
दुनिया भर में प्रसिद्ध हल्दीराम (Haldiram's) एक बड़ा ब्रांड बन चुका है। यह आश्चर्यजनक बात है कि दुनिया के इतने बड़े ब्रांड हल्दीराम की शुरुआत एक आठवीं पास शख्स ने की थी। आपको बता दें कि हल्दीराम की शुरुआत बीकानेर के रहने वाले गंगा बिशनजी अग्रवाल ने साल 1937 में की थी। वह छोटी सी दुकान में भुजिया और नमकीन बेचते थे। विशन अग्रवाल की मां उन्हें प्यार से हल्दीराम कहकर बुलाती थी, इसलिए उन्होंने अपने नमकीन का नाम भी 'हल्दीराम' ही रखा। उन्होंने नमकीन और भुजिया बनाने की कला अपनी बुआ ‘बीखी बाई’ से सीखी थी। हालांकि उन्होंने इसमें कई बदलाव किए। उनकी नमकीन लोगों को पसंद आने लगी क्योंकि उन्होंने बेसन की जगह मोठ दाल यूज की। इससे नमकीन का स्वाद बढ़ गया और ग्राहकों के बीच उनकी लोकप्रियता भी।
भुजिया और नमकीन को लेकर उनका प्रयोग सफल रहा। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह की भुजिया बनाना शुरू किया। 8वीं पास बिशनजी अग्रवाल के पास गजब की मार्केटिंग स्किल भी थी। बिजनस को आगे ले जाने के लिए उन्होंने बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंह के नाम पर भुजिया का नाम ‘डूंगर सेव’ रख दिया। महाराजा का नाम जुडऩे के बाद भुजिया का नाम तेजी से फैलने लगा। धीरे-धीरे हल्दीराम का भुजिया बीकानेर में पॉपुलर हो गया। बिशनजी अग्रवाल इसे पूरे देश में फैलाना चाहते थे। उन्होंने कोलकाता में एक दुकान खोली। उसके बाद हल्दीराम नागपुर और फिर दिल्ली भी पहुंच गया। साल 1970 में नागपुर और साल 1982 में राजधानी दिल्ली में हल्दीराम के स्टोर खुले। बिजनस बढऩे के साथ-साथ परिवार भी बढ़ा और फिर तीन हिस्सों में बंट गया। इस बंटवारे का मकसद अधिक से अधिक ग्राहकों तक आसानी से पहुंचना था। दक्षिण और पूर्वी भारत के कारोबार को कोलकाता से हैंडल किया गया जिसका नाम हल्दीराम भुजियावाला रखा गया। पश्चिमी भारत के कारोबार का कंट्रोल नागपुर के हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल से होता है और उत्तरी भारत के कारोबार का कंट्रोल दिल्ली के हल्दीराम स्नैक्स एंड एथनिक फूड्स से होता है।
हल्दीराम (Haldiram's) कंपनी ने अपने कदम दुनिया की सबसे बड़ी कम्पनी बनाने की दिशा में आगे बढ़ा दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने का दावा तो हल्दीराम की तरफ से नहीं किया गया है। लेकिन हल्दीराम की तैयारियों को देखकर यह साफ जाहिर है कि हल्दीराम कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने की रेस में शामिल हो चुकी है। भारत की सबसे बड़ी भुजिया और पारंपरिक स्नैक्स बनाने वाली कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड कंपनी में जल्दी ही एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हल्दीराम के दिल्ली और नागपुर यूनिट अब साथ मिलकर काम करेंगे। इसका मतलब है कि हल्दीराम का जो कारोबार दिल्ली और नागपुर में अलग-अलग चल रहा था, वो अब एक हो जाएगा। सिंगापुर की प्राइवेट इक्विटी फर्म टेमासेक अब हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदने वाली है। लगभग दस वर्षों से कई बड़ी कंपनियां हल्दीराम में दिलचस्पी दिखा रही थीं। टेमासेक, हल्दीराम में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। इससे हल्दीराम का वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर आंका गया है। हल्दीराम के मालिक, अग्रवाल परिवार अपनी 9 प्रतिशत हिस्सेदारी टेमासेक होल्डिंग्स को बेचेंगे। टेमासेक होल्डिंग्स सिंगापुर सरकार की इन्वेस्टमेंट कंपनी है।
खबर है कि हल्दीराम कंपनी का नाम बदल जाएगा। हालिया डील हल्दीराम के परिवार के लिए एक खुशी का मौका लेकर आई है। नागपुर स्थित हल्दीराम फूड्स और दिल्ली स्थित हल्दीराम स्नैक्स अब एक होने जा रहे हैं। अग्रवाल परिवार की दो शाखाएं इन कंपनियों को चलाती हैं। दोनों कंपनियों के विलय की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा। इसके बाद एक नई कंपनी बनेगी, जिसका नाम हल्दीराम फूड्स एंड स्नैक्स होगा। इस कंपनी में नमकीन, मिठाई, रिटेल स्टोर और खाने-पीने की चीजें शामिल होंगी। अग्रवाल परिवार हल्दीराम ब्रांड को और मजबूत करना चाहता है। इसलिए वे काफी समय से कंपनी को एक करने की कोशिश कर रहे थे। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने विलय की योजना को मंजूरी दे दी है। इससे एक नई कंपनी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। हल्दीराम की प्रोडक्ट लिस्ट में नमकीन, मिठाई, दुकानें और रेस्टोरेंट शामिल हैं। कंपनी दुनिया भर में बसे भारतीयों को सामान एक्सपोर्ट करती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ब्रांड की पहुंच, गुडविल और ग्रोथ पोटेंशियल को देखते हुए कंपनी का वैल्यूएशन 84,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।
कंपनी में बदलाव की वजह से अब IPO भी आ सकता है। यानी कंपनी पहली बार अपने शेयर आम लोगों को बेचेगी। डील से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हिस्सेदारी बेचने की घोषणा जल्द ही हो सकती है। टेमासेक के साथ 9 प्रतिशत हिस्सेदारी की डील लगभग फाइनल हो चुकी है। इसके अलावा, कंपनी 5 प्रतिशत और हिस्सेदारी बेचने पर भी विचार कर रही है। इस डील के पूरी हो जाने के बाद IPO लाया जाएगा। IPO के साथ ही हल्दीराम दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी की रेस में शामिल हो जाएगी।