भाजपा की रणनीति यह है कि उम्मीदवारों की पहली सूची समय रहते जारी कर राजनीतिक संदेश दिया जाए कि पार्टी इस बार पहले से अधिक संगठित और तैयार है। खबर यह भी है कि पार्टी कुछ पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।
पहली सूची में कई बड़े नाम संभव
जिन नेताओं के नाम शुरुआती सूची में आने की चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस बार एक बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने से पार्टी बच सकती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया था। हालांकि बाद में कई विधायकों के दल बदलने के कारण विधानसभा में उसकी संख्या घटकर 65 रह गई। इसके बावजूद पार्टी अपने मौजूदा विधायकों में से अधिकांश पर फिर भरोसा जता सकती है।
इस बार नहीं दोहराई जाएगी पुरानी भूल
भाजपा ने इस बार उम्मीदवार चयन में 2021 के चुनाव से मिले अनुभवों को गंभीरता से लिया है। पिछले चुनाव में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं और कुछ चर्चित चेहरों, खासकर फिल्मी हस्तियों, को टिकट देकर बड़ा दांव खेला था। लेकिन बाद में इनमें से कई नेता या तो निष्क्रिय हो गए या फिर राजनीतिक रूप से भरोसेमंद नहीं साबित हुए।
इसी पृष्ठभूमि में भाजपा अब ऐसी रणनीति अपनाती दिख रही है, जिसमें दलबदल कर आए नेताओं और केवल लोकप्रियता के आधार पर चुने जाने वाले चेहरों से दूरी बनाई जाए। पार्टी का जोर इस बार अपने पुराने, समर्पित और संगठननिष्ठ कार्यकर्ताओं पर है।
वफादारों को दी प्राथमिकता
पार्टी के भीतर यह समझ बनी है कि टिकट वितरण केवल चुनावी गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन के मनोबल से भी जुड़ा होता है। इसलिए भाजपा ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहती है, जो लंबे समय से पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। इससे एक ओर संगठन का कैडर उत्साहित रहेगा, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देती है। सूत्रों के अनुसार, इस बार टिकट वितरण में केवल जीतने की संभावना ही एकमात्र आधार नहीं होगी। पार्टी संगठन क्षमता, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव, जातीय संतुलन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कई पहलुओं को साथ लेकर चल रही है। मतलब साफ है कि भाजपा इस बार केवल चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनावी संरचना के साथ मैदान में उतरना चाहती है। उम्मीदवार चयन के समानांतर भाजपा ने राज्य में प्रचार अभियान को भी गति दे दी है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में बड़ा वादा करते हुए कहा था कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी। इस तरह पार्टी चुनावी नैरेटिव को संगठन, उम्मीदवार और वादों—तीनों स्तर पर मजबूत करने की कोशिश में है। Bharatiya Janata Party












