जितनी मर्जी शादियां नहीं कर सकते! हाईकोर्ट ने लगाई रोक, बोला- हर पत्नी के साथ न्याय जरूरी
भारत
चेतना मंच
20 Sep 2025 04:00 PM
केरल हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में साफ कर दिया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहुविवाह की अनुमति जरूर है, लेकिन यह अनुमति बिना शर्त नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर पति अपनी पत्नियों के साथ बराबरी का न्याय नहीं कर सकता, तो उसे दूसरी या तीसरी शादी का हक नहीं मिल सकता। यानी माली हालत ठीक होने और सभी पत्नियों का भरण पोषण बराबरी से कर सकने के बाद ही धार्मिक छूट के हिसाब से आगे शादी करना होगा। High Court Decision :
भीख से गुजारा करने वाला तीसरी शादी की फिराक में
यह फैसला जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने उस मामले में सुनाया, जिसमें पलक्कड़ जिले का एक नेत्रहीन व्यक्ति जो मस्जिदों के बाहर भीख मांगकर महीने में करीब 25,000 कमाता है, तीसरी शादी करने की तैयारी में था। उसकी दूसरी पत्नी ने अदालत से गुहार लगाई थी कि पति न सिर्फ उसे तलाक की धमकी देता है, बल्कि एक और निकाह करने की योजना भी बना रहा है।
पहले महिला की भरण-पोषण याचिका कर दी थी खारिज
परिवार अदालत ने पहले महिला की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि भिखारी से गुजारा भत्ता नहीं वसूला जा सकता। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि इस्लाम में बहुविवाह की छूट तभी है जब पति हर पत्नी के साथ न्याय कर सके। अगर कोई पुरुष वित्तीय या सामाजिक रूप से इस जिम्मेदारी को निभाने की स्थिति में नहीं है, तो वह दूसरी या तीसरी शादी का दावा नहीं कर सकता।
जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में पीड़ित और संबंधित व्यक्ति को काउंसलिंग दी जाए। इसमें धार्मिक नेताओं और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि व्यक्ति को समझाया जा सके और उसे तीसरी शादी से रोका जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि केरल में अधिकांश मुस्लिम एक ही पत्नी से संतोष करते हैं, बहुविवाह करने वाले अल्पसंख्यक हैं।