महायुति में नई सियासी शुरुआत : महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं सुनेत्रा पवार

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उनके अचानक चले जाने से जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। सुनेत्रा पवार के सामने न सिर्फ सरकार में खुद को साबित करने की चुनौती होगी।

Maharashtra Woman Deputy Chief Minister Sunetra Pawar
सुनेत्रा पवार के फैसलों पर टिकी दिशा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar31 Jan 2026 10:50 AM
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और खासतौर पर एनसीपी इस वक्त गहरे शोक और राजनीतिक असमंजस के दौर से गुजर रही है। इसी बीच यह लगभग तय माना जा रहा है कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना जाएगा और वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं। अजित पवार के निधन के महज तीन दिन बाद यह फैसला लिए जाने की तैयारी है। फिलहाल सुनेत्रा पवार बारामती में समर्थकों से मिलकर संवेदनाएं स्वीकार कर रही हैं। पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा हालात में वही ऐसा चेहरा हैं, जो अजित पवार की राजनीतिक विरासत को संभाल सकती हैं।

आसान नहीं होगी आगे की राह

बता दें कि अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उनके अचानक चले जाने से जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। सुनेत्रा पवार के सामने न सिर्फ सरकार में खुद को साबित करने की चुनौती होगी, बल्कि पार्टी को एकजुट रखने की जिम्मेदारी भी होगी। हालांकि सुनेत्रा पवार सक्रिय राजनीति में नई मानी जाती हैं, लेकिन उनका जुड़ाव दो बड़े राजनीतिक परिवारों से रहा है। वे स्वयं एक राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं और विवाह के बाद पवार परिवार का हिस्सा बनीं। 2024 से पहले तक वे मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों और जनसेवा में सक्रिय रहीं।

दबाव के बीच नेतृत्व संभालेंगी सुनेत्रा

बता दें कि एनसीपी के भीतर इस समय नेतृत्व को लेकर कोई दूसरा सर्वमान्य नाम सामने नहीं आया। पार्टी विधायक और कार्यकर्ता किसी अन्य चेहरे को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखे। अजित पवार के दोनों बेटे पार्थ पवार और जय पवार फिलहाल राजनीति में उतने अनुभवी नहीं माने जाते, इसलिए उनके नाम पर गंभीर विचार नहीं हुआ। सुनेत्रा पवार को ऐसे वक्त पार्टी की कमान मिलने जा रही है, जब एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) के संभावित विलय को लेकर अंदरूनी मतभेद तेज हैं। पार्टी का एक धड़ा दोनों गुटों के एक होने की वकालत कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग अपनी अलग पहचान बनाए रखने के पक्ष में है।

महायुति में खुद को साबित करने की चुनौती

बता दें कि महायुति सरकार में पहले से ही दो अन्य दल मजबूत स्थिति में हैं। अजित पवार ने इस गठबंधन में अपनी अलग पहचान और दबदबा कायम किया था। अब सुनेत्रा पवार के सामने यह चुनौती होगी कि वे न सिर्फ गठबंधन में अपनी जगह बनाएं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी प्रभावी भूमिका निभाएं। एनसीपी में उनके साथ छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे अनुभवी नेता मौजूद रहेंगे। हालांकि पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि शरद पवार गुट के साथ विलय की दिशा में आगे बढ़ा जाए या अलग राह अपनाई जाए।

राज्य की राजनीति में दो अहम सवाल चर्चा में

बता दें कि बदले हालात में राज्य की राजनीति में दो अहम सवाल चर्चा में हैं। पहला, क्या शरद पवार अपनी धर्मनिरपेक्ष राजनीति की छवि से हटकर बीजेपी के साथ आने का फैसला करेंगे? दूसरा, क्या बीजेपी शरद पवार पर वैसा ही भरोसा करेगी, जैसा उसने अजित पवार पर किया था? कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार के सामने अपने पति की राजनीतिक विरासत संभालने, पार्टी को टूट से बचाने और एनसीपी की प्रासंगिकता बनाए रखने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि वे इस कठिन परीक्षा में कितनी सफल साबित होती हैं। Maharashtra Politics

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एनसीपी में एकजुटता की कोशिशें तेज, मतभेद अभी कायम

महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के एकीकरण पर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई है और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। अजित पवार गुट के नेताओं का मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए विलय का मुद्दा जल्दबाजी में उठाया जा रहा है।

Unity in NCP
एनसीपी की राजनीति मोड़ पर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar30 Jan 2026 05:40 PM
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NCP Future: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर एनसीपी के भविष्य को लेकर हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के संभावित विलय को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एनसीपी के एकीकरण पर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई है और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। हालांकि, पार्टी के सभी धड़े इस बात पर एकमत हैं कि अगर विलय की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो उसमें पवार परिवार की भूमिका निर्णायक होगी। खासतौर पर सुनेत्रा पवार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।

विलय को लेकर किसका क्या रुख

बता दें कि अजित पवार गुट के नेताओं का मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए विलय का मुद्दा जल्दबाजी में उठाया जा रहा है। इस गुट के कई नेता फिलहाल तुरंत विलय के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी ओर, शरद पवार गुट में इसे लेकर सक्रियता और जल्द फैसले की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शशिकांत शिंदे, जयंत पाटिल और राजेश टोपे विलय के समर्थन में हैं, जबकि सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, धनंजय मुंडे और छगन भुजबल अभी असमंजस की स्थिति में बताए जा रहे हैं।

एनसीपी में विलय का अंतिम फैसला कौन करेगा?

बता दें कि पार्टी के अंदरखाने यह चर्चा आम है कि एनसीपी के भविष्य पर ‘पवार परिवार’ का फैसला ही अंतिम होगा। विलय को लेकर शरद पवार, सुप्रिया सुले समेत पूरे परिवार की सहमति को अहम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में सुनेत्रा पवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी स्तर पर सुनेत्रा पवार के नाम को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। उनके मुताबिक, यह पार्टी का आंतरिक मामला है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल का बयान

बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पार्टी इस समय भावनात्मक दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि हम महायुति गठबंधन के साझेदार हैं, इसलिए मंत्रिमंडल में एनसीपी की ओर से उचित प्रतिनिधित्व को लेकर जल्द फैसला लेना जरूरी है। लेकिन किसी भी निर्णय से पहले जनभावना और परिवार की स्थिति को ध्यान में रखना होगा। पटेल ने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही पवार परिवार से आगे की रणनीति पर चर्चा करेगा।

क्या पहले ही बन चुकी थी विलय पर सहमति?

सूत्रों के मुताबिक, दोनों एनसीपी को एक मंच पर लाने को लेकर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे के बीच करीब 14 बैठकें हुई थीं। इन बैठकों के बाद शरद पवार को भी पूरी जानकारी दी गई थी और उस समय विलय को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। NCP Future

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प्रवासी भारतीयों के लिए खास मौका, मतदाता सूची में ऐसे हो सकेंगे शामिल

प्रवासी भारतीय निर्वाचक वही भारतीय नागरिक माना जाता है जो भारत की नागरिकता रखता हो, रोजगार/शिक्षा या अन्य कारणों से विदेश में रह रहा हो और किसी अन्य देश की नागरिकता न ले चुका हो।

प्रवासी भारतीयों के लिए खास सुविधा
प्रवासी भारतीयों के लिए खास सुविधा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 04:24 PM
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NRI voter registration India : भारत से बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संसद ने वर्ष 2011 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में संशोधन कर नियम 20(क) जोड़ा। इसके तहत विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को प्रवासी भारतीय निर्वाचक के रूप में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की सुविधा दी गई है। प्रवासी भारतीय निर्वाचक वही भारतीय नागरिक माना जाता है जो भारत की नागरिकता रखता हो, रोजगार/शिक्षा या अन्य कारणों से विदेश में रह रहा हो और किसी अन्य देश की नागरिकता न ले चुका हो। ऐसे नागरिक, जो अर्हक तिथि पर 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हों, अपने पासपोर्ट में दर्ज भारत स्थित निवास पते के आधार पर संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकरण के पात्र होते हैं।

किस विधानसभा क्षेत्र में नाम जुड़ सकता है?

विदेश में रह रहे भारतीय मतदाता अपना नाम सिर्फ उसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं, जो उनके पासपोर्ट में दर्ज भारतीय पते से संबंधित है। इसके लिए फॉर्म 6A के माध्यम से आवेदन किया जाता है। आवेदन ऑनलाइन, ऑफलाइन (स्वयं उपस्थित होकर) या डाक से भेजकर भी किया जा सकता है। यदि आवेदक का भारत में पहले से मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) बना है, तो फॉर्म 6A जमा करते समय उसे समर्पित/जमा करना आवश्यक होगा।

1) ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

ऑनलाइन आवेदन की सुविधा अब बेहद आसान कर दी गई है। प्रवासी भारतीय मतदाता voters.eci.gov.in वेबसाइट या ECINET मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे फॉर्म 6A भरकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य है जैसे नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, और भारतीय पासपोर्ट के महत्वपूर्ण पन्नों की स्वप्रमाणित (Self-Attested) प्रतियां। इनमें फोटो वाला पेज, भारत में दर्ज निवास पते का विवरण वाला पेज, और वैध वीजा की एंट्री/पृष्ठांकन वाला पेज शामिल होना चाहिए। ध्यान रहे, इन सभी प्रतियों पर आवेदक का स्वयं स्वप्रमाणीकरण जरूरी है; दस्तावेज स्वप्रमाणित न होने की स्थिति में आवेदन रद्द भी किया जा सकता है।

2) ऑफलाइन आवेदन

यदि कोई प्रवासी भारतीय मतदाता स्वयं उपस्थित होकर आवेदन करना चाहता है, तो उसे संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय में फॉर्म 6A जमा करना होगा। आवेदन के साथ भारतीय पासपोर्ट के आवश्यक और प्रासंगिक पृष्ठों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य है। इसके अलावा, पहचान और दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए आवेदक को अपना मूल पासपोर्ट ERO के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, ताकि मौके पर ही सत्यापन पूरा किया जा सके और पंजीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न रहे।

3) डाक से आवेदन

जो प्रवासी भारतीय मतदाता डाक के माध्यम से फॉर्म 6A भेजना चाहते हैं, उन्हें भी दस्तावेजो की पूरी तैयारी पहले से करनी होगी। आवेदन के साथ नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो जरूर लगाएं और भारतीय पासपोर्ट के जरूरी पन्नों की स्वप्रमाणित (Self-Attested) प्रतियां संलग्न करें जिसमें फोटो वाला पृष्ठ, भारत में दर्ज पते का विवरण, और वैध वीजा का पृष्ठांकन शामिल हो। ध्यान रहे, अगर प्रतियों पर स्वप्रमाणन नहीं होगा या दस्तावेज़ अधूरे पाए गए, तो आपका आवेदन सीधे निरस्त/खारिज किया जा सकता है।

परिवार के जरिए भी मिलेगी मदद

विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाताओं की सुविधा के लिए उनके प्रदेश में रहने वाले परिवार को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से फॉर्म 6A उपलब्ध/वितरित कराया जाएगा। वितरण से पहले BLO फॉर्म 6A पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम और संबंधित ERO कार्यालय का पता साफ-साफ दर्ज करेगा, ताकि आवेदन सही जगह पहुंचे।

पता बदलने की जिम्मेदारी भी मतदाता की

प्रवासी भारतीय मतदाता की यह जिम्मेदारी भी तय की गई है कि जिस देश में वह रह रहा है, वहां पता बदलने की स्थिति में वह संबंधित विधानसभा क्षेत्र के ERO को जानकारी दे। साथ ही, जब वह भारत लौटकर स्थायी/सामान्य रूप से भारत में रहने लगे, तो यह भी बताना जरूरी है ताकि मतदाता सूची से प्रवासी भारतीय निर्वाचक के रूप में नाम हटाकर, फॉर्म 6 के जरिए उसे उस स्थान का सामान्य मतदाता बनाया जा सके जहां वह वास्तव में भारत में निवास कर रहा है।

वोटिंग का अधिकार मिलेगा

मतदाता सूची में नाम जुड़ने के बाद प्रवासी भारतीय निर्वाचक मतदान के लिए पूरी तरह पात्र हो जाता है। हालांकि, प्रवासी भारतीय मतदाता को मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) जारी नहीं किया जाता। मतदान के दिन मतदान केंद्र पर उसकी पहचान केवल मूल भारतीय पासपोर्ट से की जाती है। इसलिए मतदान के लिए मतदाता को पासपोर्ट की मूल प्रति साथ लाना अनिवार्य होता है। NRI voter registration India

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