Hindi Kavita – बड़ी ख्वाहिशों से घर को संवारा था मैंने
Hindi Kavita
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 10:36 AM
Hindi Kavita –
बड़ी ख्वाहिशों से घर को संवारा था मैंने
मिन्नत कर के चांद ज़मीं पर उतारा था मैंने ।।
प्रेम की नदियों के जल से सींच कर के
एक मुरझाते हुए फूल को निखारा था मैंने ।।
मीठी मीठी बातें करके उसके दर्द को भुलाया
दिल की शहनाईयों से उसे पुकारा था मैंने ।।
सहलाती थी सिर को चूम लेती थी माथा
जाग कर कितनी रातें गुज़ारा था मैंने ।।
रास्तों के सारे पत्थर चुन चुन कर हटाया
अपने कंधे का भी दिया सहारा था मैंने ।।
सब कुछ मैंने उसको मुस्कुरा कर दिया
खुद की आबरू तक भी हारा था मैंने ।।
जब दिल लगा नही ऐ निशा दिल लगाने को चला गया
रोका नहीं उसे खुद को बस जीते जी मारा था मैंने।।
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