विनय संकोची
Health: पपीता (Papaya)एक ऐसा मधुर फल है, जो सस्ता और सर्वत्र सुलभ है। यह फल(Fruit) प्राय बारहों मास में पाया जाता है। आयुर्वेद में पपीते को अनेक असाध्य रोगों को दूर करने वाला बताया गया है। कच्चे पपीते में विटामिन-ए(Vitamin-A) तथा पके पपीते में विटामिन-सी(Vitamin- C) की मात्रा भरपूर पाई जाती है। संग्रहणी, अजीर्ण, मंदाग्नि को दूर करने वाले और हृदय के लिए उपयोगी होने के कारण पपीते का महत्व बहुत अधिक हो जाता है। पपीते में 96.60 प्रतिशत पानी के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज लवण, कैल्शियम प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज पदार्थ पाए जाते हैं। महर्षि चरक ने लिखा है कि कच्चा पपीता मल रोधक तथा कफ और वात को कुपित करने वाला होता है। परंतु पका फल खाने में मीठा रुचिकर पित्त का नाश करने वाला, भारी तथा स्वादिष्ट होता है। पपीते का सबसे बड़ा गुण यह है कि ज्यों-ज्यों यह पकता जाता है, इसमें विटामिन की मात्रा बढ़ती जाती है।
• पपीते को पेट के लिए तो वरदान ही माना गया है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। पपीते का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता है और मोटापे को नियंत्रित करता है। अगर खट्टी डकार आती हैं, तो पपीते का रस उसे भी बंद कर देता है। पक्के या कच्चे पपीते की सब्जी बना कर खाना पेट के लिए लाभकारी है।
• पपीता खाने से शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। पपीते में एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो समय से पहले बूढ़ा होने से रोकता है और शरीर लंबे समय तक जवान बना रहता है।
• पपीते के बीज में लिवर को ठीक करने के गुण होते हैं। हृदय रोगियों के लिए पपीता काफी लाभदायक होता है। पपीते के पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से एक कप रोज पीने से अतिशय अतिशय लाभ होता है।
• कब्ज सौ रोगों की जड़ है। अधिकांश लोगों को कब्ज होने की शिकायत रहती है। ऐसे में चाहिए कि रात्रि के भोजन के बाद पपीते का सेवन नियमित रूप से करें।
• बवासीर एक अत्यंत कष्टदायक रोग है। चाहे वह खूनी बवासीर हो यह बादी बवासीर। बवासीर के रोगियों को प्रतिदिन पका पपीता खाते रहना चाहिए।
• सौंदर्य वृद्धि के लिए भी पपीते का इस्तेमाल किया जाता है। पपीते को चेहरे पर रगड़ने से कील-मुंहासे, काली झाइयां व मैल दूर हो जाते हैं तथा त्वचा में एक नया निखार आता है। पपीता लगाने से त्वचा कोमल व लावण्य युक्त हो जाती है। इसके लिए हमेशा पके पपीते का ही प्रयोग करना चाहिए।
• पपीते के फूलों का सेवन करने से मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना आसान होता है। पपीते के फूलों का उपयोग करने से पाचन शक्ति बढ़ती है। इसके फूलों में विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-इ और फोलिक एसिड के साथ ही एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रोल के स्तर को सुधारता है।
• पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन सामान्य बनी रहती है। डेंगू और मलेरिया के मरीजों के लिए पपीते के पत्तों का रस रामबाण है। मरीज को इस से तुरंत आराम मिलता है। इससे प्लेटलेट्स और व्हाइट ब्लड सेल्स की बढ़ते हैं।
• पपीते के पत्तों को पीसकर इसका लेप करने से गठिया में लाभ होता है। पपीते के पत्तों को पानी में उबालने के बाद छानकर पीने से बुखार और हृदय संबंधी रोग में आराम मिलता है। पपीते के पत्तों से निकलने वाले दूध अल्सर, एग्जिमा और मस्सों के इलाज में भी उपयोगी है। दमा के मरीजों को पपीते के पेड़ के सूखे पत्तों का धुआं देने से आराम मिलता है।
• ये हैं अनमोल पपीते के कुछ लाभ। आप चाहें तो पपीते का सेवन कर अपनी काया को निरोगी और आकर्षक बना सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे, रोग विशेष के उपचार के लिए पपीते और उसके अव्यवों का उपयोग करने से पूर्व योग्य चिकित्सक से परामर्श करना न भूलें।