गुरुग्राम के पालम विहार में वाङ्मय कला संगम के कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक हस्तियों की मौजूदगी में तीन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।

गुरुग्राम। पालम विहार स्थित कीर्ति निकेतन में वाङ्मय कला संगम के तत्वावधान में भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के सृजनात्मक संवर्धन को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों की मौजूदगी में तीन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में पुस्तक लोकार्पण के साथ काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित साहित्यकारों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बनाया। बेल्जियम से आए नेता, अभिनेता और वरिष्ठ साहित्यकार कपिल कुमार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पुलिस उपाधीक्षक और साहित्यकार रमनपाल सिंह ने की।
कार्यक्रम के दौरान प्रज्ञा यज्ञ, रंगों से संवाद और आधुनिक हिंदी काव्य धारा पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें प्रज्ञा यज्ञ डॉ. राकेश छोकर और डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' की युगल प्रस्तुति है। वहीं रंगों से संवाद के संपादक डॉ. हरीश नवल हैं, जबकि इसका चित्रांकन डॉ. स्नेह सुधा नवल ने किया है और काव्य डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' का है। आधुनिक हिंदी काव्य धारा के संपादक डॉ. सुनील परीट हैं। इन पुस्तकों के लोकार्पण के जरिए कार्यक्रम में हिंदी साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न पक्षों को सामने रखा गया। आयोजन में साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कपिल कुमार के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीणा शंकर शर्मा, अंजू कालरा दासन, अश्वनी दासन, प्रसिद्ध उद्घोषिका एवं कवयित्री-कथाकार अलका सिन्हा, दोहाकार-गीतकार मनु सिन्हा, साहित्यकार नीना गुप्ता, राष्ट्रीय स्तर की शूटर एवं साहित्यकार पूनम अरोड़ा और साहित्य 24 के प्रकाशक हरि प्रकाश पांडेय सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। आयोजन की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके की गई। इसके बाद डॉ. वीणा शंकर शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों के स्वागत के बाद उन्हें अभिनंदन पत्र भी भेंट किए गए।
पुस्तक लोकार्पण के साथ कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह भी हुआ। साहित्य और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। कार्यक्रम के आतिथेय की जिम्मेदारी डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' और आशा सिंघल ने निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश छोकर ने किया। वाङ्मय कला संगम के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' हैं, जबकि डॉ. राकेश छोकर संस्था के संरक्षक हैं।
वाङ्मय कला संगम के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के सृजनात्मक संवर्धन के साथ समाज और राष्ट्र में संवेदना, चेतना और मूल्यबोध को समृद्ध करने वाली रचनात्मक गतिविधियों को मंच प्रदान करना रहा। गुरुग्राम में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में पुस्तकों के लोकार्पण के साथ साहित्यकारों और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान भी किया गया।
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