जानें क्या ब्रिटेन के शाही परिवार पर भी लगता है टैक्स?

शाही सदस्यों की आय का एक और बड़ा स्रोत 'डची' हैं—डची ऑफ लैंकेस्टर (मोनार्क के लिए) और डची ऑफ कॉर्नवाल (प्रिंस ऑफ वेल्स के लिए)। इन ऐतिहासिक संपदाओं से होने वाली कमाई पर कोई कॉर्पोरेशन टैक्स नहीं लगता।

Royal Family Tax
टैक्स कानून का पूरा सच (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar24 Feb 2026 12:04 PM
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Royal Family Tax: ब्रिटिश रॉयल फैमिली (शाही परिवार) पर टैक्स लगता है या नहीं, यह अक्सर चर्चा का विषय बना रहता है। आम नागरिकों के मुकाबले रॉयल फैमिली को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा काफी अलग है। दरअसल, तकनीकी तौर पर ब्रिटिश शासक (मोनार्क) को कुछ टैक्स देने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन पिछले कुछ दशकों से परिवार ने स्वेच्छा से टैक्स देने का रास्ता अपनाया है।

क्या है कानूनी बाध्यता?

यूनाइटेड किंगडम के संवैधानिक सिद्धांतों के तहत, मोनार्क को इनकम टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स या इनहेरिटेंस टैक्स देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य नहीं किया जा सकता। इसकी वजह यह है कि संसद द्वारा पारित कोई भी कानून 'क्राउन' (शाही ताज) को तब तक स्वतः लागू नहीं होता, जब तक कि उसमें साफ तौर पर ऐसा उल्लेख न किया गया हो।

1993 से बदला रवैया

हालांकि, साल 1992 में क्वीन एलिजाबेथ II ने यह घोषणा की थी कि वह अपनी निजी आय (पर्सनल इनकम) पर अपनी मर्जी से इनकम टैक्स देंगी। यह फैसला 1993 से लागू हुआ और वर्तमान समय में किंग चार्ल्स III के कार्यकाल में भी यह व्यवस्था जारी है। इसी तरह, प्रिंस ऑफ वेल्स (प्रिंस विलियम) भी अपनी निजी आय और डची से होने वाली कमाई पर टैक्स देते हैं।

सॉवरेन ग्रांट पर कोई टैक्स नहीं

शाही खर्चों का एक बड़ा हिस्सा 'सॉवरेन ग्रांट' से आता है। यह यूके ट्रेजरी (सरकारी खजाने) से मिलने वाला पैसा होता है, जिसका इस्तेमाल आधिकारिक कामों, स्टाफ की सैलरी, यात्राओं और बकिंघम पैलेस जैसी प्रॉपर्टीज की मरम्मत में होता है। इस पर कोई टैक्स नहीं लगता क्योंकि इसे शासक की निजी आय नहीं माना जाता, यह एक प्रकार की सार्वजनिक फंडिंग है।

डची से होने वाली कमाई

वरिष्ठ शाही सदस्यों की आय का एक और बड़ा स्रोत 'डची' हैं—डची ऑफ लैंकेस्टर (मोनार्क के लिए) और डची ऑफ कॉर्नवाल (प्रिंस ऑफ वेल्स के लिए)। इन ऐतिहासिक संपदाओं से होने वाली कमाई पर कोई कॉर्पोरेशन टैक्स नहीं लगता। फिर भी, किंग चार्ल्स III और प्रिंस विलियम दोनों ही इनसे मिलने वाली अतिरिक्त आय (सरप्लस इनकम) पर स्वेच्छा से इनकम टैक्स चुकाते हैं।

अन्य शाही सदस्यों पर नियम

रॉयल फैमिली के अन्य सदस्य, जो कि बिजनेस, इन्वेस्टमेंट या नौकरी से निजी आय कमाते हैं, वे पूरी तरह से यूके के टैक्स कानूनों के दायरे में आते हैं। उन्हें किसी भी आम यूके निवासी की तरह ही इनकम टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है और इस मामले में उन्हें कोई विशेष छूट प्राप्त नहीं है। Royal Family Tax

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राज्यसभा चुनाव 2026, महाराष्ट्र और बिहार में बढ़ी सियासी, 16 मार्च को महामुकाबला

बिहार और महाराष्ट्र पर हैं, जहां गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारा एक बड़ी सियासी चुनौती बनकर उभरा है। बिहार में 5 सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

Rajya Sabha Elections 2026 M
5 राज्यों की 17 सीटों पर चुनावी जंग (फाइल फोटो)
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userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 06:47 PM
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Rajya Sabha Elections 2026: देश के पांच राज्यों की 17 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में सकता मचा दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, मतदान 16 मार्च 2026 को होगा और उसी दिन शाम तक नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा। महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश की इन सीटों पर सत्ता और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर का आसार है। वर्तमान स्थिति के मुताबिक, इन 17 सीटों में से 9 सीटें एनडीए (NDA) के पास हैं, जबकि 8 सीटें विपक्ष के खाते में हैं। चुनावी गणित के मुताबिक, भाजपा अपनी संख्या बढ़ाने के मिशन पर है, वहीं विपक्ष भी कई राज्यों में एकजुट होकर सत्ता पक्ष को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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इस बार सबसे अधिक नजरें बिहार और महाराष्ट्र पर हैं, जहां गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारा एक बड़ी सियासी चुनौती बनकर उभरा है। बिहार में 5 सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। यहां एनडीए की स्थिति मजबूत लग रही है, लेकिन लोजपा, हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगी दलों की दावेदारी ने भाजपा के लिए सिरदर्द बढ़ा दिया है।

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हरियाणा और छत्तीसगढ़ में बराबरी का खेल

हरियाणा की 2 सीटों पर मौजूदा समीकरण बराबरी का संकेत दे रहे हैं। यहां एक सीट भाजपा और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है। वहीं, छत्तीसगढ़ की 2 खाली हो रही सीटों पर सत्ता परिवर्तन के बाद समीकरण बदल गए हैं। यहां भी दोनों पक्षों को एक-एक सीट मिलने की उम्मीद है, जिससे कांग्रेस को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

हिमाचल में कांग्रेस को राहत

हिमाचल प्रदेश की एकमात्र खाली हो रही सीट पर कांग्रेस को राहत की खबर है। विधानसभा में पर्याप्त बहुमत होने की वजह से इस सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन अगर विपक्ष ने बिहार और महाराष्ट्र में छोटे दलों के साथ मिलकर 'अंडरकरंट' पैदा किया, तो कुछ सीटों पर खेल पलटने की भी संभावना है।Rajya Sabha Elections 2026

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शादी की दावत बनी जहर, 44 ग्रामीण बीमार, अस्पताल में बेड्स कम पड़े

फूड पॉइजनिंग का असर इतना गंभीर है कि उपस्वास्थ्य केंद्र कोसमी में बेड कम पड़ने लगे। मोहलाई के 17 और बोइरगांव के 27 ग्रामीणों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

The wedding feast turned into poison
गरियाबंद में फूड पॉइजनिंग का कहर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 04:59 PM
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Chhattisgarh News : जिले के दो अलग-अलग ग्राम पंचायत क्षेत्रों में शादी समारोह में शामिल होकर भोजन करने के बाद फूड पॉइजनिंग की वजह से ज़मीन-आसमान एक कर दिया गया। शादी की खुशी में शामिल होने गए 44 लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। सुबह होते ही गांवों में एंबुलेंसों की आवाजें गूंजने लगीं और अस्पताल में मरीजों का तांता लग गया।

दो अलग जगहों पर एक साथ हादसा

जानकारी के मुताबिक, यह हादसा दो अलग-अलग स्थानों पर हुआ है। पहला मामला ग्राम पंचायत आमदी के आश्रित गांव मोहलाई का है, जहां के ग्रामीण कुटेना में आयोजित शादी समारोह के 'चौथिया' कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहीं, दूसरा मामला ग्राम पंचायत दर्रीपारा के बोइरगांव का है, जहां के ग्रामीण धवलपुर में आयोजित भोज कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।

रात थी खुशियों भरी, सुबह हाहाकार

कल रात तक सब कुछ सामान्य था और ग्रामीण हंसी-खुशी दावत का आनंद लेकर अपने घर लौटे थे। लेकिन आज सुबह जैसे ही सूरज की किरणें पड़ीं, ग्रामीणों की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। अचानक उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द ने गांवों में दहशत फैला दी।

अस्पताल में मचा हड़कंप

फूड पॉइजनिंग का असर इतना गंभीर है कि उपस्वास्थ्य केंद्र कोसमी में बेड कम पड़ने लगे। मोहलाई के 17 और बोइरगांव के 27 ग्रामीणों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल परिसर में तिल रखने की जगह नहीं बची है और स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर मरीजों का इलाज कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि बीमार लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय

इस विपदा की घड़ी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संभाल लिया है। आमदी पंचायत के सरपंच आत्माराम नेताम और दर्रीपारा के सरपंच राजकुमार सोरी मौके पर मौजूद हैं और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर मरीजों की देखभाल कर रहे हैं। वहीं, प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं, ताकि किसी और को दिक्कत हो तो तुरंत इलाज दिया जा सके।

खाने के सैंपल लेकर की जाएंगी जांच

प्राथमिक दृष्टि से इसे फूड पॉइजनिंग का मामला बताया जा रहा है। गर्मी के मौसम में भोजन का जल्दी खराब होना या साफ-सफाई में चूक इसका प्रमुख कारण हो सकता है। भोजन के सैंपल लेकर जांच की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सभी ग्रामीणों की जान बचाना है। Chhattisgarh News

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