
Guru Purnima 2022: अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के उजाले की ओर ले जाने वाले गुरु के पूजन का दिवस (Guru Purnima) आज है, जी हां, आज गुरु पूर्णिमा है। महाभारत के रचयिता वेद व्यास के नाम पर इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा आज रात्रि 12.09 बजे रहेगी। आज के दिन बृहस्पति स्वराशि मीन में रहेंगे जो गुरु पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन है। इस साल रुचक, भद्र, हंस और शश नाम के चार राजयोग गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) को खास बना रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के आशीर्वाद से धन-संपत्ति, सुख-शांति का वरदान पाया जा सकता है। साथ ही जिन लोगों की जन्मकुंडली में गुरु ग्रह नकारात्मक या अशुभ स्थित हों वो लोग भी गुरु की पूजा करके बृहस्पति के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं गुरु उपासना की सही विधि…
गुरु पूर्णिमा के दिन व्यास, वशिष्ठ आदि ऋषियों तथा दीक्षा-शिक्षा देने वाले गुरु का पूजन किया जाता है। प्राचीनकाल में विद्यार्थी गुरुकुलों में शिक्षा प्राप्त करने जाते थे। विद्यार्थी इस दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित अपने गुरु का पूजन करके अपनी शक्ति के अनुसार दक्षिणा देकर गुरु को प्रसन्न करते थे। इस दिन पूजा से निवृत्त होकर अपने गुरु के पास जाकर वस्त्र, फल, फूल माला अर्पण करके गुरु के चरणों का पूजन करना चाहिए। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म दिवस भी होता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा कहा जाता है।
गुरु पूर्णिमा के दिन योग-संयोग आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रात्रि 11.20 बजे तक रहेगा। बल में वृद्धि करने वाला एद्रे योग दोपहर 12.43 तक रहेगा। इसके अलावा गुरु स्वराशि मीन में, सूर्य मिथुन में और चंद्र धनु राशि में गोचर करेगा। आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक सौभाग्यवती स्ति्रयां अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए कोकिला व्रत रखकर गौरी की पूजा करती हैं।
बन रहे हैं 4 विशेष योग पंचांग के मुताबिक इस साल गुरु पूर्णिमा के दिन मंगल, बुध, गुरु और शनि शुभ स्थिति में विराजमान होंगे। इनकी इस शुभ स्थिति की वजह से गुरु पूर्णिमा पर 4 राजयोग का निर्माण हो रहा है। साथ ही इस दिन बेहद शुभ बुधादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से यह स्थिति बेहद शुभ मानी जा रही है। जिस कारण गुरु पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ गया है।
इस विधि से करें गुरु उपासना गुरु पूर्णिमा के पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें। साथ ही जिनको भी आप गुरु मानते हो उनको उच्च आसन पर बिठाएं। उनके चरण जल से धोएं और फिर पोंछे। इसके बाद चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें। उन्हें यथासंभव वस्त्र प्रदान करें। फल और मिठाई भी दे सकते हैं। साथ ही गुरु फिर गुरु के चरणों में वदंन करें और इस मंत्र का जाप करें…
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः