विनय संकोची
भारत ही ऐसा देश है, जहां अनादि काल से काली मिर्च का उत्पादन होता रहा है। एक समय काली मिर्च के कारण ही भारत के व्यापारिक संबंध अरबों, यहूदियों और रोम के साम्राज्य तथा चीन से बने हुए थे। तब काली मिर्च को 'काला-सोना' भी कहा जाता था और सोने के बदले जहाजों में अन्य मसालों, सुगंधित द्रव्य आदि के साथ लादकर रोम तक जाया करता था। कहते हैं, भारत में लंबे समय तक चले काली मिर्च की खरीद से रोम का स्वर्ण भंडार समाप्त हो गया था। दक्षिण भारत के बहुत से भागों में काली मिर्च की खेती घर-घर में होती है। काली मिर्च के भारतीय क्षेत्र का विस्तार उत्तर मालाबार और कौंकण से लेकर दक्षिण में त्रावणकोर कोचीन तक है।
काली मिर्च एक अनुपम औषधि है और लाल मिर्च की अपेक्षा कम दाहक और अधिक गुणकारी है, इसीलिए मसाले में लाल मिर्च की बजाय काली मिर्च का उपयोग प्रचलित है। आयुर्वेद में काली मिर्च को सभी प्रकार के बैक्टीरिया वायरस आदि का नाश करने वाली औषधि माना जाता है। काली मिर्च सुगंधित, उत्तेजक और स्फूर्ति दायक है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा शास्त्रों में इसका उपयोग का भावार्थ श्वास आदि रोगों में उपयोग कफ, वात, श्वास इत्यादि रोगों में लाभदायक बताया गया है। भूख बढ़ाने और ज्वर की शांति के लिए दक्षिण में तो इसका विशेष प्रकार का 'रसम' भोजन के साथ पीया जाता है। यूनानी चिकित्सा विज्ञान के अनुसार काली मिर्च उदर पीड़ा, डकार और अफारा मिटाकर कामोत्तेजना एवं विरेचन करती है। काली मिर्च अरुचि, अजीर्ण, ज्वर, दांत-दर्द, मसूड़ों की सूजन, पक्षाघात, नेत्र-रोग आदि में भी हितकारी है।
• काली मिर्च के इस्तेमाल से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बनता है, जो अच्छे मूड के लिए जिम्मेदार होता है। सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ने से डिप्रेशन में भी फायदा मिलता है।
• काली मिर्च चूर्ण को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज सुरीली हो जाती है। 8-10 काली मिर्च पानी में उबालकर, इस गर्म पानी से गरारे करने से गले का संक्रमण समाप्त हो जाता है।
• गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधे नींबू का रस मिलाकर, आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण व आधा चम्मच काला नमक मिलाकर नियमित कुछ दिन तक सेवन करने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है।
• गठिया के रोगियों के लिए भी काली मिर्च काफी फायदेमंद होती है। काली मिर्च को तिल के तेल में जलने तक गर्म करके ठंडा होने पर तेल को मांसपेशियों पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।
• काली मिर्च शरीर की वसा को कम करने का भी काम करती है। इससे पाचन प्रक्रिया तेज होती है और कम समय में अधिक कैलोरी खर्च होती है। साथ ही यह शरीर में से टॉक्सिंस को निकाल बाहर करने में भी कारगर है।
• कब्ज होने पर काली मिर्च के चार-पांच साबुत दाने दूध के साथ रात को लेने से कब्ज में लाभ मिलता है। काली मिर्च को घी में बारीक पीसकर लेप करने से दाद, फोड़ा, फुंसी आदि रोग दूर हो जाते हैं।
• पानी में काली मिर्च को तुलसी, अदरक, लौंग और इलायची के साथ उबालकर, इसकी चाय बनाकर पीने से जुकाम-बुखार में लाभ होता है। काली मिर्च 20 ग्राम, जीरा 10 ग्राम और शक्कर या मिश्री 15 ग्राम कूट पीसकर मिलाकर सुबह-शाम पानी के साथ फांकने से बवासीर रोग में लाभ होता है।
• मसूड़ों में सूजन और सांस में बदबू की समस्या हो तो एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च को पानी में मिलाकर उसे मसूड़ों पर मलने से लाभ होता है। पानी की जगह लौंग का तेल इस्तेमाल करने से असर और भी जल्द होता है।
• काली मिर्च के कारण पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड ज्यादा पैदा होता है, जो हाजमे में मददगार होता है। इससे पेट-दर्द, पेट के फूलने और कब्ज की समस्या में भी राहत मिलती है।
• रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद और अदरक के रस के साथ चुटकी भर काली मिर्च लेने से कफ कम होता है। चाय में मिलाकर पीने से भी फायदा मिलता है। आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े से शुद्ध देसी घी के साथ मिलाकर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
• एक गिलास छाछ में थोड़ा सा काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। मलेरिया होने पर काली मिर्च के चूर्ण को तुलसी के रस में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
विशेष : रोग विशेष के उपचार में औषधि के रूप में काली मिर्च का उपयोग किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर ही करना चाहिए।