
Healthy Food Vs. Junk Food: अगर हम स्वस्थ और सुंदर रहना चाहते हैं और निरोगी जीवन जीना चाहते हैं तो हमें अपने शरीर के प्रवृत्ति को जानना चाहिए। यह प्रवृत्ति क्या है? और कैसे इनका संतुलन हमें सुंदर बना सकता है। कैसे हम गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं? आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ट्री दोष की बात कही गई है, हमारे शरीर में तीन तरह के दोष होते हैं। वात ,पित्त,कफ। आज हम शरीर में पित्त के दोष की बात कर रहे हैं। पित्त दोष क्या होता है और इसका संतुलन कैसे बिगाड़ सकता है हमारे शरीर की सुंदरता।
Healthy Food Vs. Junk Food: पित्त है जो शरीर में पाचन का काम करता है और धातुओं का निर्माण करता है। पित्त का शरीर में पाचन संबंधी कार्यों में अहम भूमिका है। तो आखिर पित्त हमें नुकसान कैसे पहुंचा सकता है। चूंकि पित्त अग्नि प्रधान है इसलिए शरीर में पित्त का संतुलन त्वचा की 40 गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। क्योंकि शरीर के कार्यों में वात पित्त का संतुलन आवश्यक है, ठीक है अगर किसी भी कारण से उनकी कमी या अधिकता हो जाती है तो शरीर के कार्य प्रभावित हो जाते हैं और वह अपना दुष्परिणाम छोड़ते हैं। पित्त की जठराग्नि खाना पचाने का काम करती है लेकिन जब यही अग्नि ज्यादा हो जाती है तो यह शरीर में जलन पैदा करती है और खाने बचने के कार्य को भी रोक देती है। जो धातुओं का निर्माण होता है वह भी प्रभावित हो जाता है। हमारे शरीर का विज्ञान पांच तत्व से बना है जिसमें वायु जल अग्नि, इन सब का महत्व पूर्ण स्थान है खाना पचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी आयुर्वैदिक ज्ञान के अनुसार शरीर वात पित्त कफ के संतुलन से समूचे ढंग से होता है लेकिन इनमें से किसी एक भी दोष की अधिकता या कमी हो जाए तो इसके दुष्परिणाम शरीर को भोगने पड़ते हैं और नाना प्रकार की जान बीमारियां हो सकती हैं। शरीर में तीन तरह के कफ होते हैं प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर प्रताप चौहान इस बारे में बताते हैं कि हमारे शरीर में तीन प्रकार के त्रिदोष यानी प्रवृत्तियां मानी गई है वात, पित्त, कफ
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Healthy Food Vs. Junk Food[/caption]
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