Hindi Kavita –
ज़िन्दगी की दौड़ में,
तजुरबा कच्चा ही रह गया।
हम सीख न पाये फ़रेब
और दिल बच्चा ही रह गया।
बचपन में जहाँ चाहा हंस लेते थे,
जहाँ चाहा सो लेते थे।
पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए
और आँसुओं को तन्हाई।
हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों मैं
चलो मुस्कुराने की वजह डुढते है
तुम हमें ढूँढो, हम तुम्हें ढूँढते है।
—————————————
यदि आपको भी कहानी, कविता, गीत व गजल लिखने का शौक है तो उठाइए कलम और अपने नाम व पासपोर्ट साइज फोटो के साथ भेज दीजिए। चेतना मंच की इस ईमेल आईडी पर- chetnamanch.pr@gmail.com
हम आपकी रचना को सहर्ष प्रकाशित करेंगे।
देशविदेश की खबरों से अपडेट रहने लिए चेतना मंच के साथ जुड़े रहें।देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुकपर लाइक करें या ट्विटरपर फॉलो करें।