Hindi Kavita –
बातों ही बातों में कभी कभी,
उन बातों की याद आ जाती है।
जिन बातों को खुद से न कभी,
याद करने की बात होती हैं।
शब्दों ही शब्दों में दबी दबी,
दिल की आह बन आ जाती है।
कविताओं के शब्दों में दबी,
फिर एक पहचान बनी होती हैं।
कुछ न कुछ बहुत कमी कमी,
मुझसे जब ये भी दूर हो जाती है।
खलती है मुझे जिसकी कमी,
उसकी उसमें याद बसी होती हैं।
- लोकेश शर्मा
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