सभी जानते हैं कि दालें (Pulses)प्रोटीन(Proteins) से भरपूर होती हैं, लेकिन दालों में भी सबसे स्वास्थ्यवर्धक तथा शक्तिवर्धक दाल मूंग की होती है। मूंग की दाल (Moong Daal)की खास बात है कि यह सुपाच्य होती है। इसके अतिरिक्त मूंग की दाल में कार्बोहाइड्रेट्स, कई प्रकार के विटामिन(Vitamins), फास्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो अनेक बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखते हैं। मूंग साबूत हो या दली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है। अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और विटामिंस की मात्रा दोगुनी हो जाती है। अंकुरित मूंग दाल में मैग्नीशियम, कॉपर, फॉलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी-6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है।
कुछ लोगों को लगता है कि मूंग दाल बीमारी में खाने के लिए होती है, जबकि मूंग दाल में इतने पौष्टिक तत्व होते हैं कि अपनी खुराक में उसे शामिल करना ही चाहिए। मात्र एक कटोरी पकी हुई मूंग की दाल में सौ से भी कम कैलोरी होती है। इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। रात के खाने में रोटी के साथ एक कटोरी मूंग दाल खाने से भरपूर पोषण मिलता है और जल्दी ही बढ़ा हुआ वजन कम होता है। इस तरह मूंग दाल मोटापा घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
शोध(Experiment )बताते हैं कि मूंग दाल खाने से त्वचा कैंसर(Skin Cancer) से सुरक्षा भी मिलती है। जब मनुष्य सूर्य की किरणों या फिर पर्यावरण प्रदूषण के संपर्क में आते हैं, तो उनकी त्वचा में हानिकारक मुक्त कण प्रवेश कर जाते हैं, जिससे त्वचा को काफी नुकसान पहुंचता है। लेकिन यदि खाने में मूंग दाल को शामिल किया जाए, तो उस से एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो हानिकारक मुक्त कणों से लड़कर त्वचा को कैंसर से बचा लेते हैं।
मूंग की मदद से आसानी से रक्तचाप (Blood Pressure)को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही मूंग कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करती है। यह सोडियम के प्रभाव को कम कर देती है, जिससे रक्तचाप बढ़ता नहीं है। मूंग, आयरन की कमी को पूरा करने में सक्षम है। आमतौर पर शाकाहारी लोग अपने खाने में कम आयरन लेते हैं, अपनी खुराक में मूंग दाल को शामिल करके आयरन की कमी दूर की जा सकती है, जिससे एनीमिया का जोखिम भी अपने आप कम हो जाएगा। दाद खाज खुजली की समस्या में मूंग की दाल को छिलके सहित पीसकर लेप बनाकर उसे प्रभावित जगह पर लगाने से लाभ होता है।
टाइफाइड होने पर मूंग की दाल खाने से मरीज को बहुत आराम मिलता है। किसी भी बीमारी के बाद शरीर कमजोर हो जाता है। मूंग की दाल खाने से शरीर की ताकत मिलती है। मूंग की दाल के लेप से ज्यादा पसीना आना भी रुक जाता है। दाल को हल्का गर्म करके पीस लें फिर उस पाउडर में कुछ मात्रा पानी की मिलाकर लेप की तरह पूरे शरीर पर मालिश करें, ज्यादा पसीना आने की शिकायत दूर हो जाएगी।
अंकुरित मूंग में ग्लूकोज लेबल बहुत कम होता है, इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं। अंकुरित मूंग के सेवन से पाचन क्रिया हमेशा सही बनी रहती है, जिसके कारण पेट संबंधी समस्या नहीं होती हैं। अंकुरित मूंग में शरीर के विषाक्त तत्वों को निकालने का गुण होता है। इसके सेवन से शरीर में विषाक्त तत्वों में कमी आती है और शरीर स्वस्थ तथा चुस्त रहता है। अंकुरित मूंग में पेप्टीसाइड होता है, जो रक्तचाप को संतुलित रखता है और शरीर को स्वस्थ एवं सुंदर बनाए रखने में कारगर होता है। अंकुरित मूंग में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जिससे अपच और कब्ज की समस्या नहीं होती तथा पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहती है। मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं।