Hindi Kavita –
छत के ऊपर चढ़ कर बैठी,
हर आँगन मे लेटी है।
नाम है इसका धूप कुमारी,
यह सूरज की बेटी है।
बहुत नकचढ़ी है चंचल है,
तनिक नहीं शर्माती है।
फूलों के संग खेला करती,
पेड़ों पर चढ़ जाती है।
सुबह सुबह खिड़की के रास्ते,
आती कमरे के अंदर।
कभी पलँग के नीचे छुपती,
कभी बैठती सोफे पर।
एक जगह पर कभी न रुकती,
भागा करती इधर उधर।
सबको आँख दिखाया करती,
बस बादल से डरती है।
वर्षा भर रोती रहती,
जाड़ो में मुस्काती है।
गर्मी में गुस्सा हो जाती,
सबको बहुत सताती है।
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