विनय संकोची
Health : कचरी एक सुपरिचित तरकारी है। मरु प्रदेश में बहुत ज्यादा पैदा होने के कारण इसका एक नाम मरुजा भी है। कचरी का पौधा कुकुरबिटेसी कुल से आता है। आयुर्वेद में कचरी को कर्कटी वर्ग की वनौषधि माना है। कचरी की बेल खीरे जैसी होती है, लेकिन लंबाई में थोड़ी छोटी होती है। कचरी के पत्ते ककड़ी के पत्तों जैसे ही होते हैं। इसकी बेल पर छोटे-छोटे पीले रंग के सुंदर फूल लगते हैं। कचरी को ग्वाले बहुत रुचि से खाते हैं, इसलिए कचरी का एक नाम गोपाल कर्कटी भी पड़ गया है।
कचरी को अंग्रेजी में ककुंबर प्युबेसेंट, संस्कृत में चित्रकला, मृगाक्षी, चिभट मराठी में टकमके रौंदनी, चिभूड़ बांग्ला में वनगोमुक, कुंदुरुकी, फुटी पंजाबी में चिंभड़, मारवाड़ी में काचरी और सेंध, हिंदी में आंचलिकता के आधार पर काचर, सैंध, गुराड़ी, पेंहटा और कचरिया कहा जाता है। कचरी के औषधीय गुणों का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों में उपलब्ध है। कचरी के कच्चे हरे सफेद चितकबरे फल बहुत कड़वे होते हैं। पकने पर यही फल पीले पड़ जाते हैं। पकी और अधपकी कचरी से भीनी-भीनी सुगंध आती है। प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रंथ राज निघंटु में कचरी को तिक्तरस वाली, विपाक में अम्ल वातनाशक, पित्तकारक तथा उत्तम रुचिकारक बताया गया है।
आइए जानते हैं कचरी के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में-
• कचरी की चटनी और कचरी की सब्जी सर्दी खांसी से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकती है।
• जिन लोगों को भूख कम लगती है उनके लिए कचरी का सेवन बहुत फायदेमंद है। कचरी में भूख बढ़ाने और भोजन के प्रति अरुचि को दूर करने का गुण होता है।
• कचरी के सेवन से कब्ज, अपच और अन्य अनेक संबंधी पेट संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है। कचरी में ऐसे पोषक तत्व मौजूद हैं, जो गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के संक्रमण को दूर करने में सहायक हैं।
• विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के कारण कचरी जुकाम के उपचार में लाभकारी है।
• कचरी में मौजूद तत्व पथरी को तोड़कर उसे बाहर निकालने में सहायक माने जाते हैं।
• कचरी एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है और इसके बीजों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें विटामिन-सी भी अच्छी मात्रा में होता है। कचरी के यह गुण और पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम बखूबी करते हैं। जिससे बार-बार बीमार पड़ने के जोखिम से बचा जा सकता है।
• कचरी गले में गिल्टी हो जाने की समस्या को कम करने में सहायक है।
• कचरी के पाउडर का नियमित उपयोग फोड़े, फुंसी, खुजली जैसे त्वचा रोग को ठीक करने में सहायता कर सकता है।
• कचरी की जड़ के चूर्ण को नाक में डालने से मिर्गी (अपस्मार) का रोग दूर हो सकता है।
• कचरी की जड़ को पानी के साथ पीसकर और छानकर 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से पेशाब करने में समय होने वाला दर्द और जलन दूर हो जाती है।
• कचरी की जड़ की छाल के चूर्ण में सांभर नमक मिलाकर खाने से जलोदर में लाभ हो सकता है।
• कचरी की जड़ों को सिरके में पीसकर गर्म करके सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।
जरूरी बात : कचरी का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसके अधिक मात्रा में सेवन से शरीर में विष के जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। कड़वी कचरी का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। विशेष: यहां कचरी के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। हम किसी भी प्रयोग और लाभ के बारे में कोई दावा नहीं करते है। कचरी का किसी रोग विशेष में औषधि के रूप में प्रयोग किसी सुयोग्य आयुर्वेदाचार्य /चिकित्सक अथवा आहार विशेषज्ञ से परामर्श के बिना करना हानिकारक हो सकता है।