विनय संकोची
Health : शुद्ध शहद (Pure Honey) मधुमक्खियों द्वारा निर्मित एक स्वास्थ्यवर्धक आहार है, जो मीठा और चिपचिपा तरल रूप में प्राप्त होता है। शहद को प्राचीन काल से ही संपूर्ण विश्व में उच्च मान्यता प्राप्त है। ऋग्वेद में भी शहद और मधुमक्खियों का उल्लेख मिलता है। हिंदू धर्म में शहद अनेक धार्मिक कृत्यों में भी उपयोग किया जाता है। यूनानी सभ्यता में शहद को भगवान की विशेष दें माना जाता है। अरस्तु का विश्वास था कि शहद में जीवन वृद्धि का असाधारण गुण है। कुरान के अनुसार शहद सभी बीमारियों का निदान करता है। जैन धर्म में शहद सेवन को अनैतिक माना जाता है। भारत में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष शहद की खपत लगभग मात्र 25 ग्राम आंकी गई है। भारत की तुलना में विश्व के अन्य अनेक देशों में शहद की प्रति व्यक्ति खपत बहुत ज्यादा है। स्विट्जरलैंड और जर्मनी में यह मात्रा डेढ़ किलोग्राम से अधिक है। भारत में शहद को आज भी मात्र औषधि के रूप में इस्तेमाल करने का ही चलन है।
शहद अनेक पोषक तत्वों विटामिन और खनिजों से भरपूर है। शहद में फ्रक्टोज के अतिरिक्त विटामिन बी-6 (Vitamin - B 6), विटामिन सी(Vitamin-C) , एमिनो एसिड(Amino Acid), नाइसिन(Niacin), कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrate), राइबोफ्लेविन (Riboflavin) आदि भी पाए जाते हैं। एक चम्मच शहद में 64 कैलोरी ऊर्जा होती है और इसी मात्रा में 17 ग्राम फ्रक्टोज(Fructose), ग्लूकोज(Glucose), सुक्रोज (Sucrose)और माल्टोज(Maltose) यानी शुगर होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि शहद में फैट(Fat), फाइबर (Fibre) और प्रोटीन (Protein) बिल्कुल भी नहीं होते हैं।
आइए जानते हैं शहद के गुण और उपयोग के बारे में -
• शहद के सेवन से वजन कम करने में सहायता मिलती है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर सेवन करने से वजन नियंत्रित किया जा सकता है। इस मिश्रण में आधे नींबू का रस मिलाना भी उपयोगी है।
• प्रतिदिन एक गिलास गुनगुने दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में चमत्कार चमत्कारिक वृद्धि होती है। इस उपाय से अनेक रोगों के हमले से बचा जा सकता है।
• रोजाना रात में सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से अनेक बीमारियों की जड़ कब्ज़ से छुटकारा पाया जा सकता है। इस प्रयोग से कब्ज में आराम के साथ पेट फूलने और गैस की समस्या से भी निजात मिल सकती है।
• खांसी से परेशान लोगों को भी शहद राहत पहुंचाता है। रात में सोने से पहले गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से बलगम पतला होता है, जिससे खांसी में तुरंत आराम मिलता है। अदरक के रस और शहद को मिलाकर सेवन करने से भी खांसी ठीक होती है।
• शरीर के किसी हिस्से की त्वचा में खरोंच आई हो या मामूली रूप से जल गई हो तो शहद लगाने से आराम मिलता है। साथ ही किसी प्रकार के संक्रमण का भय भी नहीं रहता है।
• शुद्ध शहद के नियमित सेवन से रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। इतना ही नहीं रक्तचाप के कारण चक्कर आने की समस्या में भी फायदा होता है।
• इस तरह के प्रारंभिक प्रमाण उपलब्ध हुए हैं कि शहद कीमोथेरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को कम होने से रोक सकता है। यानी शहद में कैंसर रोधी गुण भी पाए जाते हैं।
• शहद तमाम तरह के संक्रमण से रक्षा करने में भी सहायक है। शहद उन हानिकारक बैक्टीरिया से भी लड़ने में सक्षम है जिन पर एंटीबायोटिक्स का भी कोई असर नहीं होता है।
• शहद दिल का भी दोस्त है। एक अनार के ताजा रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करना दिल को बीमारियों से बचाता है। खजूर को सुईं से गोदकर शहद में डुबोकर दिन में दो बार दो-दो खजूर सेवन करना भी हृदय को स्वस्थ रखता है।
• नीम के पत्तों की कंचे के आकार की गोली बनाकर उसे शहद में डुबोकर सुबह खाली पेट निगलने और एक घंटा कुछ भी ना खाने से त्वचा अथवा किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी में बहुत आराम आता है।
• शहद और गुनगुने पानी के मिश्रण के सेवन से खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता और रक्त की कमी की स्थिति में लाभ होता है।
जरूरी बात : शहद का अत्यधिक उपयोग लाभ के बदले नुकसान पहुंचा सकता है। एक साल से कम उम्र के बच्चे को शहद नहीं देना चाहिए। जिन्हें पराग कणों से एलर्जी हो उन्हें शहद से परहेज रखना चाहिए। अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल वाले मधुमेह रोगियों को शहद के सेवन से दूरी रखनी चाहिए। समान मात्रा में घी और शहद का सेवन हानिकारक है। शहद को ज्यादा गर्म पानी में डालकर पीना भी नुकसानदायक होता है। विशेष : यहां शहद के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। परंतु सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प कदापि नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में शहद को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य / चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।