विनय संकोचीHealth:कलौंजी (Kalonji) के बीजों को मसाले के रूप में इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग इसके औषधीय गुणों से परिचित नहीं है। इसे संस्कृत में कृष्णजीरा, हिंदी में मंगरैल, उर्दू में कलौंजी और बांग्ला में कालाजीरो कहा जाता है। इसका स्वाद तीखा, हल्का कड़वा होता है। सदियों से प्रयोग में लाई जाने वाली कलौंजी का आयुर्वेद के अतिरिक्त प्राचीन ईसाई ग्रंथों में भी वर्णन प्राप्त होता है। प्राचीन समय में एक यूनानी चिकित्सक कलौंजी से सिरदर्द, जुकाम और पेट के कीड़ों का इलाज किया करते थे। रोम में कलौंजी को हर मर्ज की दवा माना जाता रहा है। सदियों पहले कलौंजी का प्रयोग जुकाम, सिरदर्द, संक्रमण, एलर्जी और दांत दर्द के उपचार में भी किया जाता था। कलौंजी को सौंदर्य प्रसाधन के रूप में उपयोग में लाए जाने का भी वर्णन मिलता है। कहा तो यहां तक जाता है कि इस्लाम के मुताबिक हजरत मोहम्मद साहब कलौंजी को मौत के सिवा हर मर्ज की दवा बताते थे।
कलौंजी पोषक तत्वों का खजाना है। कलौंजी में 100 से ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं। इस में कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrates), प्रोटीन(Proteins), वसा(Proteins), ओमेगा-6(Omega-6), ओमेगा-3(Omega-3), ओमेगा-9(Omega-9), के अतिरिक्त निजेलोन थाइमोक्विनोन (Nigelone Thymoquinone), साइमीन(Cymine), कार्बोनी(Carboni) और लिमोनीन (Limonene) जैसे जादुई उड़नशील तेल होते हैं। इनमें मुख्य तेल निजेलोन श्वास नली की मांसपेशियों के संकुचन को रोकने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने के साथ खांसी, दमा और ब्रोंकाइटिस आदि को ठीक करने का काम करता है। कलौंजी में 15 अमीनो एसिड होते हैं, जो प्रोटीन का निर्माण करते हैं। कलौंजी को खान-पान में शामिल कर अनेक शारीरिक व्याधियों से छुटकारा मिल सकता है। तो चलिए जानते हैं कलौंजी के गुण और उपयोग के बारे में।
• कलौंजी में रक्त शर्करा को कम करने का विशेष गुण होता है। खाली पेट कलौंजी के बीजों का सेवन करने से टाइप टू डायबिटीज का खतरा काफी कम हो सकता है।
• उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ कलौंजी के तेल की संतुलित मात्रा का सेवन करने से लाभ होता है। ऐसा करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
• कलौंजी के बीजों में एंटी इंफ्लामेट्री गुण विद्यमान होता है। इसके रहते कलौंजी के सेवन से सूजन कम होती है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। गठिया के उपचार में भी कलौंजी बेहद उपयोगी बताई जाती है।
• एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर कलौंजी कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करती है। खाली पेट कलौंजी के सेवन से स्तन और फेफड़ों के कैंसर से बचा जा सकता है।
• ऑलिव ऑयल और मेंहदी पाउडर में कलौंजी के तेल को मिलाकर, मिश्रण को हल्का गर्म कर सप्ताह में दो बार मसाज करने से गंजेपन की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। कलौंजी की राख को ऑलिव ऑयल में मिलाकर मसाज करने से नए बाल आने शुरू हो सकते हो सकते हैं।
• बाल टूटने गिरने की समस्या आम है। कलौंजी में इस समस्या का समाधान भी छुपा है। सिर पर करीब 15-20 मिनट तक नीबू के रस से मसाज करने के बाद बालों को अच्छे से साफ करने के साथ कलौंजी के तेल से खूब अच्छी तरह मालिश कर कुछ देर के लिए बालों को यूं ही छोड़ दिया जाए। इस प्रक्रिया को नियमित दोहराने से बालों का झड़ना रुक सकता है।
• कलौंजी याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक है। कलौंजी के 8-10 बीजों को थोड़े से शहद के साथ प्रातःकाल खाली पेट खाने से याददाश्त तेज होने के साथ एकाग्रता भी बढ़ती है। कलौंजी और शहद के सेवन के बाद आधा घंटा कुछ खाना नहीं चाहिए।
• हृदय स्वस्थ हो तो बहुत कुछ तनाव से बचा जा सकता है। कलौंजी हृदय की सेहत का एक चिकित्सक की तरह ख्याल रखती है। प्रतिदिन यदि कलौंजी के बीज को गाय बकरी के दूध के साथ ले लें तो हृदय रोगों से बचा जा सकता है।
• कलौंजी के नियमित संतुलित मात्रा में सेवन से नेत्र ज्योति भी तेज होती है। साथ ही आंखों से पानी आने और आंखें लाल होने की समस्या में भी लाभ मिल सकता है।
• वजन घटाने में कलौंजी सहायता कर सकती है। गुनगुने नींबू पानी में नींबू चुटकी भर कलौंजी चूर्ण और एक चम्मच शहद की मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से वजन घटने लगता है।
• कलौंजी के सेवन से मुंहासे या पिगमेंटेशन में लाभ मिलता है। इसके लिए दो चम्मच नींबू के रस में कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह शाम लगाने से चेहरे के दाग धब्बे खत्म हो सकते हैं।
{ विशेष : कलौंजी के गुणों का भरपूर लाभ लेने और नुकसान से बचने के लिए, योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यहां दी गई जानकारी सामान्य है, जिसे उपचार के रूप में हम मान्यता नहीं देते हैं। सामान्य जानकारी को योग्य चिकित्सक का विकल्प कदापि नहीं माना जा सकता है।}