विनय संकोची
खजूर (Date)विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। यह ताजा और सूखा दोनों तरफ से फलों में गिना जाता है। पेड़ पर पके खजूर ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन जल्दी खराब हो जाने की वजह से इन्हें धूप में सुखाया जाता है। ताजे खजूर के मुकाबले सूखे खजूर में रेशों की मात्रा अधिक होती है। अरब देशों में खजूर की व्यवस्थित रूप से खेती के प्रमाण ईसा से 3000 वर्ष पूर्व के हैं। विश्व भोजन एवं कृषि संस्थान के अनुसार विश्व में लगभग 9 करोड खजूर के वृक्ष हैं। खजूर के हर पेड़ का जीवन एक 100 सालों से अधिक होता है।
छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन हैं। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और यह दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इनकी उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है। यद्यपि खजूर हर प्रकार से गुणकारक है, परंतु इसमें विरोधाभास भी पाया जाता है। शीतकाल में जो इसे खाते हैं, वे इसे गर्म मानते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में इसे शीतल गुण वाला माना गया है, इसलिए गर्म तासीर वालों को यह खूब उपयोगी व माफिक आता है। ठंडा आहार जिनके शरीर के अनुरूप नहीं होता, उन्हें खजूर नहीं खाना चाहिए। खजूर में पोषक तत्व काफी मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के रूप में नैसर्गिक शक्कर हमारे शरीर को मिलती है। चार खजूरों में के लगभग 230 कैलोरी, 2 ग्राम प्रोटीन, 62 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 570 मिलीग्राम पोटैशियम और खाद्य रेशे होते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल और वसा की मात्रा बिल्कुल नहीं होती है, जिसके कारण यह एक आदर्श फल माना जाता है।
छुहारे में पाया जाने वाला मैग्नीशियम शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है, इससे मधुमेह का खतरा दूर होता है। मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकालकर, गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीने से कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जाएगा। खजूर में शर्करा वसा व प्रोटीन विपुल मात्रा में पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृध्दि होकर शरीर पुष्ट होता है।
छुआरों में पोटेशियम होता है, जो कोलेस्ट्रोल को कम करता है। इससे हृदय संबंधी बीमारियां कम होती हैं। रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या शुद्ध घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की वाहिकाओं को ताकत मिलती है। विशेषत: रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन में, एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभकारी है। खजूर रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता है।
लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है। छुआरों में मौजूद फ्लोराइड दांतों को सड़ने से रोककर उन्हें मजबूत करता है। छुआरे में मिलने वाला विटामिन बी5 बाल झड़ने और दो मुंहे बालों की समस्याओं को दूर करता है। यह बालों को लंबा और घना बनाने में मदद करता है। नित्य दो छुहारे सुबह उठते ही चबा-चबाकर खाकर गुनगुना पानी पीने से फेफड़ों को ताकत मिलती है। यह उपाय दमा रोगी के लिए बहुत लाभदायक है। सुबह शाम 3 छुआरे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है।
छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर उसका लेप घाव पर लगाने से घाव तुरंत भर जाता है। जुकाम से परेशान रहते हैं, तो एक गिलास दूध में 5 दाने खजूर के डालें, पांच दाने कालीमिर्च, एक दाना इलायची और इसे अच्छी तरह से उबालकर उसमें एक चम्मच घी डालकर रात को पीने से सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाता है। भूख बढ़ाने के लिए छुआरे का गूदा निकालकर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है, इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार 100 ग्राम से अधिक खजूर नहीं खाने चाहिए। इससे पाचन शक्ति खराब होने का डर रहता है। खजूर एक तरह से अमृत के समान है। यह आंखों की ज्योति व याददाश्त भी बढ़ाता है।
विशेष : रोग विशेष के उपचार के लिए खजूर को औषधि के रूप में इस्तेमाल करने से पूर्व किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह कर लेनी चाहिए।