Hindi Kavita –
सत्ता के नशे में
ताकत दिखाना
गरीबों की थाली से
भोजन को चुराना
अमीरों की तिजोरी
दिनोदिन बढना
बहुत खल रहा है।
चुनाव में झूठे
सपने दिखाना
चुनाव के लिए
आपस में लड़ाना
चुनाव जीतने पर
लौटकर न आना
बहुत खल रहा है।
भ्र्ष्टाचार देश से
न मिट पाना
भयमुक्त समाज
न बन पाना
कमरतोड़ महंगाई से
निज़ात न मिलना
बहुत खल रहा है।
बेरोजगारों की
संख्या का बढ़ते जाना
कर्मचारियों को
पेंशन से वंचित रखना
नेताओं की आय
चौगुना बढ़ना
बहुत खल रहा है।
विकारों का समाज में
निरंतर बढ़ना
आध्यात्म के रास्ते से
आए दिन भटकना
देश के बजाए
जातियों में बंटना
बहुत खल रहा है।
- डा. श्रीगोपाल नारसन
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