
हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन का कहर जारी है। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मणिमहेश यात्रा बाधित हुई है और अब तक प्रदेश में 3,560 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो चुका है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूरे हिमाचल प्रदेश को आपदाग्रस्त घोषित कर दिया है। राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शिमला मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह अगस्त महीना पिछले 76 वर्षों में सबसे अधिक वर्षा वाला रहा। राज्य में 431.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1949 के बाद का उच्चतम आंकड़ा है। Himachal Pradesh flood
राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है। आपदाग्रस्त घोषित होने के बाद, राज्य अब अतिरिक्त संसाधन जुटा सकेगा। विधायक निधि और सरकारी योजनाओं के बजट में कटौती करके प्रभावित क्षेत्रों की मदद की जाएगी। इसके अलावा, नए सेस लगाने का विकल्प भी खुला है, जैसा कि कोविड काल में किया गया था।
आपदाग्रस्त घोषित होने के बाद केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त सहायता प्राप्त होगी। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जिला स्तर के अधिकारी—डीसी, एडीएम और एसडीएम—तुरंत राहत और पुनर्वास से जुड़े निर्णय ले सकेंगे, जिससे प्रक्रियाओं में समय की बचत होगी।
विधायक निधि और योजनाओं के बजट से राहत कार्यों के लिए धनराशि मुहैया कराई जा सकेगी।
नया सेस लगाया जा सकता है, ताकि अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकें।
केंद्र से विशेष सहायता और फंड प्राप्त होंगे।
जिला स्तर के अधिकारियों को तत्काल निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा।
प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाने और पुनर्वास कार्य तेज करने में मदद मिलेगी।
भूस्खलन और बारिश के चलते राज्य में 1,281 सड़कें बंद हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। शिमला जिले में 267, मंडी में 257, चंबा में 239, कुल्लू में 168 और सिरमौर में 126 सड़कें प्रभावित हुई हैं। शिमला-कालका रेलवे मार्ग पर मलबा आने के कारण छह ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं।
पिछले 24 घंटे में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पांच लोगों की मौत हुई है। शिमला जिले के जुंगा क्षेत्र में मकान पर मलबा गिरने से 35 वर्षीय व्यक्ति और उसकी 10 वर्षीय बेटी की जान गई। कोटखाई के चोल गांव में एक महिला मलबे में दब गई, जबकि जुब्बल के बधाल गांव में 23 वर्षीय युवती की मौत हुई। सिरमौर जिले के चौरास क्षेत्र में मकान ढहने से 37 वर्षीय महिला और आठ मवेशियों की जान गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि मणिमहेश यात्रा के दौरान 16 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। हडसर और मणिमहेश झील के बीच कुगती क्षेत्र से चार शव बरामद हुए हैं। यात्रा मार्ग पर फंसे करीब 15,000 तीर्थयात्रियों में से 10,000 को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बाकी के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से लाहौल-स्पीति के कई इलाकों में राशन और दवाइयां पहुंचाई गई हैं। अब तक पांच मरीजों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है। प्रभावित लोगों को भोजन, कंबल और स्लीपिंग बैग मुहैया कराए जा रहे हैं। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है और अगले 24 घंटे तक अत्यधिक बारिश की चेतावनी दी है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की अपील की है। Himachal Pradesh flood