मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया।

National News : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। इसी बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराने की मांग वाली शिकायत और सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली याचिका सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, कोलकाता और देहरादून समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। National News
इस पूरे विवाद में नया मोड़ 24 सितंबर को आया, जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी। उन्होंने पुलिस से FIR दर्ज कर मामले की जांच करने की मांग की। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है, लेकिन अभी FIR दर्ज नहीं की गई है। महुआ मोइत्रा की शिकायत में SIR के दौरान मतदाता सूची, Form 6 और चुनाव आयोग की IT व्यवस्था से जुड़े कई आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में संबंधित अधिकारियों से पूछताछ और मामले से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। ये आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र जांच/न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। National News
इसी बीच अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। याचिका भारतीय संविधान के Article 32 के तहत दाखिल की गई है और इसमें SIR से संबंधित कथित फैसलों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों, दिशा-निर्देशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने की मांग की है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना का भी नाम दिया गया है। National News
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची से हटाए गए करीब 13 करोड़ नामों की जांच से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग अथवा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में SIT गठित करने की मांग की है। दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा संबंधित सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार और मेटाडाटा सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा दाखिल याचिका में किए गए दावे का हिस्सा है। National News
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े फैसलों का उल्लेख किया गया है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। National News
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों से अलग रुख रखते हुए कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी इसमें शामिल थी। लेकिन बिना सहमति के लिए गए फैसलों के आरोपों को चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करता। यही विरोधाभास अब पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पुलिस शिकायत में FIR की मांग और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निगाहें टिक गई हैं। National News
SIR को लेकर राजनीतिक विरोध अब सड़क से अदालत तक पहुंच चुका है। एक ओर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं, दूसरी ओर पुलिस में शिकायत और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है। पुलिस के पास FIR दर्ज करने की मांग वाली शिकायत है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अभियोजन, SIT जांच और कथित तौर पर लिए गए कुछ फैसलों को रद्द करने की मांग वाली याचिका दाखिल हो चुकी है। अब इस मामले में अदालत का रुख और पुलिस की ओर से शिकायत पर की जाने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। National News
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