विनय संकोची
मुलेठी एक फायदेमंद वनस्पति है, इसे संस्कृत में मधुयष्टी, बांग्ला में जष्टिमधु, मलयालम में इरत्तीमधुरम तथा तमिल में अतिमधुरम कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी अपने नायाब गुणों के कारण तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। सर्व सुलभ जड़ी मुलेठी के उपयोग और फायदे का उल्लेख आयुर्वेद से जुड़े ग्रंथों में किया गया है। आयुर्वेद में मुलेठी का प्रयोग आदिकाल से कई खतरनाक रोगों से बचने के लिए किया जाता रहा है।
• शरीर में कमजोरी, शुष्कता और खून की कमी को दूर करने के लिए मुलेठी का सेवन लाभदायक होता है। मुलेठी का रोज 1 ग्राम सेवन करने से खून में वृद्धि होती है। यदि किसी को निरंतर थकान जैसी तकलीफ हो, तो उसे अपने पास मुलेठी रखनी चाहिए, क्योंकि यह शारीरिक थकान मिटाती है।
• दिल की बीमारी को ठीक करने में भी मुलेठी का सेवन काफी प्रभावशाली माना गया है। एक शोध से पता चला है कि मुलेठी की जड़ को खाने से कोलेस्ट्रॉल में काफी कमी आती है। हृदय की रक्षा होती है और हार्ट अटैक की संभावनाएं खत्म होती हैं। इसके साथ ही मुलेठी खून को अधिक गाढ़ा होने से भी बचाती है, जिससे रक्त संबंधी किसी भी तरह के विकार का शिकार होने से बचा जा सकता है।
• सांस की बीमारी या दमा जैसे रोगों में मुलेठी संजीवनी के रूप में कार्य करती है। इसमें पाया जाने वाला विशेष रसायन दमा जैसी समस्या के लिए रामबाण तत्व माना गया है।
• मुलेठी की तासीर ठंडी होती है, जिसके कारण यह पित्त जैसी समस्या को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। बढ़े हुए आमाशय को भी मुलेठी नियंत्रित करती है। आमाशय में अल्सर होने की वजह से पित्त में वृद्धि होने लगती है। यदि रोजाना मुलेठी को घी में पकाकर उपयोग किया जाए तो इस रोग से मुक्ति मिल सकती है।
• अनियमित और विपरीत आहार का सेवन करने से आजकल मोटापा कब्ज़ और वायु रोगों में लगातार वृद्धि हो रही है। इनमें कब्ज़ प्रमुख है। मुलेठी की सूखी जड़ें पीसकर उसका चूर्ण बनाकर गुड और पानी के साथ सेवन करने से निश्चित रूप से कब्ज की समस्या से निजात मिल सकती है।
• बुजुर्गों के साथ-साथ आजकल युवाओं में भी शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत आम हो गई है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए मुलेठी का सेवन बहुत लाभकारी होता है। मुलेठी की जड़ों को पूरी रात पानी में भिगोकर सुबह सवेरे उठकर उस पानी को पीने से पुराने से पुराने जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द में काफी हद तक राहत मिलती है।
• गले की हर तरह की समस्या में मुलेठी फायदा देती है। यदि गले में खराश हो तो मुलेठी को चूसना चाहिए। यह गले को ठीक करने के साथ आवाज को भी मधुर बनाती है। आयुर्वेद के मुताबिक मुलेठी की जड़ों को साफ पानी में कुछ समय तक भिगोकर रखने के बाद, उस पानी से गरारे करने से मुंह में मौजूद छाले खत्म हो जाते हैं।
• मिर्गी के इलाज में भी मुलेठी का इस्तेमाल दवा के तौर पर होता है। मुलेठी आंतों में होने वाली टी. बी. की परेशानी को भी दूर करती है।
• वैसे तो मुलेठी शक्कर से भी ज्यादा मीठी होती है, पर मधुमेह की बीमारी के उपचार में भी इसका इस्तेमाल होता है। कोई भी समस्या ना हो, तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए, इससे आंतों के अल्सर और कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचन क्रिया भी एकदम ठीक रहती है।
• मुलेठी स्त्रियों के कुछ लोगों को भी दूर करती है। यह सौंदर्य में बढ़ोतरी करती है। इसके सेवन से मोटापा भी दूर होता है। मुलेठी के 1 ग्राम चूर्ण को पानी के साथ सेवन करने से सुंदरता लंबे समय तक टिकी रहती है।
• मुलेठी के उपयोग के संबंध में यह बात जान लेना आवश्यक है कि उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति को मुलेठी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जिनके रक्त में पोटेशियम की मात्रा कम है और सोडियम की मात्रा अधिक है, शरीर में सूजन है अथवा कोई स्त्री प्रसव अवस्था में है, तो उन्हें भी मुलेठी के इस्तेमाल की इजाजत आयुर्वेद के जानकार नहीं देते हैं।
मीठी मुलेठी से रोग विशेष के उपचार से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य कर लें।