विनय संकोची
Health : 'चिरौंजी'(Chironji) पयार या पयाल नाम के वृक्ष के फल के बीच की गिरी है, जिसे पकवान, मिठाई, सेवईं और खीर इत्यादि में इस्तेमाल किया जाता है। चिरौंजी को इसके पौष्टिक गुणों के कारण ही सूखे मेवों में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। आयुर्वेद चिरौंजी को पुष्टिकारक मानता है। चिरौंजी को संस्कृत में प्रियाल, खरस्कंध, धनु्ष्टप, स्नेहबीज, चारक, प्रियालक, खद्रू, मोक्षवीर्य आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है और इसका वानस्पतिक नाम बुकैनानिया कोचीनचाइनेनसिस है।
चिरौंजी स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। अनेक रोगों का नाश करने में चिरौंजी सहायक होती है तो आइए जानते हैं चिरौंजी से होने वाले लाभ के बारे में -
• चिरौंजी शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सहायक है। ताजी चिरौंजी खाने अथवा दूध में चिरौंजी को खूब अच्छी तरह उबालकर खीर बनाकर सेवन करने से शरीर में ताकत आती है।
• चिरौंजी को पाचन के लिए बहुत उपयोगी पाया गया है। चिरौंजी के तेल में खिचड़ी, दलिया आदि बनाकर उसके गुणों का लाभ लिया जा सकता है। साथ ही इसे सीमित मात्रा में चबाकर खाने से भी पाचन क्रिया दुरूस्त होती है।
• चिरौंजी सिरदर्द की समस्या से मुक्त कराने में सहायक है। चिरौंजी के साथ खजूर, बादाम, तिल और ककड़ी के बीज बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण को एक चम्मच दूध अथवा पानी के साथ लेने से सिरदर्द में अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है।
• खुजली की समस्या में भी चिरौंजी लाभकारी है। चिरौंजी की गिरी को गुलाब जल में पीसकर उसमें थोड़ा सा सुहागा मिलाकर खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली जल्दी ही दूर हो जाती है।
• चिरौंजी को एक सौंदर्य प्रसाधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जिनकी त्वचा का रंग सांवला है, यदि चिरौंजी की गिरी को पीसकर दूध में मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल करें तो त्वचा का रंग साफ हो सकता है।
• चिरौंजी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। इसके लिए चिरौंजी के 8-10 गिरी को देसी घी में भून कर पीस लें। इस चूर्ण को करीब एक पाव दूध में डालकर अच्छी तरह उबाल लें। इसके उपरांत 500 मिलीग्राम इलायची चूर्ण और चीनी मिलाकर गुनगुना सेवन करें। ऐसा करने से इम्यूनिटी बढ़ सकती है और जल्दी-जल्दी होने वाली सर्दी, जुकाम, खांसी में राहत मिल सकती है।
• संतरे के छिलके और चिरौंजी को दूध के साथ पीसकर बनाए गए लेप को मुहांसों पर लगाएं जब लेप सूख जाए तो चेहरे को धो लें। नियमित प्रयोग से मुहांसों में लाभ मिल सकता है। चिरौंजी और गुलाब जल के लेप भी मुंहासे दूर होते हैं।
• नियमित और बेहद संतुलित मात्रा में चिरौंजी का सेवन करने से शुगर की समस्या में बहुत फायदा होता है। चिरौंजी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है।
• चिरौंजी के तेल की कुछ बूंदों के साथ भाप लेने से सांस की परेशानी में बड़ी राहत मिलती है।
• चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से खांसी में तत्काल लाभ होता है।
• चिरौंजी का तेल सूजन और संक्रमण वाली जगह लगाने से बहुत लाभ हो सकता है।
• डायरिया की समस्या में चिरौंजी का इस्तेमाल अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।
• बालों के लिए भी काफी उपयोगी है चिरौंजी। चिरौंजी की पत्तियों के अर्क को हर्बल कंडीशनर के रूप में उपयोग में लाया जाता है। इससे बाल नरम, मुलायम और चमकदार बनते हैं, रूखापन खत्म होता है।
[ विशेष : चिरौंजी अनेक प्रकार से उपयोगी मेवा है लेकिन इसके अत्यधिक सेवन से नुकसान भी हो सकता है। यहां चिरौंजी के उपयोग से होने वाले लाभ की विशुद्ध सामान्य जानकारी प्रस्तुत की गई है। इस जानकारी को उपचार के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह हम बिल्कुल भी नहीं देते हैं। चिरौंजी को रोग विशेष में औषधि के रूप में प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। ध्यान रहे, सामान्य जानकारी चिकित्सक का विकल्प नहीं है।]