विनय संकोची
Health: सुपारी (Betel nut) के बारे में ज्यादातर लोग इतना ही जानते हैं कि यह पान में डालकर खाई जाती है, गुटखे में इस्तेमाल होती है और पूजा-पाठ में काम आती है। कम ही लोग होंगे जो जानते हों कि सुपारी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इस तथ्य की पुष्टि आयुर्वेद भी करता है। वास्तव में सुपारी एक जड़ी बूटी है और इसकी दो प्रमुख प्रजातियां हैं- साधारण सुपारी और लाल सुपारी, जो नारियल तथा साल के पेड़ों के समान ऊंचे पेड़ों पर लगती हैं। सुपारी का कच्चा फल चिकना नारंगी होता है, जो पक जाने पर गहरे नारंगी रंग का हो जाता है।इस फल के आवरण के अंदर सुपारी होती है। सुपारी का वानस्पतिक नाम एरेका केटेचू है। अंग्रेजी में इसे एरेका नट, बीटल पाम, संस्कृत में घोरंट, गुवारक , पूगी ओड़िया में पूगो, हुआ कन्नड़ में बेट्टा, पूग; गुजराती में सोपारी, तमिल में कमुगु, पारक्कुमरम, तेलगु में पोका, बांग्ला में गूआ, शुपारी, मराठी में पूंग और हिंदी में सुपारी, सोपारी, सुपाड़ी और कसेली कहा जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में सुपारी के गुण और उपयोग की अच्छी चर्चा की गई है। एक प्रकार के काष्ठफल सुपारी को इसमें पाए जाने वाले विशेष पोषक तत्व एक उत्तम औषधि बनाते हैं। कई सौ वर्षों से आयुर्वेद में सुपारी का उपयोग अनेक प्रकार की दवाइयां बनाने में किया जाता रहा है।
आइए जानते हैं सुपारी के गुण-उपयोग के बारे में -
• एक - दो ग्राम सुपारी चूर्ण को जल के साथ सेवन करने से चेचक जैसी बीमारी में लाभ मिल सकता है।
• सुपारी के पत्तों के रस को तेल में मिलाकर मालिश करने से कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
• दस से तीस मिलीग्राम सुपारी के फल का काढ़ा बनाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
• सुपारी, खादिर, पिप्पली और मरिच का भस्म बनाकर मलने से दांतों और मसूढ़ो के दर्द में राहत मिलती है। सुपारी पाउडर को दांतों पर मलने से दंत विकारों से छुटकारा मिल सकता है।
• हल्दी चूर्ण और सुपारी चूर्ण को चीनी में मिलाकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
• छाछ के साथ एक से चार ग्राम तक सुपारी के सेवन से आंतों की सफाई हो जाती है और आंत संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।
• हरी सुपारी को धीमी आंच पर पकाकर काटकर खाने से दस्त की समस्या से निजात मिल सकती है।
• सुपारी में मौजूद अनेक पोषक तत्व मानसिक और हृदय से संबंधित स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं।
• लाल सुपारी का उपयोग मुंह का छालों से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है।
• एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी को सीमित मात्रा में सुपारी का उपयोग कर दूर किया जा सकता है। सुपारी का अत्यधिक सेवन हानिकारक हो सकता है।
• सुपारी के सेवन से लार बनने की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है, जिससे पाचक रसों की बढ़ोत्तरी में सहायता मिलती है। भोजन के उपरांत सुपारी का सेवन पाचन संबंधी विकारों से निजात दिलाने में सहायक हो सकता है।
• सुपारी पाक का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्म के विकारों से राहत मिल सकती है।
• जिनका चित्त एकाग्र न हो, सुपारी उनकी एकाग्रता के स्तर में सुधार ला सकती है। सुपारी का सेवन उत्तेजना पर भी नियंत्रण में सहायता करता है।
• दिल के दौरे के कारण कमजोर हुई मांसपेशियों को ताकत देने का काम सुपारी कर सकती है।
जरूरी बात : सुपारी के अत्यधिक सेवन से इसके कई दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। उदाहरण के तौर पर चेहरे पर लाली आना, बहुत ज्यादा पसीना आना, सांस लेने में परेशानी, जरूरत से ज्यादा प्यास लगना, पेट और मांसपेशियों में दर्द, दिल की धड़कन का मंद होना और बेहोशी आना आदि।विशेष : यहां पर सुपारी के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है, जो किसी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प कतई नहीं है। हम किसी प्रयोग की सफलता का कोई दावा नहीं करते हैं। सुपारी को रोग विशेष में औषधि के रूप में इस्तेमाल से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है, अन्यथा नुकसान हो सकता है।