विनय संकोची
अलसी ऊर्जा, स्फूर्ति व जीवटता प्रदान करती है। देश के विभिन्न भागों में अलसी को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इसे गुजरात में अडली, मराठी में जवास, बिहार में तीली, बंगाल में मशीना, तीशी, कन्नड़ में अगसी, मलयालम में चेरुचेना और तमिल में सिडीराई कहा जाता है। इसके बीज और बीजों का तेल औषधि के रूप में उपयोगी है। यह एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका वर्णन 'चरक संहिता' में भी मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार अलसी रस में मधुर, गुण में गुरु, स्निग्ध और उष्ण होने के कारण वात शामक, कफ-पित्त वर्धक होती है। अलसी में ओमेगा-3 और वसा-अम्ल पाया जाता है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, विटामिन-बी1, प्रोटीन, तांबा, मैगनीज, मैग्नीशियम, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है। अलसी इस धरती का सबसे शक्तिशाली पौधा है, जो तनाव के क्षणों में शांति बनाए रखने में सहायक है।
• अलसी के बीज मनुष्य द्वारा खाए जाने वाले सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक हैं। अलसी के बीज की लोकप्रियता के पीछे इसके कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाले तत्व भी हैं। अलसी अनेक रोगों के उपचार में प्रभावशाली औषधि के रूप में काम करती है।
• स्वस्थ हृदय पाने के लिए दैनिक आहार में अलसी के पिसे हुए बीज को शामिल करना बेहद उपयोगी है। अलसी के बीज कई हृदय-स्वास्थ्यवर्धक पोषक तत्वों से युक्त हैं जो दिल की कई बीमारियों को दूर रखते हैं। अलसी धमनियों में थक्कों के निर्माण को कम कर हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करती है। यह धमनियों में सूजन को भी कम करती है, जिससे धमनियां सुचारू रूप से कार्य करती हैं। अलसी के बीज का नियमित रूप से सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिल सकती है। शोध बताते हैं कि रोजाना 100 मिलीग्राम अलसी के बीज का सेवन करने से रक्त-कोलस्ट्रॉल का स्तर कम होता है।
• अलसी का सेवन मधुमेह के स्तर को नियंत्रित रखता है। मधुमेह से ग्रस्त रोगियों पर रिसर्च से यह पता चला है कि अलसी में मौजूद लिग्नन को लेने से रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रण में रहता है। मधुमेह के रोगी 25 ग्राम अलसी के बीजों का चूर्ण आटे के साथ गूंथें और रोटी बना लें। इसे दिन में तीन बार खाने से डायबिटीज नियंत्रित होती है।
• अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है। इसमें 27 प्रकार के कैंसर रोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाए जाने वाले तत्व कैंसर रोधी हारमोंस को प्रभावी बनाते हैं। विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है।
• हर दो में से एक व्यक्ति उच्च या निम्न रक्तचाप से पीड़ित है। इसके कारण उसे नाना प्रकार की व्याधियों का सामना करना पड़ता है। अलसी के सेवन से रक्त दबाव नियंत्रित रहता है।
• कमर और जोड़ों का दर्द एक आम बीमारी है। एक उम्र में के बाद उसकी पीड़ा को अधिकांश लोग भुगतते हैं। इस प्रकार के रोगियों के लिए अलसी बहुत ही लाभदायक है। 250 ग्राम अलसी के तेल में 15 ग्राम पिसी सौंठ और 4 छोटी चम्मच नमक मिलाकर, धुआं उठने तक गर्म करें। इस तेल की मालिश से पीठ दर्द, जोड़ों के दर्द में अप्रत्याशित लाभ मिलता है। •
• अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल जाता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुणकारी होता है।
• अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने में शीघ्र लाभ पहुंचाती है।
• अलसी में इसबगोल से भी ज्यादा एवं घुलनशील तथा अघुलनशील रेशे पाए जाते हैं, जिससे पेट की सफाई अच्छी तरह से हो जाती है। इसके सेवन से कब्ज रोगियों को पहले ही दिन से राहत महसूस होने लगती है।
• गर्भवती और स्तनपान करा रही महिलाओं को पिसे हुए अलसी के बीज या फिर अलसी के तेल को लेने से बचना चाहिए। रक्त को पतला करने वाली दवाई का सेवन कर रहे लोगों को इसका सेवन अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए, क्योंकि यह रक्तस्राव के खतरे को बढ़ा सकता है। अलसी के बीज का उच्च मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है। अलसी के बीज का अधिक मात्रा में सेवन एलर्जी का कारण भी बन सकता है। अलसी के बीज या तेल का प्रयोग चिकित्सक से परामर्श के उपरांत करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि विभिन्न रोगों के उपचार में लाभ के लिए इसकी निर्धारित मात्रा ही उचित होती है, अन्यथा नुकसान हो सकता है।