विनय संकोची
लौंग(Clove) भारत के लगभग हर घर में मसाले के रूप में उपयोग में लाई जाती है। इसमें पाए जाने वाले तत्व युजेनॉल के कारण इसका स्वाद तीखा होता है और यही तत्व इसकी गंध के लिए भी जिम्मेदार है। लौंग में सेहत के बहुत राज छुपे हैं। यह देखने में भले ही कितनी भी छोटी हो लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं। यह साधारण सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर जैसी बड़ी और गंभीर बीमारियों के उपचार में लाभदायक है। लौंग का प्रयोग न केवल आयुर्वेद में बल्कि होम्योपैथी में भी किया जाता है। सदियों से मसाले के रूप में इस्तेमाल होने वाला लौंग औषधीय गुणों का खजाना है।
लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें विटामिन 'ए' और 'सी', मैग्नीशियम और फाइबर भी पाया जाता है और ये सभी, शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अपने अनमोल गुणों के कारण लौंग एक जिम्मेदार घरेलू वैद्य की भूमिका का निर्वाह करते देखी जा सकती है। भोजन का स्वाद बढ़ाना हो या फिर दर्द से राहत पाना हो, एक छोटी सी लौंग को कई तरह से प्रयोग में लाया जा सकता है। आइए जानते हैं गुणकारी लौंग के चमत्कारी फायदों के बारे में-
• शोधकर्ता चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि लौंग के इस्तेमाल से फेफड़े के कैंसर और त्वचा के कैंसर को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद युजेनॉल इस दिशा में सहायक है। दमा एक बड़ा ही कष्टकारी रोग है और लौंग दमे में भी काफी उपयोगी होती है। दमा पीड़ित व्यक्ति को लौंग की पांच कलियों को 30 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर शहद के साथ दिन में 3 बार पिलाने से काफी फायदा होता है। लौंग के तेल को सूंघने से ही जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस आदि समस्याओं में आराम मिलता है।
• डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी लौंग लाभकारी है। यह न केवल रक्त को शुद्ध करता है बल्कि ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में भी मददगार होता है। लौंग का सेवन प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाता है। लौंग में फ्लेवोनॉयडस भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए यह जोड़ों में होने वाले दर्द व सूजन से आराम दिलाने में बहुत सहायक है। कुछ चिकित्सक गठिया रोग के उपचार के लिए लौंग के तेल की मालिश की सलाह देते हैं।
• लौंग की चाय का इस्तेमाल पुराने जमाने से आंतों के कीड़े मारने के लिए किया जाता है लौंग में मौजूद विशिष्ट तत्व आंतों के परजीवी साफ कर देते हैं, जिससे कि पेट में दर्द और अन्य समस्याओं से राहत मिलती है। भोजन में प्रतिदिन 2 लौंग का सेवन करने से हाजमा और पाचन तंत्र दुरुस्त रहते हैं। दोपहर या रात को खाना खाने से पहले एक लौंग की चाय पीने से रक्त संचरण और सलाइवा बनना बढ़ जाता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। इसके अतिरिक्त लौंग के सेवन से एसिडिटी की समस्या भी दूर हो जाती है।
• अपने एंटीसेप्टिक गुणों के कारण लौंग चोट, खुजली और संक्रमण में काफी उपयोगी होती है। इसका उपयोग कीटों के काटने या डंक मारने पर भी किया जाता है। लौंग को किसी पत्थर पर पानी के साथ पीसकर काटे गए या डंक वाले स्थान पर लगाने से तत्काल बहुत लाभ होता है।
• तनाव आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। एक लौंग तनाव को ही कम कर नहीं करती बल्कि अपने विशिष्ट गुणों के कारण थकान को कम करने का भी काम बखूबी करती है। मसूड़ों और दांतों के दर्द में लौंग की चाय बहुत फायदेमंद होती है। लौंग मुंह से बैक्टीरिया दूर कर देती है और इससे दांतों में मसूड़ों का दर्द दूर हो जाता है।
• लौंग के तेल से चेहरे का कायाकल्प हो जाता है। लौंग का तेल मुहासे समाप्त करने में भी सहायता करता है। यह झुर्रियों में उम्र बढ़ने के प्रभाव को कम करने में लाभकारी है। त्वचा के किसी भी प्रकार के रोग के लिए लौंग का प्रयोग किया जा सकता है। त्वचा रोग होने पर चंदन के बूरे के साथ लौंग का लेप लगाने से फायदा होता है।
• पानी में तीन-चार लौंग उबालकर पीने से सिर दर्द दूर हो जाता है। हिचकियां आने पर दो-तीन लौंग चबाने और थोड़ा सा पानी पीने से फायदा होता है। लौंग पीसकर गर्म पानी के साथ खाने से जुकाम और बुखार ठीक होते हैं। लौंग सेंक कर मुंह में रखने से गले की सूजन और सूखे कफ का नाश होता है। लौंग का चूर्ण और हल्दी मिलाकर लगाने से नासूर मिटता है।
• ध्यान रखें लौंग की प्रवृत्ति बेहद गर्म होती है, इसलिए अधिक मात्रा में इसका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है। अतः अपने शरीर की प्रकृति को समझते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए। ज्यादा लौंग खाने से गुर्दे और आंतों को नुकसान पहुंच सकता है। ध्यान रहे, लौंग के तेल को कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं लगा कर किसी तेल में मिलाकर लगाना चाहिए। रोग विशेष में लौंग को औषधि के रूप में उपयोग करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।