बंगाल विजय मिशन में जुटी भाजपा, उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल

दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।

बंगाल फतह मिशन पर भाजपा
बंगाल फतह मिशन पर भाजपा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 01:08 PM
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Bharatiya Janata Party : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें राज्य की बड़ी संख्या में सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में करीब 140 संभावित उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी पहली सूची जारी कर चुनावी बढ़त लेने की कोशिश करेगी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।

आधी सीटों पर रणनीति तय

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर अपनी सहमति बना चुकी है। ऐसे संकेत हैं कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। भाजपा की रणनीति यह है कि उम्मीदवारों की पहली सूची समय रहते जारी कर राजनीतिक संदेश दिया जाए कि पार्टी इस बार पहले से अधिक संगठित और तैयार है। खबर यह भी है कि पार्टी कुछ पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।

पहली सूची में कई बड़े नाम संभव

जिन नेताओं के नाम शुरुआती सूची में आने की चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस बार एक बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने से पार्टी बच सकती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया था। हालांकि बाद में कई विधायकों के दल बदलने के कारण विधानसभा में उसकी संख्या घटकर 65 रह गई। इसके बावजूद पार्टी अपने मौजूदा विधायकों में से अधिकांश पर फिर भरोसा जता सकती है।

इस बार नहीं दोहराई जाएगी पुरानी भूल

भाजपा ने इस बार उम्मीदवार चयन में 2021 के चुनाव से मिले अनुभवों को गंभीरता से लिया है। पिछले चुनाव में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं और कुछ चर्चित चेहरों, खासकर फिल्मी हस्तियों, को टिकट देकर बड़ा दांव खेला था। लेकिन बाद में इनमें से कई नेता या तो निष्क्रिय हो गए या फिर राजनीतिक रूप से भरोसेमंद नहीं साबित हुए।

इसी पृष्ठभूमि में भाजपा अब ऐसी रणनीति अपनाती दिख रही है, जिसमें दलबदल कर आए नेताओं और केवल लोकप्रियता के आधार पर चुने जाने वाले चेहरों से दूरी बनाई जाए। पार्टी का जोर इस बार अपने पुराने, समर्पित और संगठननिष्ठ कार्यकर्ताओं पर है।

वफादारों को दी प्राथमिकता

पार्टी के भीतर यह समझ बनी है कि टिकट वितरण केवल चुनावी गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन के मनोबल से भी जुड़ा होता है। इसलिए भाजपा ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहती है, जो लंबे समय से पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। इससे एक ओर संगठन का कैडर उत्साहित रहेगा, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देती है। सूत्रों के अनुसार, इस बार टिकट वितरण में केवल जीतने की संभावना ही एकमात्र आधार नहीं होगी। पार्टी संगठन क्षमता, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव, जातीय संतुलन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कई पहलुओं को साथ लेकर चल रही है। मतलब साफ है कि भाजपा इस बार केवल चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनावी संरचना के साथ मैदान में उतरना चाहती है। उम्मीदवार चयन के समानांतर भाजपा ने राज्य में प्रचार अभियान को भी गति दे दी है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में बड़ा वादा करते हुए कहा था कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी। इस तरह पार्टी चुनावी नैरेटिव को संगठन, उम्मीदवार और वादों—तीनों स्तर पर मजबूत करने की कोशिश में है। Bharatiya Janata Party

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मोनालिसा के अंतरधार्मिक विवाह को लेकर उसके फिल्म निर्देशक ने इसे लव जिहाद बताया

मोनालिसा ने अपने साथी फरमान खान से केरल में शादी कर ली। बताया जा रहा है कि दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और परिवार की असहमति के बावजूद उन्होंने विवाह करने का फैसला लिया।

monalisa
मोनालिसा ने अपने साथी फरमान खान से केरल में शादी कर ली
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 02:57 PM
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Interfaith Marriage : हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई मोनालिसा ने अपने साथी फरमान खान से केरल में शादी कर ली। बताया जा रहा है कि दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और परिवार की असहमति के बावजूद उन्होंने विवाह करने का फैसला लिया। इस शादी के बाद फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा, जो मोनालिसा को अपनी फिल्म में काम देने की बात कर चुके थे, ने इस रिश्ते पर सवाल उठाए। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उन्हें यह मामला लव जिहाद जैसा लग रहा है और इसके पीछे किसी तरह की साजिश हो सकती है।

बयानों के बाद सिर तन से जुदा कर देने की धमकी मिली 

मिश्रा के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर काफी विवाद खड़ा हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें गंभीर धमकियां देना शुरू कर दिया। कथित तौर पर उन्हें सिर तन से जुदा कर देंगे जैसे संदेश भेजे गए, जिसके कारण मामला और संवेदनशील बन गया। दूसरी तरफ मोनालिसा का कहना है कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है। उसके मुताबिक परिवार और समाज के दबाव के कारण उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसलिए उसने अपने साथी के साथ रहने का फैसला किया।

लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद से शादी करने का कानूनी अधिकार 

इस पूरे मामले में एक और विवाद लड़की की उम्र को लेकर भी सामने आया, जिस पर सोशल मीडिया और मीडिया में बहस चल रही है। हालांकि पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यदि लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद से शादी करने का कानूनी अधिकार है। मोनालिसा और फरमान खान की शादी के बाद निर्देशक सनोज मिश्रा द्वारा दिए गए बयान ने विवाद को बढ़ा दिया। इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने की खबरें सामने आईं, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ सके।


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देश के कई इलाकों में LPG संकट, चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर होटल और रेस्टोरेंट्स!

LPG Crisis: देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। लोग सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं जबकि होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना बनाने के पारंपरिक तरीके फिर से अपनाए जा रहे हैं।

LPG Crisis
भारत में LPG संकट
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Mar 2026 12:00 PM
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ईरान-इजराइल संघर्ष का असर अब सीधे भारत के घरों और रेस्टोरेंट्स तक पहुंच गया है। देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। लोग सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं जबकि होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना बनाने के पारंपरिक तरीके फिर से अपनाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार एलपीजी कमी से इनकार कर रही है लेकिन जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने का विकल्प

हैदराबाद के कई मशहूर रेस्टोरेंट्स गैस की कमी के कारण लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर हैं। उदाहरण के लिए, पिस्ता हाउस रेस्टोरेंट में 756 डिशेस में से 750 बंद कर दी गई हैं। अब केवल 6 डिशेस ही लकड़ी के चूल्हों पर बनाई जा रही हैं जिसमें बिरयानी और हलीम भी शामिल हैं। समस्या यह है कि सभी रसोइयों को लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाना नहीं आता।

इंडक्शन की ओर बढ़ता रुझान

भोपाल की फास्ट फूड चैन ‘सागर गैरे’ ने गैस की कमी के चलते अपने रसोई संचालन का 60 से 80 प्रतिशत हिस्सा इंडक्शन पर शिफ्ट कर दिया है। प्रदेश में उनकी लगभग 35 शाखाएं हैं और सभी में यह कदम लागू किया गया है। इंडक्शन पर शिफ्ट होने से खाना बनाने में थोड़ी राहत मिली है लेकिन सभी मामलों में यह स्थायी समाधान नहीं है।

गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें और पुलिस की मौजूदगी

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में सिलेंडर की कमी के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। लोग रात भर लाइन में खड़े रहते हैं और फिर भी सिलेंडर नहीं मिलते। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात की गई है। छोटे होटल और रेस्टोरेंट्स बंद होने की कगार पर हैं क्योंकि कामर्शियल गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

सरकार का बयान

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा का कहना है कि देश में एलपीजी की डिलीवरी साइकल 2.5 दिन की बनी हुई है और कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद जनता को वास्तविकता अलग लग रही है और सिलेंडर की लंबी कतारें और रेस्टोरेंट्स की परेशानी जारी है।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक के निर्देश

अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है। सरकार लगातार जनता से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है लेकिन स्थानीय स्तर पर समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।

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