Health : सेहत : यूं ही 'अमृता' नहीं कहते 'गिलोय' को!
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:58 AM
विनय संकोची
बहुवर्षायु तथा अमृत के समान गुणकारी होने से गिलोय लता का नाम 'अमृता' है। आयुर्वेद में इसको अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी आदि कई नामों से जाना जाता है। यह स्वयं भी नहीं मरती है और उसे भी मरने से बचाती है, जो इसका प्रयोग करते हैं। कहा जाता है देव-दानवों के युद्ध में अमृत कलश की बूंदें जहां-जहां पर गिरीं वहां-वहां गिलोय उत्पन्न हो गई। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है एवं जीवंतिका नाम दिया गया है। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं। इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है।बेल के काण्ड की ऊपरी छाल बहुत पतली, भूरे या धूसर वर्ण की होती है, जिसे हटा देने पर भीतर का हरित मांसल भाग दिखाई देने लगता है। पत्ते हृदय के आकार के खाने के पान जैसे एकांतर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्व भी होते हैं।
अपने अनगिनत गुणों के साथ गिलोय सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। कुछ लोगों में इसके विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं, इससे कुछ लोगों की पाचन क्रिया खराब हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह के बिना गिलोय के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
• आयुर्वेद के हिसाब से गिलोय रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रूप में कार्य करती है। इससे शरीर में आवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारू बनाती है। गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
• लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाती है, जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से भी बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने का विधान कहा गया है।
• गिलोय में शरीर के शुगर और लिपिड के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। इसके इस गुण के कारण यह डायबिटीज टाइप-2 के उपचार में बहुत कारगर है। गिलोय तथा ब्राह्मी का मिश्रण सेवन करने से दिल की धड़कन को नियंत्रित किया जा सकता है।
• गिलोय में याददाश्त बढ़ाने का गुण होता है। अतः मानसिक दबाव और चिंता को दूर करने के लिए गिलोय का उपयोग अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय चूर्ण को अश्वगंधा और शतावरी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।
• गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, सोंठ, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।
• पैरों में जलन रोकने के लिए गिलोय के रस, नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर बना काढ़ा प्रतिदिन दो से तीन बार सेवन करने से हाथ पैरों शरीर की जलन दूर हो जाती है।
• खुजली अक्सर रक्त विकार के कारण होती है। गिलोय का रस पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है।
• गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिला कर लेना, नेत्र-रोगों के लिए लाभकारी है। इसके सेवन से आंखों के रोग तो दूर होते ही हैं, साथ ही, आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
• गिलोय एक रसायन है, जो रक्तशोधक,
ओजवर्धक, हृदय रोगनाशक और लिवर टॉनिक भी है। गिलोय मोटापा कम करने में भी मदद करती है।
• गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में भी फायदा होता है।
• गिलोय के नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोरायसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना गया है।