विनय संकोची
भारत में केसर कश्मीर में पैदा होता है। शुद्ध केसर तेज लाल व नारंगी रंग की रेशम की तरह होते हैं। ये 'क्रॉकस सैटाइवस' नामक पौधे के फूलों की नाजुक पंखुड़ियां होती हैं। इस पौधे के फूल बैंगनी रंग के होते हैं। मादा फूलों के अंदर तेज लाल रंग की दो से ढाई सेंटीमीटर लंबी तीन पत्तियां होती हैं। पंखुड़ियों को सावधानी से निकाल कर सुखा लिया जाता है और केसर तैयार हो जाता है।आयुर्वेद के अनुसार अल्प मात्रा में नियमित रूप से ग्रहण करने पर केसर त्रि-दोषों से निजात दिलाता है। केसर बहुत ही उपयोगी गुणों से युक्त होता है। यह कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाला, मस्तिष्क को बल देने वाला, ह्रदय और रक्त के लिए हितकारी होता है। देव पूजा में, आयुर्वेदिक नुस्खों में, खाद्य व्यंजनों आदि में तो केसर का उपयोग होता ही था, अब पान मसालों और गुटखों में भी इसका उपयोग होने लगा है। सौंदर्य प्रसाधन में भी केसर का इस्तेमाल हो रहा है। आयुर्वेद के अनुसार केसर मूत्राशय, तिल्ली, लीवर, मस्तिष्क व नेत्रों की तकलीफों में भी लाभकारी होता है। प्रदाह को दूर करने का गुण भी इसमें पाया जाता है। केसर खाने में कड़वा होता है, लेकिन खुशबू के कारण विभिन्न व्यंजनों एवं पकवानों में डाला जाता है।
घुलनशील केसर में कैरोटीन, लाइकोपीन, जियाजैंथिन, क्रोसिन, पिके क्रोसिन आदि तत्व पाए जाते हैं। इसमें ईस्टर कीटोन एवं वाष्पशील सुगंधित तेल भी कुछ मात्रा में मिलते हैं। अन्य रासायनिक यौगिकों में तारपीन एल्डिहाइड एवं तारपीन अल्कोहल भी पाए जाते हैं। इन रासायनिक एवं कार्बनिक यौगिकों की उपस्थिति केसर को अनमोल औषधि बनाती है। केसर का स्वभाव गर्म होता है। अतः औषधि के रूप में 250 मिलीग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की मनाही है।
केसर बहुत महंगा होता है। असली और नकली केसर की पहचान करने के लिए गर्म पानी अथवा गर्म दूध में थोड़ा सा केसर डालें। अगर वह तुरंत रंग छोड़ दे, तो समझें कि नकली है। असली केसर कम से कम 10 से 15 मिनट बाद गहरा लाल रंग छोड़ता है और महकने लगता है।
• आर्थराइटिस के मरीजों के लिए केसर बहुत लाभकारी होता है। यह जोड़ों के दर्द से भी राहत दिलाता है और थकान को दूर करने में मांसपेशियों को राहत पहुंचाने का काम करता है।
• केसर में क्रोसिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से बुखार को दूर करने में उपयोगी माना जाता है। इसके साथ ही यह एकाग्रता, स्मरण शक्ति और रिकॉल क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है।
• चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, नेत्र और मस्तिष्क को शीतलता शांति और ऊर्जा मिलती है। नाक से रक्त गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द दूर होता है।
• बच्चों को पतले दस्त लगने पर केसर की 1- 2 पंखुड़ी खरल में डालकर 2-3 बूंद पानी टपका कर घोटें। अलग पत्थर पर पानी के साथ जायफल, आम की गुठली, सौंठ और बच बराबर-बराबर मात्रा में घिसें और इस लेप को केसर में मिला लें। इसे एक चम्मच पानी में मिलाकर, शिशु को पिला दें।
• त्वचा के झुलसने या चोट लगने पर केसर का लेप लगाना चाहिए, इससे तुरंत फायदा होता है और नई त्वचा का निर्माण जल्द होता है। केसर मसूड़ों की परेशानी से निजात दिलाता है। यह मसूड़ों में सूजन और जख्मों को दूर करता है। इसके साथ ही यह मुख और जीभ की तकलीफ को भी दूर करता है।
• महिलाओं के लिए केसर बहुत फायदेमंद है। महिलाओं को कई शिकायतें जैसे मासिक चक्र में अनियमितता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से बहुत आराम मिलता है।
• अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में भी केसर काफी उपयोगी होता है। इसके साथ ही अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। रात को सोने से पहले दूध में केसर डालकर पीने से अनिद्रा की शिकायत दूर हो जाती है। केसर को दूध के साथ पीने से शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है।
• गैस और एसिडिटी में राहत दिलाने का काम भी केसर करता है। यह हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। केसर आंखों की परेशानी को दूर करने में भी मददगार है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिस प्रतिभागी ने केसर का सेवन किया, उसकी नजरें बेहतर रहीं। केसर मोतिया को दूर करने में भी मदद करता है।
• किडनी और लीवर के लिए भी केसर काफी फायदेमंद होता है। यह ब्लेडर और लीवर की समस्या को ठीक करने में मदद करता है और रक्त का शुद्धिकरण करता है।
• ध्यान रहे, केसर का अधिक प्रयोग करने से सिर दर्द, उल्टी, भूख में कमी आदि की समस्या हो जाती है। दिल के रोगी, गर्भवती महिलाएं तथा अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित लोग केसर का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।