विनय संकोची
(Health )दुनिया भर में चुकंदर (Beetroot) को सलाद और सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। चुकंदर के पत्तों को शाक के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। इसको शर्करा-स्रोत के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। चुकंदर का जूस अनेक रोगों के उपचार में लाभदायक होता है। यद्यपि हमारे दैनिक आहार में चुकंदर को अभी भी उचित स्थान प्राप्त नहीं है, फिर भी इसके नियमित सेवन से न केवल अनेक रोगों में लाभ होता है, बल्कि यह त्वचा को स्निग्ध बनाकर खूबसूरती भी प्रदान करता है। चुकंदर में अच्छी मात्रा में आयरन(Iron), विटामिन(Vitamin) और खनिज (minerals) होते हैं, जो शरीर में रक्तवर्धन और शोधन में सहायक होते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसमें सोडियम(Sodium), पोटेशियम (potassium), फॉस्फोरस (Phosphorus), क्लोरीन(chlorine), आयोडीन (Iodine)के अतिरिक्त अन्य अनेक महत्वपूर्ण विटामिन भी पाए जाते हैं। चुकंदर में गुर्दे और पित्ताशय को साफ करने के प्राकृतिक गुण मौजूद हैं। इस में उपस्थित पोटेशियम जहां शरीर को प्रतिदिन पोषण प्रदान करने में मदद करता है, तो वही क्लोरीन गुर्दों के शोधन में सहायक होता है।
चुकंदर का रस पीने से न केवल शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है, अपितु अन्य अनेक लाभ भी होते हैं। मुख्यत: सफेद चुकंदर से व्यवसायिक तौर पर शर्करा प्राप्त की जाती है, जबकि लाल चुकंदर सलाद और सब्जी के तौर पर अपनाया जाता है। आम लोगों को चुकंदर के औषधीय तत्व के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, जबकि देश के अनेक सुदूर ग्रामीण और वनांचलों में चुकंदर को औषधि के रूप में अपनाया जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर चुकंदर को यदि स्वास्थ्य रक्षक कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। चुकंदर को अपने भोजन में शामिल कर रोग मुक्ति का आनंद लिया जा सकता है।
शोधकर्ता वैज्ञानिकों के मुताबिक सफेद और लाल चुकंदर रक्तचाप को कम करती हैं। इसकी वजह इसमें भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला नाइट्रेट है। यह एक ऐसा रसायन है जो पाचन तंत्र में पहुंचकर रक्त प्रवाह को बढ़ाता है तथा रक्तचाप को कम रखता है। यह मांसपेशियों की ऑक्सीजन की जरूरत को भी कम कर देता है।
आधुनिक शोध, कैंसर के लिए चुकंदर को महत्वपूर्ण मानते हैं। चुकंदर में पाया जाने वाला लाल रंग बेटाईन नामक रसायन की वजह से होता है, जो कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में मददगार साबित हुआ है।
चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। इसके नियमित सेवन से कब्ज़ से बचा जा सकता है। यह बवासीर के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसका जूस पीलिया, हेपेटाइटिस, मितली और उल्टी के उपचार में लाभप्रद होता है। चुकंदर का जूस अकार्बनिक कैल्शियम को संग्रहित करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। इसका रस पीने से शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाती है। चुकंदर का रस हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर रखता है। चुकंदर विशेषतया महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी है। चुकंदर और उसके पत्ते फॉलेट का अच्छा स्रोत होते हैं, जो उच्च रक्तचाप और अल्जाइमर की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
चुकंदर को बढ़ती उम्र के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मूला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में भी सहायक होता है। इसके अतिरिक्त चुकंदर वजन कम करने के लिए भी एक बेहतर उपाय है। कच्चा चुकंदर या कम से कम दो चुकंदर का जूस निकालकर रोजाना सुबह खाली पेट लिया जाए, तो यह वजन घटाने में सहायक सिद्ध होता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि चुकंदर के रस के साथ गाजर का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से शरीर की ताकत तो बढ़ती ही है, साथ ही मोटापा कम होता है और अनावश्यक चर्बी भी कम हो जाती है।
अब तो हर्बल के जानकार गर्भवती महिलाओं को चुकंदर सेवन की सलाह देने लगे हैं। जानकारों के अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा को कम नहीं होने देता है।
हृदय रोगियों को कच्चा चुकंदर चबाने से काफी फायदा होता है। प्रतिदिन कम से कम दो चुकंदर चबाने से हृदयाघात की संभावना अपेक्षाकृत कम हो जाती है। अपचन की दशा में भी रोगियों को कच्चा चुकंदर खाने की सलाह दी जाती है। चुकंदर को कच्चा चबाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलते हैं जो पाचन क्रिया संतुलित कर अपचन की समस्या को दूर करने में सहायता करते हैं।
चोट व मोच में चुकंदर की पत्तियों का ताजा रस लाभ पहुंचाता है। पत्तों को रगड़ कर मोच वाले स्थान पर रखकर पट्टी बांधनी चाहिए। पत्तों के रस को शहद में मिलाकर दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है। इसमें संदेह नहीं कि चुकंदर बहुत उपयोगी है, लेकिन औषधि के रूप में इसका सेवन योग्य चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।