विनय संकोची
हमारे पूर्वजों ने अनेक खाद्य पदार्थों की तासीर जांच कर मौसम के अनुकूल भांति-भांति के स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों का आविष्कार किया। सदियों पूर्व अस्तित्व में आए तमाम तरह के शरबतों में अन्य पेय पदार्थों में एक नाम 'कांजी' का भी आता है। कांजी एक सात्विक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक अद्भुत पेय है। जिसके तमाम लोग दीवाने हैं। कांजी को उत्तर भारत का वसंत ऋतु का सर्वाधिक लोकप्रिय पेय होने का प्रमाण पत्र प्राप्त है।
कांजी की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि इसे बनाना बेहद आसान और कम खर्चीला है। कांजी बनाने के लिए लंबे-चौड़े तामझाम की आवश्यकता नहीं होती है। कांजी बनाने के लिए चाहिए - लाल या काली गाजर (कुछ लोग चुकंदर और मूली का प्रयोग भी करते हैं) राई, नमक, हींग और लाल मिर्च पिसी हुई।
कांजी बनाना भी बहुत ही आसान है। कांजी का पानी बनाने के लिए सबसे पहले गाजर को छीलने और बीच में से चीरकर उंगली के बराबर लंबाई में काट लें। इसके बाद पहले पानी उबालकर, उसमें पांच मिनट से भी कम समय तक कटी गाजर को पकाएं। ध्यान रखने वाली बात यह है कि गाजर को ज्यादा नहीं पकाना है। आंच पर से उतारकर गाजर के पानी को ठंडा होने के लिए छोड़ दें। पानी ठंडा होने पर उसमें पिसी हुई राई, लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक और थोड़ी हींग डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद गाजर के मिश्रण को एक मर्तबान या मटके में डाल कर उसके मुंह पर झीना कपड़ा बांध कर मटके को दो-तीन दिन तक धूप में रखें। राई का पानी चढ़ने यानी खट्टा होने में तीन से चार दिन लगते हैं। कांजी का तैयार होना तब माना जाता है, जब उसका पानी बहुत ही स्वादिष्ट खट्टा हो जाए। गाजर की जगह मूली, चुकंदर का प्रयोग भी किया जा सकता है। कांजी में उड़द की दाल के मंगोड़े डालकर भी खाए जाते हैं।
कांजी बनाने में डाले जाने वाले सभी पदार्थ गुणकारी होते हैं और शरीर को लाभ ही पहुंचाते हैं। सबसे पहले गाजर की बात करें गाजर विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-के, पोटेशियम, आयरन जैसे अनेक आवश्यक पोषक तत्वों से भरी है। गाजर आंखों के स्वास्थ्य में मददगार होती है। गाजर खून में कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित कर हृदय रोग के जोखिम को कम करती है। मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में गाजर में मौजूद विटामिन-ए कारगर होता है। विटामिन-ए मसूड़ों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गाजर में कैंसर कोशिकाओं को विकसित होने से रोकने का गुण होता है। गाजर फाइबर का अच्छा स्रोत है, फाइबर की मदद से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। कब्ज से राहत मिलती है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी गाजर सहायक है। सबसे बड़ी बात कि गाजर एंटी-एजिंग गुणों से समृद्ध है, इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन त्वचा को जवान बनाए रखने में सहायक होता है।
कांजी को गुणकारी बनाने में राई बड़ी भूमिका निभाती है। राई अपच, भूख की कमी, बवासीर और गठिया में लाभदायक होती है। राई का मूत्र रोग के उपचार में भी उपयोग होता है। राई वात, पित्त, कफ त्रिदोष को ठीक करने वाला है। राई के दाने सिर दर्द और माइग्रेन में काफी लाभकारी माने जाते हैं। राई के दानों में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो नर्वस सिस्टम को रिलेक्स करता है। राई के प्रयोग से लीवर की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त भी आयुर्वेद में राई के अनेक गुण व उपयोग बताए गए हैं। कांजी गाजर और राई के गुणकारी तत्वों की वजह से स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक हो जाती है।
मानव शरीर में अच्छे और बुरे दोनों तरह के जीवाणु होते हैं। कांजी शरीर में अच्छे जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि करती है। इससे पाचन शक्ति में लाभ होता है और साथ ही रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है। चुकन्दर की कांजी से यकृत को साफ रखनें में मदद मिलती है। १० ग्राम सौंफ का रस निकाल कर कांजी में मिलाकर पीने से गठिया में अप्रत्याशित लाभ होता है।
लेकिन ध्यान रहे यदि कांजी को औषधि के रूप में इस्तेमाल करना हो तो विशेषज्ञ की राय अवश्य ले लें।