Happy New Year 2023 : चल चलिये ....चल कित्थे चलिये (नया साल मुबारक)
Chal Chaliye ....Chal Kitthe Chaliye (Happy New Year)
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 08:21 PM
अंजना भागी
31 दिसम्बर शाम लगभग पाँच बजे से ही समाज में कुछ ऐसी सी फीलिंग आ रही थी कि चल चलिए, कित्थे चलिये...। काटूँ कैसे शा...माँ।।
सन 2022 जा रहा था तथा 2023 को आना था। 2 साल कोरोना झेलने के बाद मुझे क्या लगभग बहुत से मेरे जैसों को समझ ही नहीं आ रहा था। कैसे पकड़ना है 2023 को। सबकी अपनी अपनी चॉयस जैसे की नित्य शराबियों को तो क्रोध भी आ रहा था कि 31 दिसम्बर कोई काम का दिन है छुट्टी होनी चाहिए। जो शरीफ शराबी थे, वे तो आए ही नहीं अपने इंतजाम कर घर बैठ कर ही शाम का इंतजार करने लगे। जो समझदार थे वे ऑफिस तो आ गए। काम भी किया पर शाम होते होते तिलमिला गए। आखिरकार घड़ी देखते ही देखते वे भी फर्र हुए। कित्थे चलिये.. और भी बहुत काम होते हैं। हद तो तब हो गई जब मैंने भी अपने मैनेजर से पूछा सर आज पाँच बजे जाऊँ क्या, इतने समझदार व्यक्ति पहले कुछ घूर कर देखा, मुस्कुराए फिर बोले वाह भाई आप भी जम के....एंजॉय। मेरी तो पानी की मोटर फुंक गई थी ठीक करवानी थी....अब क्या कहती।
Happy New Year 2023
डीटीसी वाले अपने समय से पहले ही तेज तेज बसें भगा कर ले गए। मौका ही ऐसा था। नये वर्ष का माहौल था। कुछ भी कह सकते थे। सड़कों पर जाम था। ये तो भला हो टेम्पू और रोडवेज़ वालों का जो चुन चुन सवारियाँ ले गये। नहीं तो 10 डिग्री पारा था। मन उनका भी बहुत लहरा रहा था टेम्पू में तेज चलता म्यूजिक और गानों का स्वर “एक बात बताओ तो, यादों में मरते हो। क्या तुम हमसे मोहब्बत करते हो’ यकीन मानिए टेम्पू वाले भी कौन सा साहू थे पीए हुए ही थे। उनका बार बार टेम्पू लहराना। सवारियों का कसकर टेम्पू को पकड़ राम राम बुलाना, यकीन मानिये 2023 को कुछ जल्दी ही पास ला रहा था।
अधिकांशत: महिलाओं के पास तो संसार की समस्याओं को डिस्कस करने का टाइम ही नहीं होता। घर के झमेले ही इतने होते हैं। 2023 को लाने के लिए कुछ नया पकाना। गली में संगीत बज रहा है तो उनको भी तो झाँकने जाना था। यदि महिलाएं ही नहीं जायेंगी तो दायें बाएँ से जो भी नहीं आया उनकी निंदा कौन करेगा। गली मुहल्लों में बजता संगीत 2022 को तेजी से लिए जा रहा था। साथ ही 2023 को ला भी रहा था। माँ भाभियों पर काम का बोझ उधर भागता जाता 2022। आने वाला नया साल और काम हैं कि खत्म ही नहीं हो रहे। उनकी एनजाइटी बढ़ा रहा था।
Happy New Year 2023
जिन घरों में संयुक्त परिवार हैं। वहां होली हो, दिवाली हो या हो नया साल, थोड़ा सा स्ट्रैस तो बना ही रहता है। इधर गली में बजता गाना ‘ये दिल मेरा जबसे मिला है आप से और बाहर झाँकती पोतियाँ–पोते सीनियर सिटीजंस का पारा चढ़ाए रखते हैं। ऐसे में कितना भी वे दिल को समझायें, पर जुबान कैसे रुके उधर गली में नाचते जवान बच्चे ‘गडबड़ी न न न न जरा सा मेरे पास तो आ जा। बस तू और मैं’। न पूछो उधर घर में लव जिहाद पर लैक्चर। इधर पोतियों की चलती जबान हाँ हाँ हिन्दू लड़कियां तो होती ही बिना दिमाग हैं न यकीन मानो आते साल की खूबसूरती को बढ़ाता है। साथ ही यह भी समझाता है की बिना खिच खिच भी ज़िंदगी नहीं चलती।
सुपर सीनियर्स ने पूजा पाठ में दिल रमाया पर सोच कहीं ये भी थी की मंदिर चाहिए या टीपू सुल्तान। बच्चे नाच नाच दोहरे हो रहे थे कारण उनके कानों में पड़ती आवाज फिर से लॉकडाउन होगा यानि स्कूल बंद। म्यूजिक कुछ भी हो खूब नाच रहे थे। युवा जोड़ों ने भी नया साल बुलाया दिल खोल कर नाचा और गाया “अगर कोई बात बिगड़ जाये अगर कोई ..... कॉलेज जाने वाले युवा कुछ गंभीर थे लुक छुप दारू भी मुंह लगाई पर ये बात अब तक समझ नहीं आई। 3 जनवारी भारत जोड़ो यात्रा तैयार हो रही है। उधर सभी मॉल्स में नाचने वालों की भीड़। जिनको अंदर जगह नहीं मिली वे बाहर ही खड़े थे सडक पर। कनाट प्लेस से इंडिया गेट तक बिना मास्क के पब्लिक ही पब्लिक तोsss कैसे होगा लॉकडाउन। असली चिंता ‘पेपर ऑफ लाइन होंगे या ऑनलाइन’ इसी नाच गाने में खूबसूरती से 2022 विदा हो गया और 2023 दाखिल हो गया। हैप्पी न्यू ईयर।