विनय संकोची
आयुर्वेदिक नियमों का पालन कर कोई भी व्यक्ति शतायु को प्राप्त कर सकता है। आचार्य वागभट्ट का कथन है -
आयु: कामयमानेन धर्मार्थसुखसाधनम।आयुर्वेदोपदेषु विधेय: परमादर:।।
अर्थात् धर्म, अर्थ और सुख का असाधारण साधन दीर्घायु को चाहने वाले मनुष्य को आयुर्वेद के उपदेशों में विशेष आदर रखना चाहिए, क्योंकि आयुर्वेद के अमृतमय उपदेशों के अनुसार सदा आहार-विहार करने से मनुष्य निरोग रहते हुए धर्मार्थ चतुष्टय की प्राप्ति कर सकता है।
घरों में जीरा खाने का स्वाद बढ़ाने का काम करता है लेकिन जीरे की उपयोगिता केवल रसोईघर तक सीमित नहीं है, अनेक रोगों में दवा के रूप में भी जीरे का उपयोग किया जा सकता है। वर्षों से जीरा आयुर्वेदिक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। जीरा मसालों में वही स्थान रखता है, जो स्थान रत्नों में हीरे का है। जीरा पाचक और सुगंधित मसाला है, यह पेट के विकारों को दूर करने में बहुत ही उपयोगी है। जीरा गरम प्रकृति का होता है। भोजन में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि को दूर करने में जीरा एक उपयोगी औषधि की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
• जीरा आयरन का अच्छा स्रोत है इसका नियमित रूप से सेवन करने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। आयरन की कमी होने पर एक चम्मच जीरा प्रतिदिन सुबह खाली पेट पानी के साथ लेना लाभदायक होता है। गर्भावस्था में आयरन की जरूरत ज्यादा होती है इसलिए गर्भवती के लिए जीरा अमृत का काम करता है।
• भोजन में जीरे का इस्तेमाल मधुमेह के रोगियों को काफी फायदेमंद होता है। रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आधा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ लेना लाभ पहुंचाता है।
• आयरन और कैल्शियम से भरपूर जीरा दूध पिलाने वाली माताओं के लिए बहुत लाभकारी है। भुने जीरे का पाउडर बनाकर और एक बड़ा चम्मच जीरा-पाउडर सुबह-शाम गर्म पानी या गर्म दूध से लेने से बहुत अधिक लाभ होता है।
• साइनस की समस्या होने पर अगर जीरा उबालकर उसका भाप नियमित रूप से लिया जाता है, तो बहुत अधिक फायदा मिलता है। अस्थमा या अन्य सांस संबंधी समस्या होने पर जीरे का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
• कब्ज की शिकायत होने पर जीरा, काली मिर्च, सौंठ और करी पाउडर को सम मात्रा में लेकर, मिश्रण तैयार कर स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाकर चावल के साथ खाने से पेट साफ रहेगा और कब्ज में राहत मिलेगी।
• जीरा, मेथी, अजवाइन और सौंफ 50-50 ग्राम और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर, एक चम्मच रोज सुबह सेवन करने से शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों में आराम मिलता है। गैस की समस्या में इससे तत्काल लाभ मिलता है।
• प्रसूति के पश्चात जीरे के सेवन से गर्भाशय की सफाई हो जाती है।
• थायराइड में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
• हिस्टीरिया के रोगी को गर्म पानी में भुनी हींग, जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से रोगी को तत्काल लाभ होता है। भुने हुए जीरे को सूंघने से जुकाम से छींकें आना बंद हो जाती हैं।
• एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लेने से अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलता है। एसिडिटी होने पर आधा चम्मच जीरे को कच्चा चबा कर खाने से लाभ मिलता है।
• एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाने से नींद न आने की बीमारी से राहत मिलती है। जीरा सीने में जमी कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुकाम से राहत दिलाता है।
• दांत में कीड़ा लगने के कारण दर्द में पीपल, सेंधा नमक, जीरा, सेमल का गोंद तथा हरड़ का बक्कल सम भाग लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर दांतों पर मलने से पर्याप्त लाभ मिलता है।
• जीरे में एंटी फंगल एंटी माइक्रोबियल तत्व होते हैं, जो घावों को भरने में मदद करते हैं। बवासीर की समस्या होने पर सुबह खाली पेट कच्चा जीरा चबा-चबाकर नियमित रूप से खाने से लाभ मिलता है।
• वजन कम करने के लिए भी जीरा बहुत उपयोगी होता है। एक बड़ा चम्मच जीरा एक गिलास पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख दें, सुबह उसे उबाल लें और गरम-गरम चाय की तरह पीएं। बचा हुआ जीरा भी चबा लें। ऐसा नियमित रूप से करने से एक महीने में वजन कम होने लगेगा।
• जीरा स्वास्थ्य के साथ सुंदरता में भी इजाफा करता है। पानी में जीरा डालकर उबाले गए पानी से मुंह धोने से चेहरा साफ हो चमकदार होता है। जीरे वाले पानी से स्नान करने पर शरीर की बदबू और खुजली से भी छुटकारा मिलता है।
• रोगविशेष से मुक्ति के लिए जीरे का औषधि के रूप में उपयोग करने से पूर्व योग्य वैद्य से परामर्श करना न भूलें।